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आप बहुत लकी हैं…..
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© Shanti Prakash

Drama

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मेरे बचपन का एक दोस्त है, जिसे हम तब राजू बोलते थे। राजू के दो लड़कियाँ और एक बेटा है। बड़ी लड़की एमबीए कर रही है।लड़का इंजीनियरिंग कर स्कूल में मैथमेटिक्स का टीचर बन गया है और साथ-साथ अपने कोचिंग इंस्टिट्यूट खोल लिएहैं। छोटी लड़की ग्यारहवीं क्लास में है। पूरा परिवार परंपराओं से बंधा और संस्कारी है । राजू की पत्नी पूजा पाठ में अपना काफी समय देती है।

31 दिसंबर शाम के समय नव वर्ष की शुभकामनाएं के साथ राजू बोला, भाई, बेटे की शादी की बात चल रही है , लड़की वालों से मीटिंग रखी है , थोड़ा टाइम निकाल कर आ जाओ, भाभी को भी साथ ले आना । शाम को एक लोकल होटल में डिनर रखा है वहीं आपसी मेल-जोल हो जाएगा और बात आगे चलाएंगे । वैसे तो बेटे ने अपनी पसंद की लड़की ढूंढ ही रखी है हमें तो मात्र औपचारिकता और परंपराओं का निर्वाह करना है । मैंने कहा ठीक है मैं टाइम से पहुंच जाऊंगा ।

7:00 बजे के करीब निर्धारित समय पर मैं अपनी पत्नी के साथ और कुछ मीठा लेकर बताए गए होटल पर पहुंच गया । राजू और उसका बेटा राजेंद्र दोनों बाहर ही खड़े थे । चलते चलते बात होने लगी अंदर ही बैठते हैं । बात करते-करते हम लोग निर्धारित टेबल पर पहुंचे । लड़की वाले एवं लड़की पहले से मौजूद थे । नमस्कार बहन जी, नमस्कार भाई साहब, और लड़की को भी बेटा पुकार कर , ठीक हो बेटा । सब लोग अपनी अपनी जगह पर जा बैठे । हां जी क्या लेंगे..सूप हो जाए.., इतने में राजू की आवाज .....आई भाई साहब- भाई साहब यह प्योर वेज रेस्टोरेंट हैं ना ।

हां जी, हां जी लड़की के फादर बोले - हमें पता है आप लोग वेजिटेरियन है, मीट मछली नहीं खाते हैं। हमने इस बात का पूरा ध्यान रखा है, जगह निर्धारित करते वक्त । आपकी होने वाली बेटी ने हमें सब कुछ बता रखा है। आप लोग शुद्ध शाकाहारी हैं, बस लहुसन , प्याज़ ही स्वाद में इस्तेमाल होता है खाने में आप के यहाँ मैं और राजू दोनों आपस में बातचीत कर ही रहे थे कि इतने में उनकी छोटी बेटी दिशा अपने पापा से बोली पापा हटो यहां से मुझे अंकल से बात करनी है ।

मैंने कहा…. आओ बेटा क्या बात है ? क्या ..क्या पूछना है ?

दिशा बोली.... आपके पास बैठना है । आपसे बात करनी है.. । मैं आपसे एक बात पूछूं…?

मैंने कहा.. हाँ पूछो ना, क्या बात है... पढ़ाई के बारे में कुछ बात है क्या ? क्या क्या पढ़ रही हो आजकल ?

मैं तो आजकल भगवत गीता पढ़ रही हूँ ।

मैंने थोड़ा हैरानी से उसकी तरफ देखा …और पूछ बैठा, क्यों क्या बात है…?

कुछ नहीं मुझे लिटरेचर में इंटरेस्ट है….

मैंने कहा आगे क्या करने का इरादा है… पापा की तरह बिजनेस करोगी या या तुम भी एमबीए करोगी..?

