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पूतो फलो या...
पूतो फलो या...
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© Saumya Jyotsna

Inspirational

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हमारे समाज में एक नई नवेली ब्याहता को सौभाग्यशाली भव: के साथ साथ कोई आशीर्वाद मिलता है, तो वो होता है-दूधो नहाओ पूतो फलों। पूतो फलों अर्थात बेटों की माँ बनने का सौभाग्य मिले।

मेरी बड़ी ताई जी, उन्हें दो बेटे हैं। जिसे वह अपना सौभाग्य मानतीं हैं और हर नई नवेली ब्याहता को यही आशीर्वाद देती हैं-दूधो नहाओ पूतो फलो। उनके दो बेटे, उनका गर्व हैं। वे सबको बतातीं है, मेरे दो बेटे हैं और दोनों बड़े ओहदे पर अफसर हैं।

जब तक ताया जी थे, सब कुछ ठीक चल रहा था। पर उनके जाने के बाद ही शुरू हुआ संपत्ति के बंटवारे का खेल। ताई जी ने सोच विचार कर घर का उपरी हिस्सा बड़े को दे दिया और नीचे का हिस्सा छोटे को। पर ताई जी के लिए तो जगह हीं नहीं बची। सो, उनके बेटों ने सोच विचार कर यह फैसला लिया कि हर एक सप्ताह के बाद, माँ अपना घर बदल लेंगी अर्थात कभी ऊपर रहेंगी तो कभी नीचे। माँ की मंजुरी उन्होंने पूछने की जरुरत उन्हें नहीं लगी।

पहला सप्ताह शुरू हुआ,आज ताई जी को बड़े बेटे के यहाँ रहना था सप्ताह पूर्ण हो जाने के बाद वह अपने छोटे बेटे के यहाँ चली गई। बड़े बेटे के बच्चे नीचे आए और पूछा,”दादी आज आप हम लोग के साथ खाना नहीं खायेंगी”। चलिए न मम्मी ने आज कोफ्ते बनायें है। ताई जी ने सोचा, पूरे एक सप्ताह तक तो मुझे चने खाने को मिले और आज मेरे जाते हैं कोफ्ते..। ताई जी ने कहा,”बेटा आप जाओ। मैं आतीं हूँ”, इतना कहने के बाद ताई जी ऊपर आईं, तो बहू ने टपक से कहा,”क्या हुआ माँ जी, खाना नहीं मिला क्या”? इतना सुनते ही छोटी बहू ने कहा,”क्यों नहीं मिलेगा खाना? तुम्हारे जैसे थोड़े हीं न हैं जो खुद खाए मेवे और माँजी को दे सूखे चने”। अपने आँखों के सामने अपनी बहुओं को लड़ता देख, ताई जी का मन बहुत उदास हो गया। किसी तरह दूसरा हफ्ता कटा और फिर अपने बड़े बेटे के यहाँ चली गई। पर अब उन्हें अपने बेटों का रौब नहीं था। वे सोच रहीं थीं,”जिन बेटों पर मुझे इतना गर्व था, गुमान था उन्होंने आज मुझे घड़ी की सुई बना दिया है। जो नियत समय पर जगह बदलती रहती है। ये दोनों क्यों नहीं समझते कि बूढ़े पैरों में वह बात कहाँ, जो पहले थी। जब मैं इन्हें हाथों में खाने का कौर लिए तोता, मैना के कौर कहकर खिलाती थी। काश मेरी बेटी होती जो मेरा दर्द समझती। मेरे बेटों ने तो मेरा भी बंटवारा कर दिया।

उसी दिन ताई जी ने वह घर छोड़ दिया। अपने कदमों में तेजी लाते हुए वह पास के वृधाश्रम में पहुँच गई और तबसे वह हर जोड़े को आशीर्वाद देतीं हैं- दूधो नहाओ, बेटी फलो, सुपुत्र फलो।

आशीर्वाद बेटे बंटवारा

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