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पाँच सौ रुपये
पाँच सौ रुपये
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© Shyam Kunvar Bharti

Action Drama

21 Minutes   14.2K    15


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पाँच सौ रुपये के लिए तुम अपने देश से गद्दारी करोगे अख्तर, अपने ही देश के जवानो पर पत्थर फेकोगे उस बेरोजगार नवयुवक को उसकी विधवा माँ रज़िया बेगम समझा रही थी | ये गद्दारी नहीं है अम्मीजान बल्कि आजादी की लड़ाई है | हमे अपनी जमीन को हिंदुस्तान से आजाद कराना है | हिंदुस्तान की हुकूमत हमारे अपने लोगो पर बे-इंतहा जुल्मो सितम ढ़ा रही है | इसलिये हम हिंदुस्तान की जल्लाद हुकुमरानों को माकूल जवाब पत्थरो से दे रहे है | हम उनको यह ताकीद कर रहे है की वो होस मे रहे | हम अपनी आजादी लेकर रहेंगे| अब हम उनके बहकावे मे नहीं आने वाले है | वो नौजवान अपनी माँ को बड़े ही जोश मे तकरीर दे रहा था |

तड़ाक - तभी उसकी माँ ने उसके गाल पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया | नामाकूल पता नही उन दहशत गर्दो ने तेरे अंदर कितना जहर भर दिया है | अपने ही देश से तू आजादी लेने की बात कर रहा है | उसकी माँ बड़ी गुस्से मे उसे डांट लगा रही थी | अख्तर अपनी माँ का यह रूप देखकर दंग रह गया और अपना गाल सहलाने लगा |

तुझे पता है तू कितनी बड़ी आग से खेल रहा है | किसी दिन हिन्दुस्तानी फौज की गोलियो का शिकार हो जाएगा और तेरे नाम आतंकवादी का बदनुमा दाग लग जाएगा | लोग मुझे एक आतंकवादी की माँ कहेंगे | गुमराह मत हो मेरे बेटे, मै तुझे खोना नहीं चाहती | आखिर मेरा तेरे सिवा है ही कौन | तेरे पीछे तेरी दो बहनो का बोझ है उनका निकाह पढ़वाना बाकी है | तेरे अब्बा हुजूर को उन जल्लाद आतंकियो ने अपने ही घर मे बड़ी बेरहमी से कत्ल कर दिया था | उन लोगो ने सेना के जवानो से बचने के लिए हमारे ही घर मे पनाह लिया था | तेरी बहनो के साथ नाजायज हरकते करते रहे । जब तेरे अब्बा ने उनका विरोध किया और सेना से पकड़वाने की धम्की दिया तो उन जालिमो ने तेरे बाबा का कत्ल कर दिया | और तू उन्ही कमबख्तों का साथ देने चला है | रज़िया बेगम अपने आंखो से बहते आँसुओ को पोछते हुये अपने बेटे को समझाने की कोशीश कर रही थी |

तुझे समझाना बड़ा मुस्किल है अम्मी ले पकड़ पाँच सौ रुपये अब मै चलता हूँ, अभी मुझे कई साथियो को इकठ्ठा करना है |हिन्दुस्तानी सेना के जवानो का सिर पत्थर से फोड़ना है | इतना कहकर अख्तर अपनी माँ के सामने पाँच सौ रुपए का नोट रखकर घर से निकल गया ,उसकी माँ लाख उसे रोकती रही मगर वो नहीं रुका | बेबस रज़िया अपने सफ़ेद आंचल से अपने आँसुओ को पोछती रही |

लाल चौक पर कश्मीर के सैकड़ो नौजवान अपने हाथो मे पत्थर लेकर हिंदुस्तानी सेना के जवानो पर बरसा रहे थे | सेना के जवान अपना बचाव करते हुये भीड़ को तितर बितर करने के लिए आँसू गैस के गोले बरसा रहे थे| कुछ जवान रबर की गोलीया चला रहे थे, जिससे उन लड़को को चोट तो लगती थी मगर कोई घायल नहीं होता था | और कई जवान लाठियों से लड़को को डराने की कोशिश कर रहे थे | लड़के पहले पीछे भागते फिर वापस आ जाते और फिर पत्थर फेकने लगते |

चलो अब बहुत हो गया अख्तर ने अपने साथियो को चिल्लाकर कहा | उसकी आवाज सुनते ही सारे लड़के पत्थर फेकना बंद कर उधर-उधर गलियो मे भागते हुये गायब हो गए |