दिशा बोली नहीं ऐसा कुछ नहीं मैं तो इंग्लिश ऑनर्स करुँगी।

मैंने पूछा.. अपनी सब … छोड़ कर इंग्लिश लिटरेचर करोगी…!

अच्छा तुमने मुझसे क्या पूछना है…..

दिशा बोली मेरी दो बातें हैं… आप से ….पहले तो एक बात यह बताओ… आपको शादी से पहले कि जिंदगी की क्या घटना सबसे अच्छी लगी और याद है..

मैं उसके सवाल से थोड़ा चौंका । मैंने कहा.. हां.. मुझे आज तक याद है; मैं अपने घर के पिछले आंगन में चारपाई पर बैठा पढ़ रहा था । हमारा सेकंड शिफ्ट का स्कूल था । कोई 11- 11:30 का वक्त होगा। तुम्हारे पापा आए और बोले, भुवो …., मैंने पूछा... क्या बात है ! तुम्हारे पापा बोले चल पिक्चर चलते हैं । मैंने कहा यार मैं कल तो देख कर आया हूं और पैसे भी नहीं है । उन दिनों 10 आने की टिकट होती थी । मेरे पास बस इतने ही पैसे थे । पत्ता है पिक्चर कौन सी थी…. लव इन टोक्यो । तेरे पापा बहुत ज़िद करने लगे ...।उस वक़्त मेरे पापा भी मेरे पास ही धूप में बैठे अपना कुछ काम कर रहे थे ।

मैंने अचानक बोला ...पापा मैं राजू के साथ जा रहा हूँ वहीं से स्कूल चला जाऊंगा ।

मैंने सोचा पापा को तो बेवकूफ बना लिया, चलो पिक्चर ही चलते हैं । मैं और तुम्हारे पापा दोनों पिक्चर हॉल पहुंचे । उन दिनों शो का टाइमिंग 3 -6 हुआ करता था । स्कूल भी 6:00 बजे छूटता था । हम लोग 6:30- 7.00 घर पहुंचेते थे । स्कीम पक्की -परफेक्ट थी । स्कूल बंक करेंगे । पिक्चर से भी उसी समय घर पहुंच जाएंगे ।

इतने में तेरे पापा बोले यार 10 आने वाली टिकट तो खत्म हो गई, डेढ़ रुपए की टिकट है. हम दोनों के पास कुल मिलाकर ढाई रुपए हैं ...तो टिकट तो एक ही आएगी । तुमने तो देख रखी है .. मैं देख लेता हूँ ।

मैंने कहा ठीक है।

अब मैं क्या करता.... स्कूल भी नहीं जा सकता था और घर भी नहीं जा सकता था । वहीं बैठा बैठा इंतजार करता रहा । पिक्चर खत्म हुई 6:00 बजे और तुम्हारे पापा बाहर आए और बोले चलो चलते हैं ।

पता है जले पे नमक छिड़कना पता है किसे कहते हैं बेटा ….?तेरे पापा बोले .... यार बहुत मजेदार पिक्चर है ।

जिस रास्ते से पिक्चर हॉल से घर की तरफ जा रहे थे उसी समय हमारे क्लास टीचर और दो-तीन और टीचर्स अपनी-अपनी साइकल्स से स्कूल के बाद अपने अपने घर जा रहे थे । आमने सामने से हमारी आंखें मिली । वह अपने रास्ते चल दिए और हम दोनों अपने अपने रास्ते ।

मैं घर के पास पहुँचा ही था कि मेरी बड़ी बहन जोर से चिल्लाई बू... बू,

उसे घबराहट में देख मैंने पूछा क्या हुआ..?

वो बोली तू घर चल… पापा बताएंगे तेरे को, क्या हुआ… कहाँ गया था ।

मैंने कहा यार कहीं नहीं….वो बोले जा रही थी, आज तेरी अच्छी तरीके से होगी…..। घर पहुंचते ही...

