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गुरु गुड रहा चेला शक्कर हो गया
गुरु गुड रहा चेला शक्कर हो गया
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© Yogesh Suhagwati Goyal

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राजस्थान राज्य के भरतपुर जिले में एक गाँव है जघीना | मेरी ये कहानी इसी गाँव से जुडी है | जघीना गाँव में एक गुरूजी और उनका चेला भोला रहते थे | उनका अपना एक छोटा सा आश्रम था | आश्रम में सुबह शाम प्रतिदिन भजन कीर्तन होता था | गाँव के बहुत से लोग आश्रम में आया करते थे | लोगों के दान, दक्षिणा और इतना चढ़ावा आ जाता था, आश्रम में रहने वाले और आगंतुक दर्शनार्थीयों का जीवन नियमित रूप से चल रहा था |

भोला के लिये गुरूजी उसके भगवान थे और उनकी हर आज्ञा पत्थर की लकीर थी | वह एक आज्ञाकारी और मेहनती शिष्य था | गुरूजी के प्रति उसका पूर्ण समर्पण था | वह अपने गुरूजी की हर जरूरत का पूरा ध्यान रखता था | आश्रम के हर काम पर उसकी पूरी पकड़ थी | उसकी दिनचर्या में सर्वप्रथम गुरूजी होते थे जैसे गुरूजी के खाने के बाद भोजन, उनके जागने से पहले जागना और उनके सोने के बाद सोना आदि |

गाँव में एक दिन एक जवान लड़के की मौत हो गयी | लड़के के परिवार में हाहाकार मच गया | पूरे गाँव में खबर और शोक की लहर फ़ैल गई | सभी जवान मौत पर अपनी संवेदना व्यक्त कर रहे थे | जब भोला को ये खबर मिली, वो तुरंत ही शोकाकुल परिवार के घर पहुंचा | सबसे पहले उसने लड़के के माता पिता को शांत कराया और फिर बोला, आप लोग चिंता ना करें | मेरे गुरूजी भगवान हैं | वो आपके लड़के को जरूर जिंदा कर देंगे | मेरे साथ, आप लोग इसको अभी आश्रम लेकर चलेंभोला के साथ माँ बाप और दूसरे लोगों ने मदद की और लड़के को आश्रम लेकर आये | सर्वप्रथम भोला ने अपने गुरूजी को प्रणाम किया, पूरी बात बताई और फिर उनके चरणों की रज लेकर लड़के के माथे पर लगाईं | रज लगाते ही चमत्कार हो गया | कुछ सैकिंड बाद लड़का उठकर बैठ गया | सभी लोग आश्चर्यचकित थे और साथ ही गुरूजी भी | ये तो अनहोनी हो गयी थी | सबने गुरूजी को ढोक लगाईं, अपना आभार प्रदर्शित किया और ख़ुशी ख़ुशी अपने घर लौट गए |

इस घटना के बाद, जघीना और उसके आस पास के गावों में गुरूजी की ख्याति फ़ैल गई | दूर दूर से लोग उनके आश्रम आने लगे | चढ़ावा भी अब बहुत ज्यादा आने लगा | भोला अपनी दिनचर्या में पहले की तरह ही व्यस्त रहा, जैसे कुछ भी अप्रत्याशित ना घटा हो | लेकिन गुरूजी इसको पचा नहीं पाये | वो सोचने लगे कि वो तो अब सच में ही भगवान बन गए हैं | उनको अपने ऊपर घमंड हो गया | करीब छ महीने बाद गाँव में फिर एक घटना हुई | गाँव में एक विधवा धोबन रहती थी | उसके एक दस साल का लड़का था जो उसके काम में उसकी मदद करता था | एक दिन वो लड़का मर गया | धोबन का तो मानो संसार ही लुट गया | उसका बुरा हाल देखकर, उसके पडौसी ने कहा, इसको गुरूजी के पास लेकर चलो, वो जरूर तेरी मदद करेंगे |

सबकी मदद से धोबन अपने पुत्र को लेकर गुरूजी के पास पहुंची | हाथ जोड़कर उसने अपनी व्यथा गुरूजी को बताई | गुरूजी बोले, तुम व्यर्थ ही चिंता कर रही हो, मैं इसको अभी जिंदा किये देता हूँ | उन्होंने अपने चरणों की रज उठाई और लड़के के माथे पर लगा दी | लेकिन ये क्या, कुछ भी नहीं हुआ, लड़का जमीन पर यूं ही मरा पड़ा रहा | गुरूजी को भी कुछ समझ नहीं आया | उन्होंने दोबारा वही प्रक्रिया दोहराई | लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ | अब तो सब लोग एक दूसरे का मुंह देखने लगे | कुछ लोग तो गुरूजी को ढोंगी और ना जाने क्या क्या कहने लगे | बड़ी असमंजस की स्थिति थी |

थोड़ी देर में भोला वहां आ गया | वहां उपस्थित लोगों ने भोला को भी बहुत कुछ सुनाया | लेकिन भोला उन सब बातों से विचलित नहीं हुआ | उसने कहा, सबसे पहले आप लोग शांत हो जाओ | मैं आपसे फिर कहता हूँ, मेरे गुरूजी भगवान हैं, वो कुछ भी कर सकते हैं | अपने आचरण अनुसार सर्वप्रथम उसने गुरूजी के चरणों में शीश नवाया | फिर उनके चरणों से रज लेकर, मृत लड़के के माथे पर लगा दी | चन्द सैकिंड़ो के बाद लड़का उठकर बैठ गया ये सब देखकर गुरूजी सब समझ गए | वो अपनी जगह से उठे और भोला के पैरों में गिर गए | गुरूजी भोला से बोले, गुरु मैं नहीं हूँ, असली गुरु तू है | तेरी आस्था, तेरी भक्ति, तेरा विश्वास कमाल है | मैं तुझको प्रणाम करता हूँ |

भोला बोला, गुरूजी आप ये क्या कर रहे हो | आपके बिना मैं कुछ भी नहीं हूँ | मैं तो सिर्फ अपना शिष्य धर्म निभा रहा हूँ | वहां उपस्थित सभी लोगों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई |सभी ने गुरूजी और भोला को प्रणाम किया, अपने किये की माफ़ी मांगी और अपने अपने घर लौट गये | दूर कहीं से एक आवाज़ आई, गुरु गुड का गुड रहा, चेला शक्कर हो गया |

कहानी गुरु चेला भक्ति चमत्कार धोबन मृत्यु रज

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