Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
जय " आनंद " !
जय " आनंद " !
★★★★★

© Neha Rawat

Drama Inspirational Tragedy

6 Minutes   14.6K    34


Content Ranking

सपने ? कुछ परिचित-सा शब्द लगता है ना ? क्या ? परिचित नहीं हैं ?तो माफ़ करना जनाब फ़िर तो आप आदमी नहीं हैं। अरे ! अरे ! ठहरिये ! मेरा मतलब है कि जिस इंसान का कोई सपना ही ना हो वो जीवित कैसे रह सकता है , वो तो फ़िर एक बिन कफ़न की लाश हुई , वो भी चलती-फ़िरती लाश , खाती-पीती लाश , सबकुछ देखती-समझती लाश , पर आख़िर ठहरी लाश ही ! गौर ज़रा अगर बीती बातों पर लाया जाए तो आपको याद होगा कि हमारे ऐ.पी.जे अब्दुल कलाम सर कहा करते थे,"सपने वो नहीं जो आप नींद में आँख बंद करके देखतें हैं , बल्कि सपने वो हैं जो आपको सोने ही ना दें , खुली आँखों से देखा हुआ ! ये बात बताकर मैं आपको अपनी रटने की क्षमता का एहसास नहीं दिला रहीं हूँ और ना ही कोई शेखी़ बख़ार रही हूँ । बस आपको सीधा-सीधा मुद्दे पे ला रही हूँ ।तो जिंदगी को सिरियसली लेने का दौर ग्यारहवी से शुरू हुआ और पर्दा कुछ इस तरह उठा-

ग्यारहवीं में जब विषय चुन्ने की बारी आई तो अपून ने सोच लिया था कि अपून को ऐंक्टिंग करने का है । एकदम टीवी में जैसा करते हैं ना , उसी के माफ़िक । तो ये निर्णय हो गया था कि जिंदगी के मैदान में ना तो अपून साईंस से खेलेगी और ना ही कॉमर्स से बल्कि अपून आर्टस से किसी तरह काम चला लेगी । पर तनाव के पल कुछ इस तरह गुज़रे की आज्ञातवश टकरा ही गई एक कॉमर्स नाम की बला से । अपून की लाईफ़ क्लियर थी की चाहे कोई भी विषय ले लो , ऐक्टिंग कौनो पे डिपेंड़ ना ही करे है , ऊको तो होनी का ही पड़ी है ! सिलसिला यूँ चला और अपून को लगने लगा की अपून की जिंदगी एक फ़िल्म की तरह हो गई है जो अठारह साल होने को आए हैं पर किसी तरह रिलीज़ नहीं हो पाई । किसी कारणवश अटकी ही पड़ी है । चलती ही नाहीं है ससुरी ! अब इन बातों से आपको लगभग भनक लग ही गई होगी कि मेरा भी सपना था माने की अभी भी है - " एक्टिंग करने का " !

हालांकि मूवीज़ मैं ज़्यादा देखा नहीं करती थी , लेकिन हाँ गाने ज़रूर सुना करती थी और तब जिस तरह कलाकार अपनी बात या यूँ कहें कि अपने जज़्बात अपने ऐक्सप्रेशन से कहते थे , या यूँ कह लें कि गाने के मुताबिक वो जिस तरह ऐक्ट करते थे , हाँ जी वही ! वही ! बिल्कुल वही चीज़ हमें पसंद आ गई । और जो कुछ भी मूवीज़ मैंने देखी थी वो थी सोने पे सुहागा । अब अगर इससे पहले से मेरा अभिनय करने का मन रहा हो तो कुछ कह नहीं सकते चूंकि मुझे तो फ़िलहाल बस यही याद है । और अगर आपको कहीं बुरा लगा हो तो खेद भी । खै़र मैं जब कॉलेज पहुँची तो इक ड्रामिटिक सोसाईटी ज्वाइन करने की सोची और इसी तरह बारी आ गई सोसाईटी ज्वाइन करने के लिए आॉडिशन देने की । मैं तो छत पर जाकर सन्नी डियोल का दामिनी वाला डॉयलोग - " तारिख़ पे तारिख़ " रटने लगी और अगली सुबह पहुँच गई सोसायटी के रूम के बाहर बहुत ज़यादा नरवसनेस के साथ । इतना डर था कि दम निकल जाए !

