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चौकीदार चौबे चाचा
चौकीदार चौबे चाचा
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© Sanjay Nayka

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जोरों से बारीश हो रही थी और बिजली भी गुल थी | हम सब एक दोस्त विजय के घर कैरम बोर्ड का खेल खेलके टाईम पास कर रहे थे | इतने कैरम के गेम खेलने के बाद कैरम भी थक गया था और हम भी। बारीश इतनी तेज थी की बाहर जाना मुमकीन नहीं था | सामने से हमारे सोसायटी के चौकीदार भानु चौबे को धोती उठाके और काला छाते थामे आते देखा | हम सब उन्हे चौबे चाचा कहेते थे | उनके आते ही मानो हमारे बुझे बुझाये से चहेरे पे चमक आ गई |क्यों ना आती ? क्योंकि चौबे चाचा जहाँ भी जाते वहां हंसी खुशी साथ हो लेती थी | चाचा के चुटकुले

और हंसी मजाक वाले किस्सो से सारी सोसायटी वाले वाकिफ थे | चाचा जब भी अपनी दिमाग की अलमारी में से किस्सा बाहर निकालते तो सब की हंसी छूट जाती |

आईए चौबे चाचा मैने चाचा का वेलकम किया |चौबे चाचा ने अपना काला छाता बंद किया और धोती को ऊँचा करके एक टेबल में बैठ गये |

विजय : चाचा आज सोए नहीं ? कल नाईट कि होगी ना ?

चाचा : हाँ  पर बिजली के बिना कहाँ निंद आयेगी भला ? बिजली तो मानो ओक्सीजन हो गई ,टी.वी पर फाईटींग वाली फिल्म और खटर -खटर आवाज कर रहे पंखे बिना निंद कहाँ आती है , मानो टी.वी और पंखा तो निंद की दवाई बन गयें हो। 

विजय : सही है चाचा तभी तो यहा कैरम खेलके टाईम पास कर रहे है | पर अब तो खेलते- खेलते भी बोर हो गये हैं |

चाचा : हां वो भी है , आखिरकार हम सब आदमी है कोई कम्पुटर मशिन थोड़े है जो एक बटन दबाओ तो बस चलती जाये...चलती जाये ! कम्पुटर मानो आदमी से भी आगे निकल गया |

विजय : वो बात भी सही है | पर आप इतनी बारीश मे कहाँ  जा रहे हो ?

चाचा : अरे पान लेने निकला था मगर लगाता नहीं मिश्राजी ने अपनी दुकान खोली होगी | हमको पान खाये बिना खाना हज़म नहीं होता है | मानो पान तो हजामे की गोली हो गई हो !

विजय : अरे चाचा पान का जुगाड़ हो जायेगा पर इसके बदले आपको मज़ेदार  किस्सा सूनाना पड़ेगा  |

चाचा : हैं  ? पान का जुगाड़  ? पर बेटा ऐसा - वैसा पान खाते नहीं  हम |

विजय : अरे पता है चाचा ! बनाससी पान, डबल ज़ीरो तमाकु, किमान और कच्चा टुकड़ा  ! वही ना ?

चाचा : एकदम सही ! पर तुमको कैसे पता ? 

विजय : मुझे नहीं मेरे पापा को पता है ! पापा ने दो पान मंगा रखे थे | एक पापा को दे दिया है एक बचा है |

चाचा : बढ़िया ! बहुत बढ़िया ! ला ओ तो फिर |

(विजय ने चाचा को पान दिया)

बोलो अब कौन सा किस्सा सुनना चाहते हो ? - चाचा ने मुँह मे पान रखकर कहा |

विजय : चाचा आप तो चौकीदार हो तो उससे जुड़ा कोई किस्सा सुना दो, मतलब के अभी तक चौकीदार ही की, कभी चोर-उचक्को के साथ पाला पड़ा  है ?

