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वो अजनबी अपना - सा
वो अजनबी अपना - सा
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© मधु त्रिवेदी

Drama

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ये कहानी है लखनऊ में रहने वाली एक लड़की प्रतिभा की । प्रतिभा की खुशी का आज कोई ठिकाना नहीं है क्योंकि उसे दिल्ली में शिक्षिका की नौकरी के इन्टरव्यू के लिए बुलाया गया है । क्योंकि इन्टरव्यू सुबह 9 बजे से है ; इसलिए प्रतिभा ने सोचा कि वह रात को ही दिल्ली चली जाएगी और अपने चाचा जी के यहाँ रुक जाएगी। प्रतिभा के चाचा जी दिल्ली में रहते थे। प्रतिभा ने एक छोटे-से बैग में इन्टरव्यू के लिए सारे सर्टिफिकेट रख लिए। प्रतिभा दिल्ली जाने वाली ट्रेन में बैठ गयी । ट्रेन में ज्यादा भीड़ नहीं थी। आसानी से सीट मिल गई। रात का समय था इसलिए बैठे-बैठे कब प्रतिभा को नींद आ गई कुछ पता ही नहीं चला। रास्ते में जब प्रतिभा की आँखे खुली तो उसका बैग उसके पास नहीं था। जल्द ही वह समझ गयी कि उसका सामान चोरी हो गया है। प्रतिभा को कुछ समझ नहीं आ रहा था की वह अब क्या करे । वापस लखनऊ लौट जाएँ या फिर दिल्ली जायें । लेकिन वापस कैसे जायें उसके पास टिकट के लिए पैसे नहीं थे। अंततः प्रतिभा ने दिल्ली जाना ही उचित समझा। उसके चाचा जी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उसका इन्तजार कर रहे थे। स्टेशन पर पहुंचते ही प्रतिभा ने सारी घटना चाचा जी को बताया। चाचा जी को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या किया जाए। अंत में चाचा जी ने फैसला किया कि पुलिस स्टेशन में सामान चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई जाए। पर क्या सामान समय पर मिल पायेगा ? ये विचार उनके मन में बार-बार आ रहा था। सर्टिफिकेट न होने के कारण प्रतिभा इन्टरव्यू नहीं दे पाईं। पर सबसे बड़ी समस्या यह थी कि सारे सर्टिफिकेट दुबारा कैसे प्राप्त किए जायें। प्रतिभा के पास उन सर्टिफिकेट की फोटोकाॅपी भी नहीं थी। जिससे वह उन सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई कर सके ।

इधर मनोहर नाम के युवक को ,जो अपनी बीमार माँ के ईलाज के लिए दिल्ली आया था को एक बैग मिला। जिसमें से कुछ सर्टिफिकेट बाहर निकले हुए थे। मनोहर को यह समझते देर नहीं लगी कि जरुर ये बैग खो गया होगा क्योंकि कोई अपने सर्टिफिकेट क्यों फेंकेगा। मनोहर ने तय किया कि ये सर्टिफिकेट जिसके हैं वह उसे लौटा कर रहेगा। पर वह अपनी माँ के इलाज में इतना उलझ गया कि वो सर्टिफिकेट लौटाना भूल गया।

उधर प्रतिभा अपने घर आगरा लौट गई थी। एक दिन अचानक उसे याद आया कि उसने एक बायोडाटा बनाया था जिसकी एक प्रति उसने घर पर रख ली थी । उसमें उसके सारे सर्टिफिकेट के सम्बन्ध में विवरण लिखा था। उसने तय किया कि इसके जरिए वह अपने सारे सर्टिफिकेट दुबारा प्राप्त कर लेगी।

इधर मनोहर की माँ अब ठीक थी। मनोहर का ध्यान उस बैग की तरफ गया। मनोहर को बैग की छानबीन करने पर प्रतिभा का फोन नम्बर मिला। प्रतिभा विश्वविद्यालय विद्यालय जाने के लिए घर से निकलने वाली ही थी फोन की घंटी बजी। प्रतिभा ने फोन उठाया। उसकी खुशी का आज कोई ठिकाना नहीं था। क्योंकि वो फोन किसी और का नहीं मनोहर का था वह खुश थी क्योंकि उसके सर्टिफिकेट किसी सुरक्षित हाथों में थे । पर समस्या थी कि मनोहर से सर्टिफिकेट वह कैसे ले । प्रतिभा ने तय किया कि वह दिल्ली जाकर सर्टिफिकेट ले लेगी। दोनों ने मिलने का समय तय कर लिया । मनोहर ने प्रतिभा को उसके सर्टिफिकेट लौटा दिये। प्रतिभा ने भी मनोहर का आभार व्यक्त किया।

दोस्तों अगर आपको किसी का जरुरी कागजात कहीं मिलता है तो कृपया उसे लौटाने की कोशिश करें क्योंकि ये किसी की जिंदगी के जुड़ा है। दोस्तों आप अपने सारे जरुरी कागजात की एक प्रति सुरक्षित घर पर रखें ताकि अगर कभी खो जाये तो उसके जरिए दूसरा प्राप्त कर सके क्योंकि हर कोई मनोहर नहीं है।

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