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रानी आज़ाद हो गयी
रानी आज़ाद हो गयी
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© Yogesh Suhagwati Goyal

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सूरत की न्यू लाइट कोलोनी में ३ बेडरूम का घर हर सुख सुविधा से सुसज्जित था | घर में एक छोटा सा परिवार रहता था | परिवार के नाम पर डा. भगत देसाई, उनकी पत्नी रानी और बेटा समीर थे | डा. साहिब वहीँ पर राजकीय अस्पताल में कार्यरत थे | घर पर भी अच्छी प्रैक्टिस चलती थी | रानी गृहणी थी | बेटे और घर की देखभाल में व्यस्त रहती थी | ज़िन्दगी अच्छी चल रही थी | बेटा भी अपनी पढ़ाई लिखाई में अच्छा चल रहा था |

ज़िन्दगी तेज रफ़्तार से दौड़ रही थी | समीर का कालेज ख़त्म हुआ | आगे पढने के लिये वो अमेरिका चला गया | पढाई ख़त्म कर एक गुजराती लड़की से शादी कर ली और वहीँ केलिफोर्निया में बस गया | डा. भगत अब तक ५६ साल के हो चुके थे | एक दिन रानी को बाज़ार से कुछ समान लेना था | डा. साहिब के साथ कार में जाने के बजाय, उसने अपनी स्कूटी उठाई और निकल गई | एक घंटे में सारा काम ख़त्म हो गया | उस वक़्त शाम के करीब साढ़े छै बज रहे थे | सडक पर यातायात बहुत बढ़ गया था | रानी ने स्कूटी घुमाई और घर की तरफ लौट चली | अगली ट्रैफिक लाइट पर अचानक सिग्नल लाल हो गया | रानी तो रुक गई लेकिन पीछे दौड़ती कार ब्रेक नहीं लगा पाई | दुर्घटना इतनी भयानक थी कि दौड़ती कार सड़क पर गिरी रानी के घुटनों को कुचलती हुई निकल गई |

डा. भगत ने रानी के घुटनों का हर संभव इलाज करवाया लेकिन उसको खड़ा नहीं कर पाये | रानी हमेशा के लिए व्हील चेयर से बंध गयी | डा. साहिब का अस्पताल करीब ८ किलोमीटर दूर था | जरूरत में जल्दी से घर पहुंचना संभव नहीं था | यही सोचकर उन्होंने अपना न्यू लाइट कोलोनी वाला घर छोड़कर, अस्पताल के बहुत पास दूसरे घर में शिफ्ट कर लिया | काम वाली बाई सुबह सिर्फ १ घंटे के लिये आती थी | उसके अलावा, डा. साहिब ने एक और महिला “लीला” रानी की मदद के लिये रख ली | लीला सुबह ७ बजे से लेकर शाम ६ बजे तक घर पर ही रहती थी और रानी की देखभाल करती थी | अब डा. साहिब भी अपने काम के बीच एक दो बार घर के चक्कर लगा लेते थे | समीर भी अपने परिवार के साथ हर साल एक महीने के लिये माँ बाप के पास आकर रहता था |

भगतजी और समीर दोनों रानी को बहुत चाहते थे | दोनों ही अपनी हर संभव कोशिश में लगे रहते थे कि रानी को कोई तकलीफ ना हो | शुरू में तो सब ठीक ठाक सा ही रहा लेकिन डेढ़ दो साल बाद रानी को अन्दर ही अन्दर घुटन होने लगी | उसे महसूस होने लगा कि उसने अपने पति की ज़िन्दगी खराब कर दी है | समीर भी छुट्टियों में जब सूरत आता है तो उससे बंध कर रह जाता है | रानी को अपनी ज़िन्दगी से ग्लानी होने लगी थी |

रानी की दिनचर्या में बचपन से ही सुबह शाम ईश्वर की प्रार्थना शामिल थी | और वो, अभी भी चलती थी | हाँ इतना फर्क जरूर आ गया था, पहले कभी खड़े होकर और कभी जमीन पर बैठकर होती थी, आजकल व्हील चेयर पर बैठकर करती थी | पहले हमेशा अपने परिवार की खुशहाली की कामना करती थी, और आजकल सबसे पहले खुद को ज़िन्दगी के बंधन से मुक्त करने की प्रार्थना करती थी | रानी को लगता था, वो सबके ऊपर बोझ बन गई है | इसीलिए वो जीना नहीं चाहती थी |

एक दिन, डा. साहिब अस्पताल गये हुए थे, काम वाली बाई काम ख़त्म करके जा चुकी थी और लीला को रानी ने बाज़ार से सामान लाने भेजा था | रानी घर में बिल्कुल अकेली थी | वो भगवान के सामने व्हील चेयर पर बैठी २ प्रार्थना कर रही थी और बार २ एक ही बात कह रही थी, हे प्रभो मुझे अपने पास बुला ले | मुझसे अब पति की परेशानी देखी नहीं जाती | सुबह की प्रार्थना ख़त्म करके, वो मुड़ी ही थी कि घर के दरवाजे की घंटी बजी |

रानी ने सोचा कि शायद लीला घर की चाबी भूल गयी है इसीलिये घंटी बजा रही है | व्हील चेयर के सहारे दरवाजे तक पहुंची और दरवाजा खोला | लेकिन ये क्या, दरवाजे पर दो नकाबपोश खड़े थे | दोनों के हाथ में लम्बे नुकीले चाकू थे | बिना कुछ बोले एक नकाबपोश ने रानी की व्हील चेयर को पीछे धकेला और अन्दर घुसकर दूसरे ने दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया | अब एक ने रानी को धमकाते हुए कहा, जेवर और नकदी कहाँ रखे है | जल्दी से बताओ | वर्ना तुम अपनी जान से हाथ धो बैठोगी |

रानी को लगा जैसे ईश्वर ने ये एक मौका दिया है | उसे ये मौका पूरा लाभ उठाना चाहिये | रानी ने ठान लिया कि उसे दोनों नकाबपोशों को उकसाना है, उनका गुस्सा भड़काना है | वो अपने मोबाइल पर पुलिस का शोर कर, फोन करने का दिखावा करने लगी | एक नकाबपोश ने उसका फोन छीनकर उसी के सर पर दे मारा | रानी अब और जोर से चिल्लाने लगी | उसकी आवाजें सुनकर दोनों नकाबपोश गुस्से से तमतमा गये | उन्हें लगा, कहीं कोई बाहर से ना आ जाये | इसी डर में एक नकाबपोश ने पास रखा गुलदस्ता रानी के सर पर जोर से दे मारा | सर पर चोट अचानक और इतनी तेज थी कि कुछ ही देर में रानी की जीवन लीला समाप्त हो गई | घबराहट में दोनों नकाबपोश घर छोड़कर भाग गये, लेकिन रानी की दिल से मांगी मुराद पूरी हो गई | रानी ज़िन्दगी के बंधनों से आज़ाद हो गई |

कहानी डॉक्टर एक्सीडेंट व्हिलचेर चोर पुलिश गुलदस्ता

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