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 दुकान
दुकान
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© Sandhya Tiwari

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> सडक के दांयी ओर पूजा जनरल स्टोर था और बांयी ओर गुप्ता प्रोवीजन स्टोर था। दोनो दुकाने आमने सामने थी।
>>
>> पूजा जनरल स्टोर गोरी चिट्टी नखरीली अदाओं से लबरेज लगभग बीस पच्चीस बर्ष की पूजा खुद सम्भालती थी।
>>
>> बांये अंग से बेकार पक्षाघात से पीडित गुप्ता जी अपनी दस बर्षीय बेटी तनु के साथ गुप्ता प्रोविजन स्टोर सम्भालते थे।
>>
>> जहाँ गुप्ता जी की दुकान में इक्का दुक्का ग्राहक आते बहीं पूजा को ग्राहकों के चलते सांस लेने की फुर्सत नही मिलती।
>>
>> तनु ने इस बात को लेकर कितनी ही बार अपने पापा से शिकायत की लेकिन गुप्ता जी वही घिसा-पिटा जबाव देते ; " जितना किस्मत में होगा उतना ही तो मिलेगा।"
>>         तनु इस जबाव को कभी आत्मसात् नहीं कर पाती ।
>>          धीरे धीरे वह सामने वाली पूजा की नकल करने लगी ।
>> वह उसी के समान दुकान सजाती । सुबह शाम पूजा करती । ग्राहकों से भी बड़ी तमीज़ से बात करती।
>> लेकिन ग्राहक फिर भी नहीं आता  ।
>>                परेशान तनु ने ठान लिया कि आज वह पूजा से दुकान अच्छी चलने का राज जान कर ही रहेगी ।
>>
>>   जेठ दोपहर ग्राहको की आवक कुछ कम थी ।
>> अच्छा मौका जान तनु पूजा के पास पहुँची और बोली ; " दीदी एक बात बताओ तुम्हारी दुकान की तरह हमारी दुकान क्यों नही चलती ?"
>> पूजा ने तनु को ऊपर से नीचे तक भेदक दृष्टि से देखा , परखा, फिर एक आँख दबा कर हँस पडी और बोली ; "बस चार पाँच साल रुक जा तेरी दुकान भी चलेगी।"

dukaan pareshan jawaab sawaal

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