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कटी उंगलियां भाग 1
कटी उंगलियां भाग 1
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© Mahesh Dube

Thriller

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कटी उंगलियाँ भाग 1

                   मोहित ने तेज अलार्म की आवाज को महसूस किया और गहरी नींद में कसमसाने लगा। अभी उसका उठने का बिलकुल मूड नहीं था पर क्या करता? मजबूरी थी! उसने नींद में ही हाथ बढ़ाकर जोरदार चपत अलार्म घड़ी के सर पर मारी ताकि वह बंद हो जाए लेकिन वार ओछा पड़ा और घड़ी की आवाज तो बंद हुई नहीं उलटे वह चक्कर खाती हुई नीचे गिरी और उसका कांच फूट गया। 'ओये तेरी' चिल्लाता हुआ मोहित उछलकर उठ बैठा और लपक कर घड़ी उठाने बढ़ा जो झटके से पलंग के नीचे जा पहुंची थी। लेकिन पलंग के नीचे झुकते ही मोहित ने जो देखा उसने उसके होश फाख्ता कर दिए। वहाँ खून में लिथड़ा हुआ एक अखबार का छोटा सा पैकेट पड़ा हुआ था, जिसमें वह जानता था कि क्या होगा! 'ओह माय गॉड' अपना सर थामकर मोहित जोर से चिल्लाया, नॉट अगेन! नॉट अगेन! रचना उसकी चिल्लाहट सुनकर झटके से बाथरूम से बाहर निकल आई। वो अभी ड्रायर से बाल सुखा रही थी। आधे बाल सूखे और आधे गीले होने की वजह से वो अजीब लग रही थी उसके सूखे हुए बाल हवा में लहरा रहे थे और गीले वाले चेहरे और बदन पर चिपके हुए थे। उसने दौड़कर मोहित को बाहों में भर लिया और हड़बड़ाकर पूछने लगी कि क्या हुआ? मोहित अब चेहरा हाथों में छुपाये रो रहा था। थोड़ी देर सुबकने के बाद जब रचना ने जोर से झिंझोड़कर पूछा तब उसने एक बार कातर निगाहों से रचना की ओर देखा और थके हुए भाव से अपनी तर्जनी उस अखबारी पैकेट की ओर इंगित कर दी। पैकेट देखते ही रचना भी स्तब्ध हो गई। हे भगवान्! फिर शुरू? वो बुदबुदाई! 
मोहित फिर जोर-जोर से रोने लगा। रचना के भी होश खराब थे। तीन महीने बाद एक बार फिर जहरीले नाग ने अपना फन फैला लिया था। एक बार फिर मुर्दा कब्र फाड़कर बाहर निकल आया था। थोड़ी देर रोने के बाद मोहित ने कांपते हाथों से पैकेट उठाया और खोल दिया। रक्त रंजित तीन कटी हुई इंसानी उँगलियॉ उसके आगे गिर पड़ीं। मोहित फिर चेहरा हाथों में छुपा कर रोने लगा।

 

कहानी अभी जारी है ......

आगे क्या हुआ यह पढ़ने के लिए पढ़िए भाग 2

रहस्य कथा

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