रंग बिरंगे कपड़े

रंग बिरंगे कपड़े

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एक गांव के बाहर खेत में एक सियार रहता था। सियार के साथ उसके दो बच्चे भी रहते थे। एक बार खेत का मालिक किसान खेत जोतने के बाद अपने कुछ कपड़े वहीं भूल गया। किसान के कपड़े सियार को मिल गये। सियार ने कपड़े पहन कर देखा। किसान के कपड़े सियार के शरीर पर ठीक आ गये थे। सियार बहुत खुश हुआ। वह खुशी में जोर जोर से हुआं हुआं कर चिल्लाने लगा। सियार को कपड़े पहने देख कर उसके बच्चे भी कपड़े पहनने की जिद करने लगे। उसका छोटा बच्चा मचलता हुआ बोला,

हुंआ हुंआ हुंआ हुंआ हुंआ हुंआ हुंआ हुंआ।

मेरे बापू अच्छे बापू

कपड़े सुन्दर पहने बापू

दिखते कितने प्यारे बापू।

हम दोनों को ऐसे कपड़े

ला के दे दो प्यारे बापू।

 

छोटे को देख उसके बड़े बच्चे ने भी जिद करनी शुरू कर दी। बच्चों की जिद देखकर सियार ने उन्हें बहुत समझाया कि कपड़े आदमी लोग ही पहनते हैं। पर सियार के बच्चे नहीं माने। वे और भी जिद करने लगे कि हमें किसान के बच्चों के कपड़े लाकर दो।

 

उनकी जिद से परेशान होकर एक रात सियार कपड़े लाने के लिए गांव की तरफ चल पड़ा। वह बहुत धीरे से गांव में घुसा। वह धीरे-धीरे चलता हुआ किसान के घर में घुस गया। आंगन में उसे किसान के बच्चों के कपड़े दिखायी पड़े। वह चुपके से कपड़े उठा कर खेतों की तरफ भाग गया।

 

किसान के बच्चों के कपड़े पहन कर सियार के बच्चे खुश हो गये। वे खुशी में नाचने और गाने लगे। दोनों बच्चों ने घूम-घूम कर हर सियार को अपने कपड़े दिखलाए। हर जानवर को अपने कपड़े दिखलाए। सभी ने उनके कपड़ों की तारीफ की।

 

धीरे-धीरे सियार और उसके बच्चों के कपड़े गन्दे होने लगे। कुछ दिनों बाद उनके कपड़े एकदम गन्दे हो गये। फिर भी वे उनको पहने रहते थे। क्योंकि उनके पास पहनने के लिए दूसरे कपड़े तो थे नहीं। न ही वे कपड़ों को साफ करना जानते थे। गन्दे कपड़े पहनने से सियार और बच्चों के शरीर में खुजली होने लगी। जब उनकी खुजली बहुत बढ़ गयी तो वे भागे-भागे डाक्टर भालू के पास गये। सियार ने भालू से अपनी व बच्चों की समस्या बताई। वह अपना शरीर बुरी तरह खुजलाता हुआ बोला,

भालू भाई भालू भाई,

बात सुनो तुम भालू भाई।

किसान के कपड़े हमने पहने,

रंग बिरंगे कपड़े पहने,

शरीर में खुजली होती है,

हरदम खुजली होती है

जल्दी से कोई उपाय बताओ,

हमको इस आफत से बचाओ।

 

सियार की बात सुनकर डाक्टर भालू खूब हंसा और उसे समझाता हुआ बोला,

सियार राम सियार राम,

मूरख तुम हो सियार राम।

किसान के तुमने कपड़े पहने,

रंग बिरंगे कपड़े पहने।

पर कपड़े कितने गन्दे हैं,

आफत के ये पुलिन्दे हैं,

खुजली तुमको होगी ही,

जब कपड़े तुम्हारे गन्दे हैं।

 

डाक्टर भालू की बात सुनकर सियार रोने लगा। वह उससे बोला, ‘‘भालू भाई आप इस खुजली से बचने के लिए कोई दवा तो हमें दीजिए।”

भालू ने कहा,  ‘‘देखो भाई सियार राम, इस खुजली की तो बस एक ही दवा है।”

‘‘कौन सी दवा भालू भाई?” सियार अपना शरीर खुजलाता हुआ बोला।

‘‘तुम इन कपड़ों को उतार कर साफ कपड़े पहनो। और अपने कपड़ों को रोज साफ किया करो। साफ कपड़े पहनोगे तो खुजली कभी नहीं होगी।” भालू ने उसे समझाया।

‘‘पर भालू भाई अबकी बार मैं कपड़े लेने गया तो किसान मुझे मार ही डालेगा।” सियार उदास होकर बोला।

‘‘अरे भइया किसने कहा है कि तुम कपड़े पहनो। कपड़े तो आदमी पहनते हैं। क्योंकि वे उसे साफ करना जानते हैं और सिलना भी। तुम इन कपड़ों को उतार कर फेंक दो और नदी में नहा लो। तुम्हारी खुजली ठीक हो जाएगी।” भालू ने उसे फिर से समझाया।

 

सियार बहुत ध्यान से भालू की बातें सुन रहा था। उसकी समझ में भालू की यह बात आ गयी। उसने अपने और बच्चों के शरीर से गन्दे कपड़े निकाल फेंके। फिर तुरन्त जाकर नदी में खूब नहाया। उसके बच्चों ने भी शरीर की खूब सफाई की। उनकी खुजली ठीक हो गयी। वे फिर आराम से उसी खेत में रहने लगे।

 

 

 


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