Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
घमंडी
घमंडी
★★★★★

© Ashish Kumar Trivedi

Drama Tragedy

1 Minutes   21.2K    37


Content Ranking

श्रवण ट्रेन में अपने सामने बैठे व्यक्ति को देख कर मुस्कुराया। उसकी आदत थी कि वह अपने साथ यात्रा कर रहे व्यक्ति से दोस्ती कर लेता था। अक्सर इसकी शुरुआत मुस्कुराहट से होती थी। पर आज सामने वाले व्यक्ति ने कोई जवाब नहीं दिया। श्रवण ने एक दो इधर उधर की बातें भी शुरू कीं किंतु वह व्यक्ति अपने में ही गुम रहा। श्रवण ने मन ही मन उसे घमंडी करार दिया। वह भी मैगज़ीन पढ़ने लगा।

करीब एक घंटे बाद उस व्यक्ति का मोबाइल बजा। वह किसी से बात करने लगा।

“मैं कल सुबह तक पहुँच पाऊँगा। तब तक इंतज़ार करना…”

कहते हुए उसकी आवाज़ भर्रा गई। अपनी बात समाप्त कर उसने फोन रख दिया। श्रवण की तरफ देख कर बोला।

“आज दोपहर मेरी पत्नी दुर्घटना में मर गई। घर पर सब मेरे पहुँचने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।”

श्रवण को अपनी सोच पर बहुत शर्मिंदगी हुई। वह उसके दुख के निजी पलों में अनजाने ही घुसने का प्रयास कर रहा था।

Life Humanity Journey

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..