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इमोशनल अत्याचार
इमोशनल अत्याचार
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© Madhu Arora

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बीजी सुबह से ही गुस्से में थीं। कुछ देर बाद तो अपनी बेटी रज्जो से जोर जोर से चिल्ला कर निम्मी बहु को सुनाने के उद्देश्य से बोलीं "पता नहीं आजकल की लड़कियाँं कैसी हैं? इनसे कोई काम नहीं होता, वो देख उसे, निम्मी को, सुबह से बिस्तर से ही नहीं उठी।"

जवाब में रज्जो बोली "बीजी आप चुप करो, आपने आप उठ कर काम कर लेगी। उसे भी घर के काम की चिंता होनी चाहिए।"

"तू कहती है मैं चुप करूँ दस बज गये, मेरा नाश्ता कौन बनाएगा?"

बुखार से तपती हुई, बिस्तर पर लेटे हुए निम्मी सब सुन रही थी। किसी तरह उठ कर आंगन में आयी और दरवाज़े का सहारा लेकर बोली "बीजी मुझे कल से तेज बुखार है। कल भी जैसे तैसे काम कर दिया था। पर आज हिम्मत नहीं हो रही, चक्कर आ रहे हैं। रज्जो दीदी से कह दो, आपका नाश्ता बना दें। मैंने गोली खा ली है थोड़ी देर में बुखार उतरेगा तो उठ जाऊँंगी।"

उसकी बात से बेअसर बीजी फिर बोली "ससुराल में काम नहीं करना तो रोज़ बीमारी के बहाने बनती हैं। पता नहीं मायके में क्या करती हैं?"

"बीजी मैं कोई बहाना नहीं बना रही आप खुद मुझे छू के देख लो"

"आय हाय, देख ले रज्जो ये कितनी जबान लड़ाती है। काम बोलते ही तकलीफ हो जाती है।"

"बीजी मैं जबान कहाँ लड़ा रही हूँ?"

बीजी जो पहले से लड़ने को भरी बैठी थीं रज्जो से फिर बोली "मैंने तो इसकी बहन को देख कर इससे सतीश की शादी करवाई थी। इसकी बहिन को देखो कितनी सीधी है, जैसे मुँह में जबान ही न हो और इसे देखो आगे से कितने जवाब देती है।"

निम्मी भी रोज़ रोज़ के ताने सुन कर थक चुकी थी कहने लगी "बीजी आपके भी पाँच बेटे हैं। क्या आपके सारे बेटे एक जैसे हैं? नहीं ना... तो आपने कैसे सोच लिया कि मैं अपनी बहन की तरह सब कुछ सहती रहूंगी?"

ये सुनते ही बीजी का पारा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। कहने लगीं "हाय भगवान कैसी निकली ये तो, जा.. जा.., चली जा अपने...... घर नहीं रखना हमें तेरे को। बुला ले अपने भाई को, आज फैसला कर ही देते हैं।"

अब तक निम्मी भी पिछले छ: महीने से उनकी ज्यादतियाँ सह रही थी। अब उसकी भी सहन शक्ति जवाब दे चुकी थी, कहने लगी "हाँ बीजी, आज फैसला हो ही जाना चाहिए।"

एक लंबी साँस लेकर वहीं बैठ गई और फिर बोली, "ठीक है बीजी एक काम करो। पहले आप जितने भी लोग बारात में आये थे, उन्हें मिला कर सब रिश्तेदारों को बुला लो। बारात आ जाने दो फिर मेरे रिश्तेदार भी आ जायेंगे। आज फैसला कर ही देते हैं।"

बीजी बोली "क्यों आएंगे सारे? उनका क्या काम?"

"जैसे आप बारात लाये थे वैसे ही। जैसे सबके सामने आई थी, वैसे ही चली जाऊँगी।"

अब बीजी अपना सा मुंह ले कर चुप हो गयी और रज्जो चुपचाप रसोई में नाश्ता बनाने चली गयी...

बीजी बहन रिश्तेदार

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