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बिड़ला विद्या मंदिर नैनीताल ५
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© Atul Agarwal

Drama Others

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तीन महीनों की छुट्टियों के इलावा, तीन तीन महीनें फुटबॉल, क्रिकेट और हॉकी गेम्स हर छात्र के लिये कम्पलसरी था। श्री जी.बी. तिवारी जी का फेवरेट गेम फुटबॉल था, लेकिन वो हर खेल के हरफनमौला थे। नवम्बर में गुरूजनों और छात्रों की क्रिकेट टीमों के बीच फील्ड नंबर वन में एक मैच होता था। दोनों छोर के विकटों के बीच मैट बिछाई जाती थी। उस पर बॉल और तेज स्विंग करती थी, श्री पवार गुरूजी ओपन करते थे, एक छोटे कद का छात्र बहुत तेज खतरनाक बौलिंग करता था, एक बार एक बॉल श्री पवार गुरु जी के सेंटर में लगी, वह रिटायर्ड हर्ट हो गए।


क्रिकेट खेलने के लिए फील्ड नंबर थ्री को चार हिस्सों में बाट दिया जाता था, २५ – २५ गज पर विकेट, कुल ८ टीम खेल सकती थी। एक बार सभी ८ टीमें खेल रही थी, हम भी खेल रहे थे। हम बल्ला लिए बालिंग एण्ड पर खड़े थे। किसी दूसरे विकेट से बल्लेबाज ने ऊँचा शॉट मारा,बॉल उड़ती हुई सीधे हमारे सिर पर गिरी। हम बेहोश, ४ गुरुजन भीथे। आनन फानन में जैसे तैसे हमें उठा कर डिस्पैन्सरी ले गए। शायाद सिस्टर नें हमें ग्राइप वाटर पिलाया।उससे कोई फायदा नहीं हुआ। गुरूजनों ने तुरंत निर्णय लिया की हमें तल्लीताल स्थित रामसे हॉस्पिटल ले जाया जाये। स्ट्रेचर पर हमें लादा गया. छात्रों ने स्ट्रेचर कन्धों पर उठा लिया और बड़े जोर से जय घोष किया ‘राम नाम सत्य है’. हमारी साँसें चल रही थी, अतः गुरुजनों ने इस बात के लिए छात्रों को रोका और कहा की स्ट्रेचर को नीचे से पकड़ के ले चलो, वह बहुत मुश्किल काम था। थोड़ी दूर तक तो छात्रों ने गुरुजनों की बात मानी और जब गुरुजन पीछे छुट गए तो स्ट्रेचर कन्धों पर शिफ्ट कर लिया और जय घोष ‘राम नाम सत्य है’ के साथ रामसे हॉस्पिटल पंहुचा दिया।


श्री पवार गुरु जी और हम दोनों ही ठीक हो गए.


फिर धीरे धीरे हैलमैट, लैग गार्ड, एब्डोमिनल या एल गार्ड, शुरू हुए.


........क्रमशः

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