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हजार का नोट भाग 3
हजार का नोट भाग 3
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© Mahesh Dube

Thriller

3 Minutes   7.3K    21


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भाग 3 

      अगली दोपहर मोहन, मार्था आंटी केअड्डे पर अपने पुराने दोस्त गैब्रियल के साथ बैठा देशी शराब की चुस्की ले रहा था। अपने परिचित शामराव के ऑटो रिक्शे में बैठकर किसी तरह वो यहाँ तक पहुंचा था।  गैब्रियल के साथ मोहन की अच्छी जुगलबंदी थी।  शामराव मोहन को यहाँ छोड़कर अपने धंधे पर निकल गया था जब मोहन का काम ख़त्म हो जाता तो वह मोबाइल फोन पर कॉल करकर शामराव को बुला लेता, इसीलिये शामराव लंबी दूरी के पैसेंजर नहीं ले रहा था वह पिछले एक घंटे से इसी एरिया में मंडराता फिर रहा था। मोहन ने अपनी जेब से निकाल कर हजार का आधा नोट गैब्रियल के हाथों में पकड़ा दिया था जिसे वह काफी दिलचस्पी से देख रहा था। गैब्रियल ने काफी अरसे पहले सोने और नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों के यहाँ कैरियर का काम किया था। उसने नोट देखते ही बता दिया कि यह कैरियर को मिलने वाला ही नोट का हिस्सा है।  जिसपर 23 जो लिखा है वह माल लेने की तारीख है और पीछे 3 मतलब रात तीन बजे माल की डिलीवरी मिलेगी और बीच में शार्ट फॉर्म में एम आई लिखा हुआ है वह किसी जगह का शार्ट फॉर्म होगा।  

यार! मोहन फुसफुसाता हुआ बोला, 23 तारीख तो परसों ही है क्या यही तारीख हो सकती है?

बिलकुल! गैब्रियल बोला, हंड्रेड परसेंट यही तारीख है। ऐसे नोट काम होने के एक दो दिन पहले ही बांटे जाते हैं।  

ओह! अब यह नोट तो हमारे पास है, अगर नियत समय पर कोई आदमी यह नोट लेकर नहीं पहुंचा तो क्या होगा? 

मोहन ने पूछा। 

सामने वाली पार्टी किसी कीमत पर बिना नोट के माल नहीं देगी। यह इस धंधे का अलिखित क़ानून है। वो माल लेकर लौट जाएंगे।  

गैब्रियल और मोहन सिर जोड़े बातचीत में मशगूल थे उन्हें यह भान नहीं था कि शामराव जाने कब से आकर उनके बगल में खड़ा था और उसकी बाज सी नजर गैब्रियल के हाथ में पकड़े हुए हजार के नोट के आधे टुकड़े पर थी।  गैब्रियल की नजर जैसे ही शामराव पर पड़ी, वह हड़बड़ा गया और उसने नोट को जल्दी से मुट्ठी में दबाने की कोशिश की। 

"इधर ही भाड़ा लेकर आया था तो सोचा अगर बात ख़त्म हो गई हो तो भाऊ को लेता चलूँ "कहकर शामराव ने यह जताने की कोशिश की, कि उसे सवारी के अलावा किसी दूसरी बात से कोई मतलब नहीं है लेकिन भीतर ही वह उद्वेलित हो उठा था। अब उसकी दिलचस्पी मोहन में ख़त्म हो चुकी थी इसीलिए जैसे ही मोहन ने उसे थोड़ी देर बाद आने को कहा वह लपक कर बाहर निकल आया और जल्दी जल्दी कहीं फोन लगाने लगा। 

शामराव ने कहाँ फोन लगाया? 

कहानी अभी जारी है 

पढ़िए भाग 4 

खून खराबा

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