पापा बोले कहाँ गया था…? स्कूल से फोन आया था तू स्कूल नहीं गया था …

मैंने कहा… इतने में जोर से एक झापड़ पड़ा और सच मुँह से निकल गया....पापा .. मैं राजू के साथ गया था ।

कहाँ गया था, पिक्चर गया था …?

नहीं मेरे पास तो पैसे नहीं थे । उसने पिक्चर देखी । मैं तो बाहर ही बैठा इंतजार करता रहा ..

क्यों.... पापा बोले

मेरे पास अपने पैसे नहीं थे ।उसके पास पैसे थे उसने पिक्चर देख ली।

पापा बोले तू तो निरा पागल है… स्कूल भी नहीं गया और पिक्चर भी नहीं देखी… टाइम भी खराब किया । तेरे से ज्यादा मूर्ख कोई हो सकता है क्या...और यह कहते कहते वह बाहर निकल गए...साइंस पढ़े गा बेटा। लाड़ साह पता नहीं कब समझेंगे.... पहला भरोसा अपने समर्थ पर ही करना चाहिए । लाड-साहब अभी जानते नहीं ... उधहार खाते हुए पता नहीं चलता..... कितना जल्दी समर्थ से ज्यादा बढ़ जाता है

अगले दिन तैयार होकर.. बेटा.... हम स्कूल गए । हमारे क्लास टीचर थे उनका नाम ...., शार्ट में उन्हें सोहन सर जी कह सकते हैं । अटिन्डन्स लगाते लगाते बोले रोल नंबर 24 और जैसे जैसे ही मैं खड़ा हुआ यस सर बोलकर बैठने वाला था, सर बोले,.... खड़े रहो । कल स्कूल क्यों नहीं आए ?

मैंने कहा.... कल मम्मी की तबीयत खराब थी, मम्मी हस्पताल गई थी । जब वह देर तक नहीं आई तो, मैं मम्मी को देखने के लिए उनके पीछे हॉस्पिटल चला गया था, इसलिए स्कूल नहीं आया था । आपने मेरे घर में कंप्लेंट कर दी । मेरे को घर पर भी बहुत डांट पड़ी । मैं तो मम्मी को देखने के लिए हॉस्पिटल ही गया था ।

दिशा बेटा.. मुझे आज भी याद है, मेरी तरफ देखते हुए …क्लास टीचर जी की वो आँखें , उस वक़्त से आज तक लगता है, जैसे वो कह रहे हों; थोड़ी तो शर्म करो । मेरे सर बोले बेटा..माँ बाप की इतनी सेवा करते हो तो थोड़ी सी तो उनको भी बता दिया करो..।

इतने में देखा, दिशा मेरी तरफ मुस्कुरा कर देख रही थी और मुस्कराते हुए बोली .... अंकल…. आप… आप तो बड़े शरारती थे, है… ना ।

मैंने कहा ....था तो सही । और आप के पापा ....

फिर दिशा बोली अंकल शादी के बाद की आपको कोई खास बात याद आती हो....

मैंने कहा तुम क्यों गड़े मुर्दे उखाड़ रही हो.। मुझे अपनी माँ बहुत याद आती है । जब शादी हुई तो माँ बोली...... बेटा शादी तो तूने अपनी मनपसंद लड़की से कर ली.. ठीक है ।

पर अब मेरी एक बात मानना ।

मम्मी बोलो...... क्या बात है ;

माँ बोली बेटा.. हो सके तो जिंदगी में घरवाली की कमाई से अपना घर मत चलाना, कोई मजबूरी हो तो बात अलग है । दोनों मिलकर घर चला सकते हो।

पर एक बात मेरी याद रखना और मानना :- बीवी के कमाई से कोई ऐब... या ऐसा काम मत करना जिससे तुम्हें जन्म देने वाली माँ कलंकित हो । यह बात मुझे हर पल याद रहती है और लगता है माँ सदैव साथ रहती है ।

यह सुन दिशा बोली ... अंकल आप बहुत लकी हैं जो आप को अपने माँ -बाप की बात समझ आ गई ।




















बचपन दोस्त घर परिवार

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