जंगल मे एक पेड़ के नीचे लगभग पचास की संख्या मे लड़के जमा हुये थे | उनके सामने तीन आतंकवादी अपने कन्धे पर ए के47 रायफले टांगे हुये थे| उसमे से एक ने कहा शाबाश लड़को तुम लोगो ने कमाल कर दिया | बस इसी तरह उस जालिम हुकूमत के जवानो पर पत्थर बरसाते रहो | इंसा अल्लाह हम अपनी आज़ादी लेकर रहेंगे | तुमलोग अगर इसी तरह अपनी जाबांजी दिखाते रहे तो तुम लोगो की जल्द ही हमरे आका तुम्हारी तरक्की करके हमारी तरह हथियार मुहय्या करा देंगे और तुम सबको तनख्वाह के रूप मे मोटी रकम मिलने लगेगी, साथ ही तुम सबको तुम्हारी काबिलियत के मुताबिक कमांडर का पद भी दिया जाएगा फिर तुम लोग भी खुद से आपरेसन की प्लानिंग कर सकोगे | जहा चाहोगे हिंदुस्तानी सीमा पर अटेक कर सकोगे |

जीतने सैनिको को मरोगे उतना तुम लोगो की तरक्की होती जाएगी | उस आतंकी ने एक लंबा – चौड़ा भाषण दिया और नारा लगाया पाकिस्तान जिंदाबाद । सबने उसका साथ देकर नारा दुहराया | फिर सुदरे आतंकी ने अख्तर के कंधे पर अपना हाथ रखते हुये कहा अभी तुम बहुत सही काम कर रहे हो, हमलोग जल्दी ही सिफारिस करके तुम्हारा प्रोमोसन करा देंगे, उसने अख्तर से कहा | तुम अधिक से अधिक बेरोजगार लड़को को इकठ्ठा कर हमारे पास लाओ हमलोग उनको पत्थर फेकने की ट्रेनिंग देंगे और लड़को को रोज के हिसाब से पाँच सौ रुपया देंगे |

लड़को का टिम बनाने वालों को टिम लीडर बनाया जाएगा | जो जितना लड़का इकठ्ठा करेगा उसे भी प्रति लड़का सौ रुपया दिया जाएगा और पत्थर फेकने के पाँच सौ रुपया अलग से मिलेगा | फिर उसने एक रुपए की थैली अख्तर की तरफ बढाते हुये कहा ये लो पैसे अपने सभी लड़को मे बाँट दो और अब तुम लोग जाओ अगला एकसन कब करना है मोबाइल के जरिये सबको मिल जाएगी |

अख्तर ने उस आतंकी से रुपए लेकर अपने लड़को के बीच बाँट दिया और बाकी बचे रुपए उसने अपने पास रख लिया, उसने उन आतंकियो को सलाम किया और सबको लेकर वापस मूड गया |

मसस्जिद के अंदर लगभग सौ लोग बैठे हुये थे उनके बीच एक अलगाववादी नेता अपनी तकरीर दे रहा था | आप लोग गौर से मेरी बातो को सुनिए, अगर हमलोगो को अपनी सि यासत चलानी है तो कश्मीर मे हर हाल मे अमन-चैन कायम नहीं होने देना है |कश्मीर के बच्चो को तालिम से बुरी तरह महरूम रखना है | बेरोजगार लड़को को अधिक से अधिक पत्थरबाज बनाना है | चारो तरफ आतंक मचाकर रखना है | हमारे आका हमे इसी बात के लिए पैसे देते है | हमे दोनों हाथो मे लड्डू रखना है | हिंदुस्तान की हुकूमत तो हमे हर सुविधा दे ही रही है वहाँ से भी माल असबाब लेते रहना है तो कश्मीर की आवाम को हुकूमत के खिलाफ भड़काते रहना है |

अगर यहा की आवाम हमारी साजिस मे नही फसती है तो हमारे लोगो को उनकी भीड़ का हिस्सा बनाकर हिंसा को भड़काते रहना है | हमे हमशा हुकूमत के खिलाफ भड़काऊ भाषण देते रहना है | हिन्दुस्तानी हुकूमत के कुछ गद्दार और लालची नेताओ को अपने साथ मिलाकर रखना है | उनके सामने कुत्तो की तरह रुपयो की हड्डीया फेकते रहना है ताकि वो हमारी हा मे हा मिलाते रहेऔर हमारे हक मे हुकूमत के खिलाफ लड़ते रहे | हमे हिंदुस्तान और कश्मीर की तरक्की से कोई लेना देना नहीं है, हमे तो बस अपनी तरक्की के बारे मे सोचना है | उसका भाषण खत्म होते ही सबने एक साथ कहा आमीन |