चाचा : अब बात चोर उचक्को की बात छेड़ ही दी है तो सुनो !चाचा ने बहते पानी मे पान की पिचकारी मारी सब अपनी जिज्ञासा को रोक कर सुनने लगे |

चाचा : किस्सा क्या ? वो तो हमारे जीवन का हिस्सा है। चाचा ने अपने कोने मे पड़ी पोटली टटोली तो एक किस्सा फुदक के आ गया |

चाचा ने अपना किस्सा बयान करते हुए कहा की -

बात उन दिनो की है ,तब मैं दिल्ली मे था वहां मैं एक बंगले की चौकीदारी करता था | दिसंबर महीने की कातिल सर्दी थी | लोग ठंड के मारे घर से बहार भी नहीं निकल रहे थे | मेरे मालिक और उसकेघरवाले 5 दिनों के लिए शाद मे गये थे | घर पुरी तरह से खाली था |करीब रात के 2 बजे थे मानो शहर सोया था | मैं बस गेट के बहार जली हुई आग के सहारे बैठा पहरा दे रहा था |अचानक बंगले के पीछे से कुछ गीरने की आवाज आई , जैसे कोई कांच गिरा हो , मेरा  घ्यान उस तरफ गया और डंडा लेकर अवाज की तरफ बढ़ा | मैं घीरे- घीरे कदम बढ़ाते हुए बंगले की पिछे की तरफ बढ़ा तो क्या देखता हूँ की दो अन्जान शख्स दिवार फांद के बंगले मे घुसने की कोशिश कर रहे थे |मैने जोर से आवाज लगाई – ‘कौन है वहाँ  ?’तब दोनों पे गई और वो भागने लगे |मै भी दोनों की तरफ चोर चोर बोल के भागने लगा |चोर थोड़ी दूर जाके रुक गये |मै भी रुक गया |(चोरों की आवाज) चोर : कल्लु !

कल्लु : बोल बिल्ला ?

बिल्ला : हम क्यों भाग रहे हैं  ?

कल्लु : क्यों की हम चोर हैं  ?

बिल्ला : किसने बोला ?

कल्लु : उस चौकीदार ने 

बिल्ला : अबे लल्लु 

कल्लु : लल्लु नहीं कल्लु 

बिल्ला : साले 

कल्लु : मेरी बहन नहीं और तु मुझे साला बुला रहा है ?

बिल्ला : अबे!वो एक है और हम दो फिर भी भाग रहे है 

कल्लु : हाँ ये तो सही है ! उसको  बोलके आता हूँ की दुसरे चौकीदार  को बुला लो और फिर दौड़ो बिल्ला : अबे लल्लु !

कल्लु : कल्लु !

बिल्ला : तुम कैसे चोर बन गये ? तुम तो एकदम घोचु हो ! अरे वो एक है और हम दो है ना ? और उसके पास लाठी के अलावा कोई हथीयार नहीं है और हमारे पास तो दो रामपुरी चाकु है |

कल्लु : दो नहीं एक ! मेरा रामपुरी तो आई ने आलु काटने के लिए ले लिया था |

बिल्ला : क्या ? तो फिर क्या ले के आये हो ?

कल्लु :आई ने रामपुरी के बदले ये चमचा दे दिया है 

बिल्ला : है भगवान ! चमचा ले के चोरी करने निकला है ?

कल्लु : हाँ  ये देख (चमचा दिखाते हुए)

बिल्ला :अबे रख अंदर ! तेरे साथ मेरी इमेज भी खराब हो जायेगी |

कल्लु : अरे रहने देना , अंधेरे मे क्या फर्क पड़ता है ? चक्कु हो या चमचा। 

बिल्ला : तेरी मरजी , अब सुन हम भागने के जगह पर उस बुड्ढे चौकीदार को धर ले तो ? देखो जरा सा भागा तो हांफते -हांफते रुक गया |

कल्लु : हाँ  सही है ! उसको दबोच लेगे तो आराम से बंगले पे हाथ साफ कर सकते है |

बिल्ला : पहली बार अकलमंदी की बात की है |

कल्लु : पर बंगले मे कोई हुआ तो ?

