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ईमान
ईमान
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© विनय मिश्रा

Drama Inspirational

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शॉप के कैश काउंटर पर ड्यूटी बदलने का वक़्त था। मैं पैसे मिला रहा था।

"क्या हुआ अंकित ? परेशान क्यूँ है।"

"देख ना यार कुछ समझ नहीं आ रहा, आज से पहले तो कभी ऐसा नहीं हुआ। पन्द्रह सौ पचास रुपये कम हो रहे हैं।"

"ऐसे कैसे ? ठीक से चेक कर ! ये तो हम जैसों के लिए बहुत बड़ी रकम है।"

"कब से चेक कर रहा हूँ पर समझ नहीं आ रहा। मेरे लिए पूरे हफ्ते की कमाई है ये। मेरा बहुत नुकसान हो जाएगा।"

"अंकित ! किसी को ज्यादा तो नहीं लौटा दिया तुमने ?"

"याद नहीं आ रहा ! ड्यूटी बदलने का भी टाइम हो गया है। मेरे पास जो पैसे हैं वो भी मिला दूँ तो पूरे नहीं हो रहे। घर में कुछ सामान भी ले जाना था।"

"यार ये तो बहुत टेंशन वाली बात हो गई।"

हम परेशान हो अभी बातें ही कर रहे थे कि एक लगभग 25 साल का लड़का आया और..

"जी मैंने आपको 500 का नोट दिया था आपने 2000 का समझ कर सामान के साथ मुझे 1550 रुपये लौटा दिया था।"

मैं हैरान हो उसे देख रहा था, मेरा मन उस से पूछना चाहता था कि आखिर क्या सोच कर वो इतनी देर बाद पैसे लौटाने आया। शायद उसने मेरा मन पढ़ लिया..

"लौटना नहीं चाहता था..बल्कि मुझे मिला तो मैं खुशी से इसका बीयर पीने वाला था, इंजॉय करने वाला था।"

"तो फिर ?"

"वो जो बीयर दे रहा था ना उसके हाथ से बीयर छूट कर टूट गयी। उसका मालिक उसको बोला की बीयर के पैसे तू देगा भले ही तेरे घर आज चूल्हा ना जले।"

मैं सिर्फ उसको देखे जा रहा था।

"ऐसे मत देख भाई 150 उसको भी दे दिया है और ये बाकी के 1400 है... तुम दोनों चुल्हा जला लो।"

शराब पर आज ईमानदारी का नशा भारी पड़ गया।

ईमानदार नशा चुल्हा

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