उस भीड़ से एक नेता ने खड़ा होकर कहा – आप चिंता न करे जनाब हम पूरी कोशिश करेंगे की हमारा मिसन इंसाल्लाह कामयाब हो | लेकिन मौजूदा हिंदुस्तान की हुकूमत बेहद सख्त और चालाक है, इसलीए हमे हर कदम फुक –फुक कर रखना होगा इस मुल्क का वजीरे आलम बड़ा शातिर है वो हर मसले पर अपनी बड़ी तीखी नजर रखता है | फिर भी हम अपने मकसद मे हर हाल मे कामयाब होंगे | उसका भाषण खत्म होते ही सबने जोरदार तालिया बजाकर उसका साथ दिया |

ठीक है हमलोग अब अगली जुमा को मिलेंगे तब हम लोग और बड़ी दहसतगर्दी की घटनाओ की लंबी लिस्ट के साथ मिलेंगे | फिर सब लोग बड़े आराम से मस्जिद से बाहर निकल गए|

ये तेरे माथे पे चोट का नीसान कैसे लगा रज़िया ने अपने अपने बेटे अख्तर से पूछा | बस ऐसे ही अम्मी गिर गया था इसलिए चोट लग गई | उसने झूठ बोलते हुये कहा | गिर तो तू वैसे भी गया है मेरे बेटे, मै तेरी माँ हु मुझसे झूठ मत बोल सच बता तूने आज फिर सैनिको के साथ पत्थरबाजी किया है न | मै अब भी कहती हु बेटा मान जा वो जल्लाद सब तेरा इस्तेमाल कर रहे है | एक दिन तुझे बली का बकरा बना देंगे | तू बे मौत मारा जाएगा, फिर वे लोग किसी और को अपना मोहरा बना लेंगे | उन्हे हमारे जन्नत से खूबसूरत काश्मीर की खुशहली से कोई लेना देना नहीं है, इसमे उनकी बहुत बड़ी सियासत है | तुम नासमझ लड़को को आगे कर वे सब अपनी रोटिया सेक रहे है | और तू अंधा बनकर उनके इसारे पर अपने वतन, अपनी कौम, अपनी जमीर और अपनी माँ से गद्दारी कर रहा है |

बस कर तू बाज आजा इन हरकतों से बेटा इससे कुछ हासिल नहीं होगा ! - रज़िया ने अपने बेटे को समझाने की कोशिश कर करते हुये कहा |

तू समझ नहीं रही है अम्मी मै जो भी कर रहा हु अपने कश्मीर के लिए कर रहा हूँ | इसकी आजादी के लिए कर रहा हूँ | अभी अख्तर अपनी माँ को और कुछ उल्टा सीधा समझाता, तभी हिंदुसतानी सेना के जवान पुलिस को लेकर पहुच गए | उनमे से एक जो उनका सीनियर मालूम पड़ रहा था उसने रज़िया से पूछा माता जी अख्तर अब्दुल्लाह का घर यही है | बेटा घर तो यही है पर क्यो पूछ रहे हो ? - रज़िया अभी ससंकित होकर उन सैनिको और पुलिस से बात कर ही रही थी की अख्तर वहा से भागने लगा, पुलिस के सिपाहियो ने दौड़कर उसे पकड़ लिया|

सर यही है अखतर, यही पत्थरबाज लड़को का लीडर है ! - एक सिपाही ने उसकी पहचान करते हुये कहा | सब लोग उसे पकड़कर उस बड़े ऑफिसर के पास ले गए | तो तुम अख्तर मिया हो ! - उस बड़े ऑफिसर ने रौबदार आवाज मे पूछा | जी हूँ तो क्या हुआ ! - अख्तर ने बे खौफ होकर कहा |

जितना पूछा जाय उतना सही - सही जवाब दो ज्यादा हेकड़ी मत दिखाओ समझे तुम ! - एक दूसरे जवान ने उसे डाटते हुये कहा |तुम पत्थरबाज लड़को के लीडर हो ? - उस आफिसर ने फिर पूछा | मै पत्थर बाज नहीं आजादी चाहनेवालों का लीडर हु और जबतक कश्मीर आजाद नहीं हो जाता हम इसी तरह आप सबों पर पत्थर बरसाते रहेंगे ! - अख्तर ने निडर होकर कहा |