बिल्ला : मैने निगाह रखी  है , ये बंगले वाले शादी मे गये है पांच दिन खाली है बंगला |चौबे चाचा सोच रहे हैं  की वो दोनो क्यों रुक गये ? वो भी डर रहे थे की चोरों के पास भारी हथियार हुये तो ?बिल्ला रामपुरी और कल्लु चमचा ले कर पिछे घुमते है और चौबे चाचा की तरफ देखते है |चाचा चोर के हाथ मे रामपुरी देखकर डर जाता है और थोड़ा सा पिछे जाता है |कल्लु के हाथ मे चमचा देखकर सोच मे पड़ जाता है की कितने गरीब चोर हैं। चमचा लेकर चोरी करने आये है , बिल्ला और कल्लु चाचा की तरफ आगे बढ़ते है और चाचा उतना ही पिछे हटता है | दोनो चाचा की तरफ भागते है | चाचा अपनी जान बचा भागता है |चाचा भागता-भागता बंगले के चक्कर मारता है और उसके पिछे दोनो चोर भी चक्कर मारते है पता नहीं चलता है की कौन चौकीदार है और कौन चोर , जब चोर थक के रुक जाते है तो चाचा भी थाकान मिटा लेता है | इस तरह तीनो बंगले के चक्कर मारते है |दो चोर एक जगह पर रुक जाते है बिल्ला : अबे रुक उल्लु !

कल्लु : कल्लु !

बिल्ला : हाँ वही ! हम क्यों चक्कर मार रहे है ?

कल्लु :  क्योंकि चौकीदार भाग रहा है |

बिल्ला : हाँ वो तो सही है पर दोनो एक साथ चक्कर मारने के बदले हम अलग - अलग  चक्कर मारे तो ?

कल्लु : हैं ?? (बाल खुजाते हुए)

बिल्ला : पता था तेरे खाली दिमाग मे ये बात आएगी नहीं , सून तुं दायें से जा और मै बायें जाता हूँ तो चौकीदार को पकड़ सकते है, नहीं तो ऐसे ही सुबह हो जायेगी ! समझे ?कल्लु बस मुंडी हिला देता है | बिल्ला रामपुरी को हांथ मे लेकर और कल्लु चमचा लेकर दोनों अलग-अलग दिशा मे आगे बढ़ते है |कल्लु आगे बढ़ता है वहीं सामने चाचा दिख जाते है |कल्लु : रुक बुढ्ढे ! पहले ओलम्पिक की रेस मे दौड़ता था क्या ? भगा-भगा कर पैर सुजा दिये |अब तु नहीं बचेगा |कल्लु चमचे को लेकर आगे बढ़ता है |चाचा :ये चोर है की उल्लु  ? चमचा लेकर मुझे  मारने आ रहा है ! रुक आने दे उसे कैसे लाठी से उसकी पीटाई करता हूँ |(मन मे ही सोचते हुए)कल्लु चाचा के सामने जैसे ही जाता है वैसे ही चाचा लाठी से कल्लु के उस हांथ मे वार करता है जिस हाँथ मे चमचा है | कल्लु के हांथ से चमचा छुट जाता है और चाचा कल्लु को लाठी से खूब मार मारता है | कल्लु : बिल्ला बिल्ला करके चमचे के साथ भागता बिल्ला के पास पहुँचता है |

कल्लु : बिल्ला ? बिल्ला ?

बिल्ला : क्या हुआ ? किसने की तुम्हारी ये हालत ?

कल्लु : उस चाचा ने 

बिल्ला : क्या ? और तु मार खाकर आ गया ?

कल्लु : तो क्या मै चमचे से करता लाठी का सामना ?

बिल्ला : किसने बोला था चमचा लाने को ? कहाँ मिला बुढ्ढा तुम्हे ?

