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माँ के साथ
माँ के साथ
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© Saumya Jyotsna

Inspirational

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मोहित के हाथों में चाय का कप पकड़ाते हुए मीता ने कहा,”मोहित, मांजी को वरुण (मोहित का छोटा भाई) के यहां छोड़ आओ”। मैं दिन भर काम करते-करते थक जाती हूँ। मुझे खुद के लिए वक़्त ही नहीं मिलता”। मोहित ने पूछा,”क्या हुआ माँ तो ठीक हैं न। मीता ने कहा,”हाँ ठीक हैं, पर क्या सिर्फ हम ही उनकी देखभाल करें"। ”अच्छा ठीक है मैं बात कर लूँगा” इतना कहकर मोहित ऑफ़िस के लिए निकल गया।

रास्ते में उसने वरुण को फ़ोन लगाया। हैलो, वरुण कैसे हो? (उधर से आवाज़ आई)”हां भईया, मैं ठीक हूँ। अभी ट्रिप पर आया हूँ, अनन्या के साथ। मैं आपसे बाद में बात करता हूँ”। इतना कहकर वरुण ने फ़ोन काट दिया।

शाम को जब मोहित घर लौटा तो, मीता ने पूछा,”वरुण से बात हुई। क्या कहा उसने? ”नहीं वो अभी ट्रिप पर है, तो माँ उसके साथ कैसे रहेंगी। तुम कुछ काम मुझे दे दिया करना। मैं कर दूँगा” मोहित ने कहा”। वाह, वे लोग ट्रिप पर जाए, मस्ती करें और हम दिन भर काम करें। उफ्फ, क्या मुसीबत है”। इतना बोल कर मीता वहां से चली गई।

सुबह जब मोहित उठकर माँ के कमरे में गया तो वहां कोई नहीं था। उसने मीता से पूछा तो उसने कहा मुझे नहीं मालूम मोहित की नज़र मेज़ पर पड़ी एक चिट्ठी पर गई। उसमे लिखा था, बेटा मोहित मैंने तुम सब की बातें सुन ली थी। मेरे लिए अब किसी के भी पास वक़्त नहीं है। तुम मेरा काम कैसे करोगे, तुम तो मुझसे मिलने भी नहीं आते। शायद ज्यादा व्यस्त हो गये हो कि तुम्हारे पास अब मेरे लिए वक़्त नहीं है। एक माँ अपनी सारी ख़ुशी अपने बच्चों की एक मुस्कराहट पर क़ुर्बान कर देती है। अपना हर पल अपने बच्चे को दे देती है। मैं चाहती थी की तुम सब मेरा सहारा बनो पर तुम सब ने तो मुझे आश्रित बना डाला। मैं किसी पर भी बोझ नहीं बनना चाहती इसीलिए मैं जा रही हूँ। अपना ख्याल रखना। जी ऐसी ही होती है माँ जो खुद लाखों दर्द सह लेती है पर अपने बच्चे के लिए करोड़ो ख़ुशियाँ मांगती है। उस चिट्ठी की स्याही धुँधली थी, क्योंकि उस चिट्ठी को लिखते वक़्त माँ की आँखों में आँसू थे। जो शब्दों पर जाकर ठहर गये थे। जैसे वह चिट्ठी स्याही से नहीं आंसुओं से लिखी हो।

मोहित भागकर बाहर आया और बोला,”माँ अब नहीं आएँगी। वह हमें छोड़कर चली गई हैं”। मैं जाऊँगा उन्हें ढूँढने। इतना कहकर अपने हाथों में माँ की तस्वीर लिए मोहित अपनी माँ को ढूँढने निकल गया। आधा पहर गुज़र गया, पर माँ का कहीं कोई पता नहीं मिला। थक कर बैठा मोहित बुदबुदा रहा था।”माँ आप कहां हो। मुझे माफ़ कर दो। मैं हर दिन आपसे मिलने आऊंगा। मैं आपके बिना नहीं रह सकता”। तभी किसी ने पानी का छींटा मारा और मोहित चौक कर उठा ।”अंकल आपकी माँ मिल जाएगी। मेरी माँ भी जब मुझसे गुस्सा हो जाती है, तो यूँ ही कहीं छिप जाती है। पर मैं उन्हें ढूंढ लेता हूँ”। मोहित ने उस बच्चे से पूछा, तुम कहां रहते हो? इस पर उस बच्चे ने कहा,”रहने का तो कोई ठिकाना नहीं है, पर जहाँ भी रहता हूँ अपनी माँ के साथ ही रहता हूँ”। ये वाक्य सीधा मोहित के दिल पर लगा ”माँ के साथ रहता हूँ”। उसे समझ में आ गया की वह सदैव तो अपनी माँ के साथ ही रहते आया है और कब से माँ उसके साथ रहने लगी। जिस माँ ने चलना सिखाया,घर को घर बनाया। वह माँ आज बेघर कैसे ही सकती है। हर दर्द में उसने माँ को ही पुकारा है। उसने उस बच्चे को तस्वीर दिखाई और माँ के बारे में पूछा, उस बच्चे ने कहा,”हाँ अंकल ये अम्मा उस पास वाली गली में गई है। वहां वृधाश्रम है”। मोहित को मानो कोई खोई ख़ुशी वापस मिल गई हो। वह भागकर माँ के पास पहुंचा। माँ को सामने बैठा देखकर, वह उनकी गोद में सिर रखकर रोने लगा। ये पश्चाताप के आँसू थे। जो ख़ुशी इक राह भूले पंछी को अपना घोंसला मिलने पर होती है। वैसा ही हाल मोहित का था। माँ भी अपने बच्चे को देखकर भावुक थी, दोनों के बीच एक खामोशी थी। जिसे तोड़कर मोहित बोला,”माँ मुझे माफ़ कर दो। मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हो गई। मैं अब आपसे हर रोज़ आकर बातें करूँगा। कोई भी आपको कहीं नहीं भेजेगा”। माँ ने कहा,”नहीं बेटा मैं तुम सब पर बोझ या मुसीबत नहीं बनना चाहती”।“नहीं माँ, आप मेरे लिए न तो बोझ हो और न हीं मुसीबत। बल्कि आपने ही तो मुझे हर बोझ, हर मुसीबत से लड़ना सिखाया है। आप मेरे साथ चलेगी वरना मैं भी आपके साथ यहीं रहूँगा”। माँ तो माँ होती है, और जब बच्चे ज़िद करते हैं, तो माँ का दिल पिघल ही जाता है। एक दम कोमल हृदय होता है माँ का बिलकुल कांच के समान। जिस में आपको अपना ही अक्स दिखेगा।

उसके बाद मोहित माँ को लेकर घर वापस आ गया और बोला,”आज से माँ हमारे साथ नहीं बल्कि हम माँ के साथ रहेंगे। बच्चे माँ के साथ रहते हैं न की माँ बच्चों के साथ। अपनी माँ को वापस पाकर मोहित खुश था और अपने बेटे का साथ पाकर माँ भी, एक संपूर्ण परिवार। जिस प्रकार मां के बिना आसमां नहीं होता, उसी प्रकार मां के बिना कोई घर, घर नहीं होता।

उसके बाद मोहित माँ को लेकर घर वापस आ गया और बोला,”आज से माँ हमारे साथ नहीं बल्कि हम माँ के साथ रहेंगे। बच्चे माँ के साथ रहते हैं न की माँ बच्चों के साथ।

बेघर गुस्सा घोंसला

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