तड़ाक ! - उस बड़े ओफिसर ने उसके गाल पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया | बंद करो अपनी बेहूदा जुबान ! तुम जिसे आजादी की लड़ाई कह रहे हो नादान लड़के उसे अपने देश के साथ गद्दारी कहते है | इसे ले चलो पुलिस थाने ! - उस ऑफिसर ने कहा और एक पुलिश ऑफिसर को कहा इसे थाने मे ले जाकर अच्छी तरह पूछताछ करो और पता करो इसके किन –किन आतंकियो से ताल्लुक्कात है, वे कौन है, कहा रहते है और उनका पनाहगार कौन -कौन है | यस सर इतना कहकर उस पुलिस ऑफिसर ने अख्तर को अपने जवानो से पकडवाकर पुलिस की जीप मे बैठा लिया |

रज़िया ने उस ओफिसर का पैर पकड़ लिया और रोते हुये कहा - मेरे बेटे को छोड़ दो साहब ये अभी नादान है, नासमझ है, मैं इसे समझा बूझाकर सही रास्ते पर ले आऊँगी दुबारा ऐसी गुस्ताखी नहीं करेगा |

माताजी आपकी तरह हमारी भी माँ है वो हमे देश के लिए मर मिटने की शिक्षा देती है लेकीन एक आप है, अपने बेटे को गद्दार बना रही है ! - उस ऑफिसर ने रज़िया से कहा | तौबा- तौबा ऐसा इल्जाम मुझपर न लगाए साहब मै भी एक सच्ची हिन्दुस्तानी मुसलमानी हु ! मै अपने देश से बगावत करने के लिए कभी अपने बेटे को गुमराह नहीं कर सकती ! - रज़िया ने रोते हुये कहा |

आप चिंता न करे माताजी हम सिर्फ पूछताछ के लिए आपके बेटे को ले जा रहे है ,पूछ-ताछ करने के बाद छोड़ देंगे, मगर दुबारा पत्थरबाजी करते पकड़ा गया तो फिर हम कुछ नहीं कर सकते ! - इतना कहकर वो सेना का ऑफिसर अपनी की गाड़ी मे बैठ कर चला गया, पीछे सेना के जवानो की गाड़ी भी चल दी | रज़िया आँसू भरी निगाहों से सबको जाते हुये देखती रही | उसे अपने बेटे अख्तर के भविष्य को लेकर चिंता हो रही थी |

जिस थाने मे अख्तर बंद था ठीक दो घंटे बाद उसके बाहर कई बम के धमाके हुये। गनीमत थी की कोई हताहत नहीं हुआ, मगर धमाके की वजह से इतनी अफरा -तफरी मच गई की किसी को कुछ समझ मे नहीं आया की क्या हुआ है ? तभी काफी तादात मे हथियारबंद आतंकी आए और अखतर को थाने से निकालकर ले गए सब देखते रह गए |

पुलिस ने तत्काल कार्यवाई करते हुये अख्तर की माँ रज़िया को थाने उठा लाई और बड़े इज्जत के साथ एक दूसरे कमरे मे बैठाया और थाना इंचार्ज ने सेना के बड़े ऑफिसर को फोन कर थाने मे हुई वारदात के बारे मे बताया और कहा की बड़ी मुसकिल से अख्तर ने कई राज खोले है आप फौरन पूरी तैयारी के साथ थाना आ जाए वरना देर हो जाएगी, हमे अभी तत्काल हमला करने जाना है, जी ठीक है सर मै अभी अपनी टिम को एलर्ट करता हु ओके सर | इतना कहकर उस पुलिस ऑफिसर ने आनन फानन मे अपनी पुलिस के जवानो को हमला के लिए तैयार होने का हुक्म दिया |

थोड़ी ही देर मे सेना का कई दस्ता हथियारो से लेस होकर पहुच गया, साथ मे सेना ओफिसरो की दो गाड़िया और आ गई | सेना और पुलिस के बीच आनन फानन मे गुप्त मीटिंग हुई फौरन अगली कार्यवाई करते हुये अखतर की बताई हुई जगह पर घेरा बंदी और हमला करने की रणनीति तैयार कर ली गई | पूरे टिम की अगवाई सेना के बड़े ऑफिसर दीपक राणा को तय किया गया |