कल्लु : ये इस तरफ (इशारे करते हुए)

बिल्ला : ठिक है | तुम यही रुको मे बुढ्ढे की खबर लेके आता हुं |

कल्लु : ठिक है |

बिल्ला रामपुरी चाकु को हाथ मे लेकर उस तरफ बढ़ता है | बिल्ला यहाँ वहां नजर घुमाकर चाचा को

ढूंढता है पर चाचा नहीं दिखता है | दुसरी तरफ कल्लु अकेला बिल्ला की राह देख रहा है |

कल्लु : बिल्ला आया नहीं अभी तक ? चौकीदार ने बिल्ला को मारा तो नहीं ?वो पिछे घुमता है तो वहां चाचा लाठी लेके मारने के लिये तैयार खड़े दिखते है |

कल्लु : अरे मर गये ? बुढ्ढा फिर आ गया ? चाचाजी मुझे जाने दिजिए ! मेरी मत मारी गई थी जो यहाँ चोरी करने आया , वो तो बिल्ला मुझे ले आया  | मारना है तो बिल्ला को मारो ना , वो इस तरफ हि गया है आपको मारने के लिए। 

चाचा : उसकी खबर तो बाद मे लूंगा , पहले तेरी खबर तो ले लूँ  |

कल्लु : इतनी भी खबर न लो की खबर देने के काबिल ना रहूं  | (गिड़गिड़ाते हुए)चाचा ने उसकी बातों  को ध्यान मे ना रखकर फिर से कल्लु की दे दना- दन धुलाई कर दी  |

कल्लु ;बिल्ला,बिल्ला के नाम की गुहार लगाता रहता है |

बिल्ला : कल्लु क्या हुआ (दूर से आवाज आती है)चाचा बिल्ला की आवाज सुन कर कल्लु को मारना रोक देता है और आगे भाग जाता है बिल्ला आता है |

बिल्ला : क्या हुआ कल्लु ?

कल्लु : तुम मुझे मार खाने के लिए इघर छोड़ गये थे ? वो चौकीदार फिर मार के चला गया |

बिल्ला : ओह ये बात है ! किस तरफ गया बुढ्ढा ?

कल्लु : इस तरफ (इशारा करता है)

बिल्ला : अच्छा ! तुम यही रुको मै आता हुं.|

कल्लु : नहीं नहीं तुम कहीं मत जाओ ! वो फिर आयेगा और मार के चला जायेगा | मुझे चोरी करने के लिए लाये हो या फिर मार खिलाने ?

बिल्लु : अरे यार ! वो बुढ्ढा मेरे सामने नहीं आयेगा क्योंकि  मेरे हाथ मे चाकु है | तु बस यहाँ रुको वो तुझे मारने फिर आयेगा तब मे उसे पकड़ लूंगा  |

कल्लु : मतलब मुझे  बकरा समझ रखा है जिसे शेर का शिकार करने के लिए पेड़ से बांधा जाता है !

बिल्ला : हा बस ऐसा हि समझ लो ! तुम यही रुको मे आजु- बाजु हि छूपा रहूँगा  |

कल्लु : नहीं नहीं मुझे छोड़के मत जाओ |

बिल्ला : रुक ! नहीं तो मैं तुझे मारूंगा  |

कल्लु कुछ नहीं बोलता है और बिल्ला आगे चल के एक जगह छुप जाता है ,अब कल्लु अकेला है | इघर - उघर नजर घुमाके चाचा को देख रहा है और चाचा फिर से आ घमकते है |

कल्लु : अरे बाप रे ! तु आदमी है या जिन? कहीं से भी  आ घमकता है ?चाचा बिना कुछ कहे कल्लु की पिटाई करने लगता है |

कल्लु : कोइ मुझे बचाओ ! बिल्ला मुझे बचाओ !बिल्ला आ जाता है और चाचा को पिछे से पकड़ लेता है |

कल्लु : वाह बिल्ला ! वाह ! अच्छा हुआ ये खरगोश  को पकड़  लिया ! कब से फुदक- फुदक से मार रहा था |

बिल्ला : क्यु बे बुढ्ढे ? बहुत उछल रहा है ? अब उछल के बता ?

कल्लु : बिल्ला पकड़ के  रखना उसकी लाठी छीन लेता हुं |

बिल्ला : हाँ  सही है |कल्लु चाचा के हाथ से लाठी छीन लेता है |

बिल्ला : कल्लु अब उसकी लाठी से इसी को मार !