मेहनत जो की तो रंग लानी ही थी । बस सिलेक्ट हो गई अपून । बस इतना याद है कि उस दिन बहुत खुश थी मैं और एक महिने के अंदर उसी कॉलेज में हमारा प्ले हुआ । उसमें मैं चाची बनी हुई थी । एक ख़ास दोस्त आज भी चाची कहकर मज़ाक भरी चुटकी भर ही लेता है । फ़िर उस कॉलेज से नाम कटवाकर मैंने दूसरे कॉलेज में दाख़िला करवा लिया । यहाँ भी एक अच्छी ड्रामिटिक सोसायटी थी पर यहाँ मुझे उस सोसायटी के बारे में जानने के लिए कई लोगों से पूछताछ करनी पड़ी । एक-दो दिन हुए थे आए हुऐ इस कॉलेज में , पर ससुरा किसी को सोसायटी का कुछ मालूम नहीं । जान-पहचान तो किसी से थी नहीं , पर यूँही किसी से भी पूछ लिया करती , " आपको पता है यहाँ की ड्रामिटिक सोसायटी के बारे में " ? यह सवालात चलते रहे और अगले दिन किसी से पूछतांछ कर नम्बर मिल गया , इक सोसायटी के बंदे का और पहुँच गई मैं कॉलेज के पीछे वाले मैदान में जहाँ प्रेक्टिस हुआ करती थी । मेरा अॉडिशन नहीं लिया गया क्योंकि वो कब के हो चुके थे । अब इन को कोई क्या बताए कि मैंने ऐडमिशन ही बाद में किया और लोगों से पूछते-पूछते ही इतनी मुश्किल से सोसायटी पकड़ में आई है । फ़िर उन्होनें मुझे "टैम्परिरि बेसिस" में रख लिया । मेरी कश्ती इस ड्रामा सोसायटी में कबतक टिकेगी ये पूरा का पूरा निर्भर करता था मेरी पर्फोरमेंस पे । वो लोग मुझे ओबज़र्व करने वाले थे ।

ख़ैर दुख़द कहानी का अंत जितनी जल्दी हो उतना अच्छा !

मैं वहाँ से निकालदी गई ! उन्होंनें मुझे बुलाकर कहा , " आप डिसकस नहीं करती , इंटरेक्ट नहीं करती " , " हमने आपको ओबज़र्व किया " , " वी थींक वी कांट कंटीनियू विद यू " ।

मन में हमेशा से डर था, सबसे खुल पाई भी नहीं थी । यहाँ आकर दिमाग - विचार बहुत खुले और कहीं न कहीं मैं डर पर काबू कर नहीं पाई । " हैज़िटेशन ससुरी निगल गई हमका " ! बस क्या था मैं उस धक्के को छुपाती एक स्माईल के साथ सबसे हाथ मिलाकर चल दी । उनके चेहरे से लगा शायद उन्हें भी ये तरीका अच्छा लगा । और फ़िर हुआ असली धमाका ! घर जाते वक्त मेरी आँखें पिघल रही थीं उनमे बार-बार पानी आ जाता और मैं लोगों को अपने करीब देख उन्हें पोंछती जाती ।

थक गए का ? अभी बहुत कुछ शेष है भाई ! कबतक छोटी स्क्रिन का मजा लोगे ? कभी थियेटर भी जाओ यार!

तो इस तरह से कई किरदार फ़िल्म के माफ़िक जिंदगी में आए । अपना-अपना हिस्सा लेकर ! अपने अपने डॉयलोग लेकर ! अपनी-अपनी लाईने बोलकर सब जिंदगी के स्टेज से " एग्ज़िट " करते गए ।

अब मैं बिल्कुल ख़ाली हो चुकी थी - तन ! मन ! धन ! से । कुछ करने को था ही नहीं । सोसायटी से भी हाथ धोना पड़ा । लेकिन महीनों बाद ही एक करीबी मित्र से ख़बर मिली । हाँ जनाब वही जो आपको मैंने ऊपर बताया था कि चाची के नाम से चिढ़ावत है ससुरा ! ख़बर ये थी की एक भईया थियेटर ग्रुप खोलना चाहते हैं और बच़्चे अॉडिशन के लिए आ सकते हैं । बस फ़िर क्या था मैं उड़ती फड़फड़ाती पहुँच गई एक डी.यू. के ही कॉलेज ( नाम गुप्त ऐंवी रखा है ) । भईया के साथ उनके कुछ साथी भी थे जो उनके ग्रुप में शामिल भी थे । उसी दिन उनका नाटक था उसी कॉलेज में । वाह क्या नाटक था , मैं तो ऐक्टिंग देखकर हक्की-बक्की रह गई । जो भी था कमाल था । तब से आजतक इसी ग्रुप के साथ हूँ , एक साल से ऊपर होने को आया है । बस ग्रुप के साथ कई बेहतरीन नाटक किये । बहुत सीखा और बहुत सीखने को शेष है । अभी इससे आगे क्या कहूँ ? यही पड़ाव चल रहा है फ़िलहाल जिंदगी का । डर और झिझक कहीं अभी भी है पर कोशिश पूरी तरह से जारी है । बस इतना जानती हूँ कि सपने देखो लाला क्योंकि सपने देखोगे तो मेहनत-कोशिश करोगे । याद रखना सबसे ख़तरनाक है - " सपनों का मर जाना ! " चलो अब तो किरदार भी अपना काम कर गए , अब तो बारी है दर्शकों की । जाने कौनों को ये जिंदगी का नाटक पसंद आए कि नाहीं ! नवाज़ुद्दिन अपनी फ़िल्म "माँझी द मांउटन मैन" में बोलत रहें - " शानदार ! जबरदस्त ! जिंदाबाद ! " अरे ऊ आदमी पहाड़ ही हिला दिया और तुम होके छोटी-छोटी परेशानी से हिल जाओ हो ! बबुआ " चिल्लेक्स कोंसनट्रेट " !

और राजेश खन्ना तो " आनंद " फ़िल्म में कहके ही गए हैं - " बाबूमोशाय जिंदगी बड़ी होना का चाही , लम्बी नाहीं !

जय " आनंद " !!!!!!

story dream conquer happiness life

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..