आबादी से थोड़ी ही दूर पुलिस और सेना की गाड़िया जैसे ही पहुची उनपर पत्थरबाजो ने पत्थरो से हमला सुरू का दिया | सभी जवान अपना बचाव करते हुये आगे बढ़ने लगे, जबकि वो चाहते तो इन सारे पत्थरबाजो को गोलियो से ढेर कर देते मगर दीपक राणा ने ऐसा करने से मना कर दिया, उसने कहा ये सभी हमारे भटके हुये हिन्दुस्तानी भाई है, इनपर हमला नहीं करना है| उसने सबको सावधान करते हुये कहा ये हमला हम लोगो को आगे बढ़ने से रोकने के लिए है इसलिए इसमे ज्यादा समय बर्बाद नहीं करना है | कुछ लोग इनके साथ मोर्चा सम्हाले और बाकी लोग आगे बढ़ते रहे |

जंगल मे पेड़ो के झुरमुट के बीच लगभग पचास आतंकवादी मौजुद थे | उनमे से एक जो उनका कमांडर था कह रहा था –आप लोग हमले के लिए तैयार हो जाओ अखतर ने इस जगह के बारे मे पुलिस को बता दिया है | पुलिस हिंदुस्तानी सेना को लेकर कभी भी आकर हमपर हमला कर सकती है |

मैंने अपने लड़को को मोबाइल और व्हात्सप्प्स के जरिये मैसेज कर दिया है वे लोग सेना पर पत्थरबाजी करके उन्हे थोड़ी देर रोक सकते है | सेना उनपर गोली नहीं चला सकती | वो अभी बोल ही रहा था की उसके मोबाइल ने मैसेज आने की सूचना दी |उसने मैसेज बॉक्स खोलकर देखा और कहा –पुलिस ने अख्तर की माँ को भी थाने उठा लिया है |

मै अभी अपने लड़को को बोल देता हु अगर बुढ़िया को बचा सकते है तो निकाल ले जाए थाने से वरना उसका किस्सा वही तमाम कर दे| भाईजान आप ये क्या कह रहे है वो मेरी माँ है ! आप उसे मारने का हुक्म देना चाहते है और मेरी माँ को बुढ़िया कह रहे है ! - अख्तर ने बिरोध करते हुये कहा | चुप रहो हमारे रास्ते मे जो भी कांटा बनता है हम उसे हमेसा के लिए अपने रास्ते से हट देते है | तुमने भी पुलिस को हमारे बारे मे बहुत कुछ बता दिया है, इसलिए तुम भी हमारे लिए खतरा बन चुके हो,

अगर आज हमलोग बच गए तो ठीक है वर्ना तुम्हें भी ठिकाने लगाना पड़ेगा | उस खूंखार आतंकी ने बड़े खरतरनाक लहजे मे कहा | अखतर का पूरा बदन खौफ से सिहर उठा उसे अपनी माँ की बाते याद आने लगी थी वह समझ चुका था इन लोगो के लिए वह एक मोहरा मात्र था बाकी उसकी इन लोगो के बीच कोई अहमियत नहीं है | उसे अपने किए पर बहुत पछतावा हो रहा था |

उसे अब समझ आ रहा था, जिस तरह वो अपनी माँ के बारे मे न तो बुरा सुन सकता है और न बुरा होने दे सकता है, उसी तरह यह धरती भी उसकी माँ की तरह है | भला कोई भी सपूत बेटा अपनी माँ का टुकड़ा होते कैसे देख सकता है |

उसने सोच लिया ये आतंकी हमारे हितैषी नहीं बल्कि हमारे देश के दुश्मन है | इनका कोई ईमान धर्म और जाती नहीं है| ये सिर्फ अपने मकसद के लिए हमारे देश के भाइयो के खून के प्यासे है| तभी वहा जंगल मे गोलियो की आवाज आने लगी | सबलोग अपने –अपने पोजिसन सम्हाल लो लेकीन याद रहे मरते दम तक इन सैनिको का मूह तोड़ जवाब देना है | जिंदा कोई पकड़ा नहीं जाना चाहिए ! इनसाल्लाह फतह हमारी ही होगी ! - उस कमांडर ने सबको ललकारते हुये अपनी पोजिसन ले लिया |

