Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
तरसे है आज...
तरसे है आज...
★★★★★

© Aniruddha Sastikar

Abstract

1 Minutes   1.6K    20


Content Ranking

 

आज 
बच्चो की मुक्त और निष्कपट
मुस्कान देख...
आ गए याद, 

बचपन के वो चिंता मुक्त दिन...
वो -
दोस्तों संग पढना-खेलना,
भाई-बहनों साथ बैठ -
खाना-पीना,
गाना-बजाना,
लड़ना-मनाना,
बाते बनाना...

याद, उन दिनों की महसूस कराती है
कि कितने अच्छे थे,
वो ....

आज 
पैसो में...
दिखावे में...
अपने आप में...
हुए इतने व्यस्त
कि,
भाई-दोस्त के साथ,
दो घडी बात करने का;
न वक्त है, ना ही झुकाव.

वक्त नहीं है आज -
रूठने का...
मनाने का...
गाने का...
सुनने का...
थम से गए हम...
थम सी गयी आवाज़...

आज 
साथ बैठ कर 
एक निवाला प्यार का,
खाने को तरस गए है,
हम...

 

 

poem hindi poetry anirudh

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..