कल्लु : नहीं यार ! बाप की उमर का है |

बिल्ला : यार तुं एकशन सिन को इमोशनल बना देता है | चल ठिक है | पर हम चोर है चोरी तो करेगे ही |कल्लु उसकी तलाशी ले पहले इसीको लूटते है |कल्लु चाचा की तलाश लेता है | जेब से छुट्टे पैसे निकालता है |

कल्लु : ये क्या ? चिल्लर का क्या करेगे ?

बिल्ला : अरे ले ले ! बीड़ी का खर्चा निकल जायेगा | दुसरी जेब देख ,कल्लु दुसरी जेब से मोबाईल निकलता  है |

कल्लु : ये मोबाईल काम का निकला |

चाचा : अरे मोबाईल बंद है | मोबाईल मे बैटरी भी नहीं है |

बिल्ला : हम डलवा लेंगे | तु दुसरी जेब देख ,कल्लु जेब से पान निकलता है |

कल्लु : मुँह मे दांत नहीं है और पान चबाता है बुढ्ढा ! वो भी बनारसी पान ?

चाचा : अरे भाई उसको रहेने दो ? उसको खाये बिना हमको खाना हज़म नहीं होता !

बिल्ला : तुम खाना हज़म करने आते हो की चौकीदारी करने ? कल्लु तु पान खा ले और बुढ्ढे बंगले की चाबी निकाल ,

चाचा : अरे बंगले की चाबी मेरे पास कहाँ रहती है ,वो तो मालिक के पास होती है |

बिल्ला : बुढ्ढे ज्यादा सानपत्ती मत कर , मै तिजोरी की चाबी नहीं मांग रहा ? बंगले के दरवाजे की चाबी मांग रहा हूँ |

चाचा : नहीं ! वो चाबी भी नहीं , बस मेरे पास तो बंगले के बाहर वाले दरवाजे की चाबी है |

बिल्ला : तु ऐसे नहीं मानेगा , उंगली टेढ़ी करनी ही पड़ेगी  | कल्लु बुढ्ढे के कपड़े निकाल ...कहीं  तो छूपा रखी होगी ना !

कल्लु : अरे बाप की उमर का है !

बिल्ला : भाड़ मे गया तेरा बाप , तु निकलता है की निकालु रामपुरी। 

कल्लु : नहीं नहीं निकालता हूँ |कल्लु जैसे हि कपड़े निकालने की कोशिश करता है तो उसे एक चाबी मिलती है |

बिल्ला : अब ये क्या बुढ्ढे ? निकली ना चाबी ?

चाचा : यही चाबी की बात कर रहा था | ये तो बंगले के बहार के गेट की चाबी है जहाँ मैं  बैठता हुं |

बिल्ला : कल्लु ! ये चाबी से बहार वाला गेट खोल , फिर अंदर जाके अंदर का दरवाजे का जुगाड़ हो जायेगा |कल्लु बहार का गेट खोलता है | बिल्ला चाकु कि नोक पर चाचा को बंदी बनाता तिनों  गेट से अंदर जाते है|कल्लु गेट बंद करता है |

बिल्ला : अब ये मैन गेट की चाबी मिल जाये तो तिजोरी दूर नहीं | ये बुड्ढा मुंह  खोलता नहीं !देख बुढ्ढे तेरी उमर का लिहाज करता हुं वरना मुझ से बुरा कोई नहीं होगा |

चाचा : मैने बोला ना मेरे पास चाबी नहीं है |

बिल्ला : बस ! मैने जितना सुनना समझना था वो कर लिया ! अब देख मे क्या करता हूँ  ! कल्लु बुढ्ढे की धोती निकाल ! जब तक चाबी नहीं देगे तब तक एक एक करके कपड़े निकालते रहेगे |

कल्लु : पर ....??