अखतर बड़ी सावधानी से जमीन पर रेंगता हुआ उस कमांडर के पीछे पहुँच गया और अपने पैर के जोरदार प्रहार से उसे जमीन पर मुह के बल गिरा दिया | उसकी ए के फोरटी सेवन राइफल छिन लिया और कूदकर उसकी पीठ पर खड़ा हो गया | उसने राइफल के कुंडे से जोरदार चोट उसके सिर पर किया वो कमांडर दर्द से बिलबिला उठा | उसके सिर मे खून की धारा बहने लगी | तभी उसकी तरफ पाँच आतंकी दौड़े उसने अपनी राइफल का मुह उधर ही घुमाकर उसने ट्रेंगर दबाना सुरू कर दिया |

चार वही जमीन गिर पड़े और पांचवा वहा से भाग खड़ा हुआ | अखतर घूमकर पीछे मुड़ा और झुक कर उस घायल आतंकी कमांडर का कालर पकड़कर ऊपर उठाकर खड़ा कर दिया और उसकी पीठ पर राइफल सटाकर कहा- चलो आगे बढ़ो कुत्ते मेरी माँ को बुढ़िया कहा था उसे गोलियो से मरवाएगा उधर बाकी आतंकियो और सेना मे जमकर मुठभेड़ हो रही थी |लगभग दस आतंकी मारे और पाँच बुरी तरह घायल हो चुके थे |

बाकी भागने मे सफल रहे |अखतर उस आतंकी को धकेलता हुआ एक बड़े पेड़ की आड़ मे आ गया | उसने अनुमान लगाया सेना के जवान किस तरफ से हमला कर रहे है |अंदाजा होते ही वो उस आतंकी को धकेलता हुआ उस तरफ ही आगे बढ़ने लगा |

तू ठीक नहीं कर रहा है धोकेबाज़ मै तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा ! अभी भी वक्त है मुझे छोड़ दे मुझे जाने दे और तू भी भाग जा वर्ना ये सैनिक हमदोनों को बुरी मौत मारेंगे |उस आतंकी ने अख्तर को धमकाते हुये कहा| तू चुप कर हरामजादे उसने एक लात उस आतंकी की पीठ पर मारते हुये कहा तू अब बस अपनी चिंता कर मुझे अब अपनी मौत की चिंता नहीं है |तूने तो मेरी जिंदगी बर्बाद कर ही दिया है लेकिन मरने से पहले मै अपने वतन के लिए एक नेक काम करना चाहता हूँ |मै तुझे हिंदुस्तानी सेना के हवाले करूंगा ! - अख्तर ने गुर्राते हुये कहा | उसकी आंखे गुस्से से लाल हो चुकी थी | उसके सिर पर खून सवार था |

चुपचाप चलते रहो अगर जरा भी होशियारी दिखाने की कोशिश की तो इस राइफल की सारी गोलीया तुम्हारे सिर मे उतार दूंगा, अखतर ने उसे बेरहमी से धकियाते हुये कहा | तबतक वो सेना की तुकड़ी के काफी करीब पहुँच चुका थाउसने अपनी राइफल का मुह ऊपर आसमान की तरफ करके एक फायर किया

गोली चलने की आवाज सुनकर सेना के सीनियर ऑफिसर अख्तर की तरफ मूड गया उसने अपने जवानो को सावधान करते हुये कहा – मेरा ईसारा पाते ही हमला बोल देना है| यह मामला कुछ उल्टा मालूम पड़ रहा है, अख्तर के कब्जे मे आतंकियो का बड़ा कमांडर है |ऑफिसर अभी कुछ समझ पाता इससे पहले अख्तर के कब्जे मे पड़ा आतंकी ने बड़ी फुर्ती से पीछे मुड़कर अख्तर के हाथ से राइफल छिन लिया और उसके सिर पर लगा दिया | अब बोल धोखेबाज मुझे ही धोखा देता है, मेरी ही बिल्ली मुझे मियाऊ बोलती है |मरने के लिए तैयार हो जा ! - उसने अख्तर को धमकाते हुये कहा |

खबरदार अगर एक भी गोली चलाई तो तुम हमारे निसाने पर हो, मेरे एक इसारे पर तुम्हारे बदन मे सैकड़ो गोलीय लगेगी और तुम्हारा बदन छलनी छलनी हो जाएगा उस सेना के ऑफिसर ने रोबदार आवाज मे उस आतंकी को खबरदार करते हुये कहा |

