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अभिशाप
अभिशाप
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© Anita Jain

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“कब तक अपनी ममता से लडेगी, लाडो!! एक बार उसे अपना के तो देख, तू भी इस सुख को न महसूस करे तो कहना”|

 "एक बार देख तो, कैसे टुकर -टुकर देख रही है ये मासूम इन दोनों को |"

रधिया ने पास बैठी बेटी को धीरज बँधाते हुए कहा |

दौड़ कर मुनिया को सीने से  लगाते हुए वो बोली-

"हाँ माँ,ममता तो ज़ोर मारती है पर जब भी इसे देखती हूँ  वो मनहूस घडी याद आ जाती है जब ससुराल वालों ने और पति ने बेटी को अभिशाप बता बोझ उठाने से मना कर धक्के देकर घर से निकाल दिया था |"

"क्या उनके सीने में ममता नही थी या वे  सिर्फ पत्थर हैं  जो आज भी बेटी को अभिशाप  कहते हैं”

beti abhishaap

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