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अकेलापन
अकेलापन
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© Tanha Shayar Hu Yash

Tragedy

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छोटी छोटी कहानियों के बड़े बड़े किस्से है और बड़ी बड़ी कहानियों के छोटे छोटे किस्से है। कभी कभी ख़ामोशी जैसा कोई साथी नहीं होता तो कभी ख़ामोशी से बड़ा कोई दुश्मन नहीं होता। ये तो वक़्त वक़्त की बात है की किसको क्या मिला इस ज़िंदगी से। कोई सब खोकर भी आराम सुकून पा जाता है और कोई सब पाकर भी आराम सुकून खो देता है। जिस ज़िंदगी से भागकर खुदको अकेला कर चला ये शक्श आज फिर से महफ़िल की तलाश में शहर शहर भटक रहा है कुछ साल पहले की बात है।

रीमा : सागर तुम्हे लगता है जो तुमने सोचा है वो सही है

सागर : हाँ मुझे लगता है मैं इस शहर से ऊब गया हूँ मेरा मन् किसी के साथ नहीं लगता , जिसे देखता हूँ ऐसा लगता है जैसे की ये शहर मुझे नोच रहा है।

रीमा : और तुम्हें ये लगता है की यहाँ से जाकर तुम सुखी हो जाओगे।

सागर : वो मुझे पता नहीं पर अब ये शहर मुझे मेरा सा नहीं लगता है जिन लोगो के लिए मैं इस शहर में आया था जब वो ही नहीं है तो अब मैं इस शहर में रहकर क्या करूंगा।

रीमा : और मैं , मैं तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं। मेरा प्यार तुम्हारे लिए कोई मायने नहीं रखता।

सागर : ऐसी बात नहीं है पर मैं तुम्हे ये सब नहीं समझ सकता , मेरा जाना तय है और तुम मुझे रोको मत। क्योकि मैं रुक न पाऊंगा।

( रीमा की आँखों में आंसू थे जिसे सागर देखकर भी अनदेखा कर रहा था वो नहीं जनता था की वो कितनी बड़ी गलती कर रहा है रीमा ने भी अपने दिल पर पत्थर रख लिया )

रीमा : जब तुम्हारे लिए वही सब लोग थे जो तुम्हे धोखा देते रहे और तुम्हे अपने मरे हुए लोगो से जयदा प्यार आज भी है और तुमने फैसला भी कर लिए है तो अब तुम्हे मैं जितना जानती हूँ तुम कोई बात नहीं मानोगे। और तुम्हे ऐसे समझ भी नहीं आने वाला। तो तुम चले ही जाओ पर एक बात याद रखना फिर कभी वापिस मत आना। क्योकि शायद तब तक मैं ज़िंदा ना रहूं और अगर ज़िंदा भी रही तो तुम्हारी न हो सकूँ।

सागर : मैं आने के लिए नहीं जा रहा हूँ रीमा।

रीमा : फिर ठीक है तुम जाओ।

( सागर बहुत दुखी था साल भर में उसके माँ बाप गुज़र गए थे और उसे बाद उसके भाइयों ने भी उससे रिश्ता तोड़ लिया था इसलिए अब वो इस शहर में नहीं रहना चाहता था पर इस फैसले ने रीमा को भी उससे दूर कर दिया था जो उससे बहुत प्यार करती थी। अपने दुःख में वो रीमा के प्यार को भी ख़तम कर रहा था। जो शायद सही नहीं था। )

( सागर दूसरे शहर चला गया बहुत दूर जहाँ उसने खुद को फिर जिया और एक अच्छा व्यापारी बन गया पर सागर हर शाम खुद को तन्हा ही पाता था वो न चाहकर भी रीमा की को भूला नहीं पाया था क्योकि सागर भी रीमा को बहुत चाहता था। पर आज बहुत देर हो चुकी थी रीमा की शादी हो चुकी थी और सागर आज भी तन्हा ही था उसने पैसा बहुत कमाया पर अपना खालीपन कभी भर नहीं पाया। जिस अकेलेपन के लिए वो भागकर आया था आज उसी अकेलेपन की तन्हाई उसे आवाज़ देती रहती थी तुमने रीमा के साथ ठीक नहीं किया। तुमने रीमा के प्यार को ठुकरा दिया। तुम आज भी वंही हो अकेले वीरान और तन्हा ,शहर शहर भटक रहे हो।)

तन्हाई प्यार जुदाई

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