तभी अखतर बडी तेजी से नीचे झुका और एक पत्थर उठाकर उस आतंकी के सिर पर दे मारा, उसके हाथ से राइफल गिर गई और उसने अपना सिर पकड़ लिया |अब दूसरी जगह उसके सिर से खून बहने लगा | अख्तर ने लपक कर जमीन पर पड़ी राइफल उठा लिया लेकिन उस आतंकी ने भी उस राइफल को पकड़ लिया |

दोनों मे गुथम गुथी होने लगी |उस आतंकी ने अपने मुक्के की चोट से अख्तर को घायल करना सुरु कर दिया | अख्तर ने ज़ोर से अल्लाह का नाम लिया और उस आतंकी को पकड़कर जमीन से उपर उठा लिया और जमीन पर पटक दिया | राइफल उस आतंकी के हाथ से छिटक कर दूर जा गिरि और वो दर्द से कराहने लगा |

तबतक सेना के जवानो ने उसे चारो तरफ से घेर लिया | उस घायल आतंकी कमांडर का हाथ पैर बांधकर सेना की गाड़ी मे बैठा दिया |उस सेना के बड़े ऑफिसर ने अख्तर की पीठ थपथपाते हुये कहा शाबाश लड़के तुमने बड़ी बहादुरी का काम किया है | देर से सही मगर अब तुम सही रास्ते पर आ गए हो | तुमने जो फुर्ती और बहादुरी दिखाई है तुम्हें हमारी सेना मे होना चाहिए, सेना को तुम्हारे जैसे देशभक्त और बहादुर जवानो की जरूरत है |

तुमको जनकर खुसी होगी तुमने जिस आतंकी को पकड़वाया है वो आतंकियो का बड़ा कमांडर है उस पर सरकार ने लाखो रुपए का इनाम घोषित कर रखा है |

अब चलो तुम्हें काफी चोटे आई है तुम्हारा इलाज करवाना पड़ेगा |तुम्हारी इस बहदुरी के लिए सरकार तूमपर रहम करेगी तुम्हारे पिछले अपराधो के लिए सजा मे छुट दे सकती है साथ ही आज की इस बड़े कारनामे के लिए तुम्हें इनाम भी मिलेगा | तुम्हें सुधरने का एक मौका दिया जा सकता है | बल्कि मै तो चाहता हु तुम अपनी पढ़ाई – लिखाई पूरी करके सेना मे ही भर्ती हो जाओ और देश कि सेवा करो |तुम्हारे शिक्षा और ट्रेनिंग के साथ भर्ती मे मै तुम्हारी पूरी मदद करूंगा उस ईमानदार सेना के ऑफिसर ने अख्तर की बहादुरी और देशभक्ति पर खुश होकर कहा |

सबसे पहले तुम अपने कश्मीर के गुमराह नौजवानो के बीच जागरूकता लाओ, उन्हे आतंकियो और उनके आकाओ की असलियत बताओ और उन्हे सही रास्ते पर लाओ ।उस ऑफिसर ने अखतर को समझाते हुये कहा |

अखतर की आंखो से आँसू बहने लगे | अरे तुम रो क्यो रहे हो लड़के उस ऑफिसर ने उसके सिर सहलाते हुये कहा |सर ये मेरे पश्ताचाप के आँसू है, आप लोग अपने देश और हमारे लिए हमेसा अपनी जान देने को तैयार रहते है और हम लोग हमेसा आप लोगो को गलत समझते रहे, आपके खिलाफ पत्थरबाजी करते रहे और नापाक आतंकियो का साथ देते रहे जो कभी हमारे थे ही नहीं | वे लोग हमारे देश और इंसानियत दोनों के दुश्मन है | इतना होने के बावजूद भी आप का यह प्यार और अपनापन देख कर मै काफी शर्मिंदा हु सर... उसने रोते हुये अपने दिल की भड़ास निकालते हुये कहा |

अब रोना बंद करो तुम्हारे आँसुओ ने तुम्हारे सारे गुनाह धो दिये | अच्छा ये बताओ तुम अचानक बदल कैसे गए, अपनी जानपर खेलकर उनलोगों ने तुमको थाने से छुड़वाया फिर क्या हो गया उस ऑफिसर ने आश्चर्य ब्यक्त करते हुये पूछा |

