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असली गहना
असली गहना
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© शिखा श्रीवास्तव

Drama Inspirational

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अंदर कमरे से रीना के चीखने की आवाज़ें आ रही थी। इन दर्द भरी चीखों से उसकी माँ अनिता का दिल बैठा जा रहा था।

आँसुओं में डूबी अनिता को बरसों पुरानी बातें याद आने लगी जब वो महज अठारह साल की थी। उसके बहुत सारे सपने थे, ख्वाहिशें थी इतनी बड़ी दुनिया में अपनी एक छोटी सी जगह बनाने की। लेकिन एक दिन अचानक उसके पिता ने घर में बताया कि उन्होंने अनिता का रिश्ता तय कर दिया है।

उसके दबंग पिता के आगे किसी की एक ना चली और अनिता ससुराल आ गयी।

ससुराल में भी उसके सपनों के लिए कोई जगह नहीं थी। अपनी ख्वाहिशों की गठरी बांधकर उसने आँसुओं के समुन्दर में डूबा दिया और खुद को घर-गृहस्थी में रमा लिया।

कुछ सालों बाद वो एक प्यारी सी बिटिया रीना की माँ बनी। अभी उसने मातृत्व सुख को पूरी तरह जिया भी नहीं था कि उसे पता चला वो दोबारा कभी माँ नहीं बन सकती। बेटा ना होने का दोष उसके माथे पर मढ़ते हुए उसे मनहूस की संज्ञा दे दी गयी।

अनिता के पति राजेश की बेरुखी भी उसके और बिटिया के प्रति दिनों-दिन बढ़ती गयी।

लेकिन अनिता ने अपनी बिटिया को प्यार-दुलार और अच्छी परवरिश देने में कोई कमी नहीं छोड़ी। इसके लिए कितनी ही बार उसे परिवार से, पति से लड़ना पड़ा, प्रताड़नाओं का सामना करना पड़ा लेकिन अनिता सब सहती गयी।

आज उसकी बेटी रीना ने अपना स्नातक पूरा कर लिया था और आगे प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करना चाहती थी। इस बात की खबर जब राजेश को हुई उसके गुस्से का पारावार ना रहा। उसने रीना को कमरे में बंद कर आदेश सुना दिया की कोई भी उसे कमरे से बाहर ना निकाले। कल उसे देखने लड़के वाले आएंगे। ये कहकर वो बाहर चला गया।

रीना की चीखों ने अंततः अनिता के सब्र का बांध तोड़ दिया।

उसने कमरे का दरवाजा खोलकर अपनी बेटी को बाहर निकाला और उसके आँसू पोंछते हुए बोली- जाओ जाकर प्रतियोगिता की तैयारी के लिए किताबें ले आओ और कोचिंग संस्थान का भी पता लेती आना।

जब घर पहुँचने पर राजेश को अनिता के इस कदम की जानकारी हुई वो गुस्से से बिफर पड़ा।

अनिता ने बिना डरे कहा- अगर आपने मेरी बेटी की जबरदस्ती शादी करने की कोशिश भी की तो मैं आपके खिलाफ पुलिस थाने में उत्पीड़न का केस दर्ज करवाऊंगी, लेकिन मेरी तरह मेरी बेटी के सपनों को मरने नहीं दूँगी।

अनिता की आँखों में दृढ़ता देखते हुए एक पल के लिए राजेश सकपका गया।

लेकिन अगले ही पल खुद को संभालते हुए उसने कहा- जा कर ले अपनी बेटी के सपने पूरे, लेकिन अपने दम पर करना। मुझसे एक रुपये की मदद की भी उम्मीद मत रखना।

राजेश सोच रहा था ये सुनते ही अनिता टूट जाएगी क्योंकि उसके जैसी घरेलू औरत भला पैसे कहाँ से लाएगी।

अनिता बिना कुछ कहे कमरे में चली गयी और रीना के आने का इंतज़ार करने लगी।

उसके आते ही परीक्षा की तैयारियों में लगने वाले खर्च का हिसाब करते हुए अनिता ने पाई-पाई करके जोड़ी हुई कुछ रकम और अपने सारे जेवर रीना के हाथ पर रख दिये।

रीना रोते हुए उन्हें लेने से मना करने लगी तो अनिता ने कहा- अलमारी के एक कोने में पड़े हुए ये जेवर मेरे किस काम के बिटिया। मेरा असली गहना, मेरी खुशी तुम हो, तुम्हारे सपने है।

वक्त पंख लगाकर कब उड़ गया पता ही नहीं चला।

आज परीक्षा के परिणाम का दिन था और रीना का चयन अधिकारी पद पर हो गया था।

अनिता की आँखों में आज पहली बार खुशी के आँसू थे।

अपनी माँ के गले लगकर उसके आँसू पोंछते हुए रीना आज सचमुच अनिता के गले में सजा नौलखा हार प्रतीत हो रही थी।

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