बिल्ला : पर-बर कुछ नहीं | तु खोल नहीं तो मै तेरे को खोल देगा !कल्लु धोती निकालने के लिए आगे बढ़ता है | वो धोती पकड़ता है खींचता है पर चाचा धोती पकड़ लेता है |

बिल्ला : तेरा रेप नहीं कर रहे है ! छोड़ धोती ...छोड़ धोती ..कल्लु धोती निकलने को जोर जबरदस्ती पे उतर आता है और आखिर कार चाचा घुटने टेक देता है |

चाचा : उस...उस..कमरे मे !कल्लु रुक जाता है |

बिल्ला : उस कमरे मे कहाँ ?

चाचा : कमरे मे एक पुरानी अलमारी है उसमे पहले ड्रोवर मे !

बिल्ला : अब आया बुढ्ढा लाईन पे ! कल्लु चल जा फटाफट उस कमरे मे से चाबी लेकर आ |  मैं यहाँ  बुढ्ढे को देखता हूँ |कल्लु धोती को छोड़कर कमरे की तरफ जाता है | धीरे-धीरे दरवाजा खोलके चला जाता है |चाचा कल्लु को आंखे फाड़कर देखता रहेता है और मुंह से निकल जाता है भगवान बचाये

बिल्ला : क्या ?

चाचा : भगवान मुझे बचाए ! (बात को बदलकर)

थोड़ी देर के बाद उस कमरे से जोरदार कुत्ते के भौकने की आवाज आती है | बिल्ला हैरान  हो कर कमरे के तरफ देखता है |

बिल्ला : अंदर क्या है बुढ्ढे ?

चाचा जवाब दे इससे पहले ही फिर से आवाज आती है | फिर कुत्ते की आवाज बढ़ती जाती  है |बिल्ला आंखे फाड़ कर कमरे की तरफ नजर करता है तो कमरे मे से फटी हुई हालत मे कल्लु को आताहुए देखता है |कल्लु की हालत कुत्ते ने खराब कर दी है | कपड़े आधे अधुरे फाड़ दिये है |

कल्लु : बिल्ला बिल्ला मुझे  बचाओ !  इस कुत्ते से बचाओ !

बिल्ला : साले बुढ्ढे ने हमसे गेम खेला  !

बिल्ला रामपुरी दिखाकर कुत्ते की तरफ बढ़ता  है | बिल्ला जैसे हि आगे बढ़ता है वैसे ही कुत्ता शेर की तरह छ्लांग मारके उसपे झपट पड़ता है |कुत्ते से बचते हुए दोनो वहां से भागते हुए कहीं छुपने की कोशिश करते है पर कुत्ता वहां भी पहुँच जाता है |अब चाचा को भी जोश आ जाता है और दोनो की तरफ लाठी लेकर मारने लगता है |कल्लु और बिल्ला जैसे तैसे कुत्ते से और चाचा से अपनी जान बचा कर बंदर की तरफ उछलते हाँफते भाग जाते है |

चाचा : साले बड़े आये मेरी धोती निकालने वाले !चौबे चाचा अपना किस्सा खत्म करते है | सब हंसने लगते है |

विजय : वाह चाचाजी ! मान गये आपकी बहादुरी को ,

चाचाजी : बहादुरी कहाँ  ? ये तो हमारी ड्युटी है |

विजय : हाँ  ये तो सही पर आपकी जगह और कोई होता तो घुटने टेक दिया होता ! पर आपने बहादुरी और समझदारी दोनो दिखाई |

चाचा : घन्यवाद

विजय : चाचाजी आपने इतनी बड़ी चोरी होने से बचाई तो मालिक ने कोई तो ईनाम दिया हि होगा ना !

चाचाजी : हा, वो तो दे रहे थे पर मैने लिया नहीं |

विजय : ओह आपका कितना बड़ा  दिल है |

चाचाजी : आखिरकार मालिक के बड़े  जोर देने के बाद मैने एक चिज की डिमान्ड की |

हम सब : क्या ????

चाचा : बनारसी पान वो भी डबल ज़ीरो तमाकु, किमान और कच्चा टुकड़ा  ...यार हमको पान खाये बिना

खाना हज़म नहीं होता ! सही है ना ?

(सब हंसने लगते है )

बारीश चौकीदार किस्सा बहादुरी चोर

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