इन काफिरो ने मेरी जान बचाने के लिए नहीं बल्कि अपनी जान की सलामती के लिए मुझे थाने से छूड़वाया था ताकि मै इनका कोई राज खोल न सकूँ | उन लोगो ने मेरी माँ का अपमान किया और उसे थाने मे अपने आदमी भेजकर जान से मारने का हुक्म दे रहा था |तब मुझे महसूस हुआ की ये लोग क्या है और इनका मकसद क्या है|ये लोग सिर्फ अपने फायदे के लिए मुझे और तमाम कश्मीर के नौजवानो को इस्तेमाल कर रहे है | कसमीर की आजादी के नाम पर उन्हे गुमराह कर रहे है | अख्तर ने कहा |

लेकिन अल्लाह की कसम अब मै ऐसा नहीं होने दूंगा सर | मै इनकी हकीकत हर उस नौजवान को बताऊंगा जो महज पाँच सौ रुपया के लिए अपना जमीर बेचकर अपने ही देश से गद्दारी कर रहे है और अपने ही भाइयो पर पत्थर बरसा रहे हैं |अख्तर ने अपने आँसुओ को पोछते हुये कहा |

शाबाश मेरे बच्चे उस ऑफिसर ने अखतर को अपने सिने से लगते हुये कहा – मै बहुत खुश हूँ की आज तुम एक सच्चे हिंदुस्तानी बन गए, तुम्हारे आंखो से गलतफहमी की पट्टी उतर गई| चलो अब काफी देर हो रही है | फिर उस ओफीसर पकड़े गए, घायल और मारे गए आतंकियो की डेड बॉडी सबकी लिस्ट बनाकर और सबका फोटो खींचवाकर सेना की गाड़ियो मे लदवाया और अखतर को लेकर वहा से निकल गया |

थाने मे अपनी माँ को देखते ही अख्तर दौड़ता हुआ उससे लिपट गया और रोने लगा | रो मत मेरे बेटे तू जिंदा वापस आ गया ये देखकर मै काफी खुश हु... रज़िया ने अपने बेटे को अपने सिने से लगाकर रोते हुये कहा | उससे भी बड़ी खुशी मुझे तेरी बहादुरीऔर तेरे हिन्दुस्तानी बनने पर है | आज तू सच्चा हिन्दुस्तानी मुसलमान और मेरा लायक बेटा बनकर लौटा है | मुझे तुझपर गर्व है | रज़िया ने बड़े गर्व से कहा | एक सच्चा मुसलमान अपना सिर कटा सकता है मगर किसी डर या लालच मे अपने इमान को नहीं बेच सकता |अपने देश के दुश्मनों के साथ समझौता कर के गद्दारअम्मी तुम हमेसा ठीक कहती थी ये आतंकी किसी के नही है और नहीं इनका कोई ईमान धर्म है इनको हमारे कश्मीर की भी कोई फिक्र नहीं इन्हे सिर्फ अपने फायदे से मतलब है | अम्मी मै सचमुच भटक गया था और अपने ही देश का गुनहगार बन गया था | अम्मी अब मै अपनी दो माउस सेना के ऑफिसर का नाम था दीपक राणा | दीपक राणा ने अख्तर की पढ़ाई लिखाई और ट्रेनिंग मे पूरी मदद किया | सरकार से उसके गुनाहो के लिए राहत दिलवाई | उसे एक ईमानदार और जाबांज सेना का ऑफिसर बनाया | अखतर ने सैकड़ो भटके हुये नौजवानो को पत्थर बाजी करने से रोका और उन्हे सही रास्ते पर लाया | उन्हे हर सरकारी योजनो का लाभ दिलवाया ताकि उन्हे और उनके परिवार को किसी बात की कमी नहो| कई लड़को को उसने फौज मे भी भर्ती करवाया | खेल - कूद, उसके इस प्रयास से सैकड़ो बेरोजगार नौजवान आतंकी बनने से बच गए | अख्तर और दीपक राणा ने दर्जनो आतंकियो को मौत के घाट उतार दिया। पाँच सौ रुपए की लालच के पत्थर बाजी का धंधा उन दोनों ने बंद करवा कर भटके नौजवानो को सरकार की मदद से विकाश कि मुख्य धारा से जोड़ दिया |

गीत, साहित्य, कला, अभिनय और अन्य कई क्षेत्रो मे उसने नौजवानो को सरकर की मदद से जोड़ा ताकि उनकी प्र्तिभा को प्रोत्साहन मिल सके और उनकी बेरोजगारी दूर हो सके |



कहानी लघुकथा रचना

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