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प्रेम और हम
प्रेम और हम
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© Surendra kumar singh

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कितने दिलचस्प और आधुनिक हैं हम भी और हमारा प्रेम भी। प्रेम जिसका जिक्र हम कहानियों में पढ़ते हैं। इतिहास में पढ़ते है कविताओं में पढ़ते हैं।दुनिया भर की दुश्वारियों से भरा हुआ होता है। कभी जाति, कभी धर्म, कभी देश, कभी मर्यादा कभी गरीबी अमीरी आड़े आती है प्रेमियों के बीच और वो उन बाधाओं से पार पाने के लिए अद्भुत रूप से संघर्ष करते हैं और उस संघर्ष में विजयी होकर उभरते हैं। एक कहानी बनती है उनके प्रेम की।

हम तमाम लोग जो प्रेम को एक शक्ति के रूप में देखते हैं कहते हैं उनमें सच्चा प्रेम था इसलिए वे सफल रहे। प्रेम में इतनी शक्ति तो होती ही है कि वो अपने सामने की बाधाओं को हटा सके। अपने प्रेम को पाने के लिए लोगों ने युद्ध तक किया है। हजारों जाने गयी हैं प्रेम के लिये। योद्धाओं ने अपने प्रेम को प्राप्त किया है।

आज भी हम लोग उन प्रेम की कहानियों से प्रेरणा लेते हैं। पर हमारी कहानी कुछ भिन्न है। ये कहानी जीवन से जुड़ा एक चमत्कार है। हमने सुन रखा था उसके बारे में। देखी थी उसकी तस्वीर। हमें बताया गया था ये उसकी तस्वीर है और चाहे जो भी सच हो वो जानकारियाँ हमारे दिमाग में विश्वास की तरह सेट थीं। हम ठीक ठीक वैसा ही सोचते थे जैसा हमे बताया गया था। अब एक दिन की बात है कि हम उस तस्वीर से आँख मिला बैठे और सोच रहे थे कि मुमकिन है ऐसा कुछ सच में हो जो तस्वीर में है।

हमे वो पल याद है। हम उस पल को कई जन्मों तक नहीं भूल सकते। तस्वीर सचमुच जीवंत हो उठी और हमारे प्रेम में आबद्ध हो गयी। या हमारे प्रेम में पड़ गयी। हमे प्रेम करने लगी।पहले हम समझ नही पाये कि यह सब क्या हो रहा है जीवन में। जो हमारी सोच थी उस तस्वीर के बारे में उस सोच से कुछ अधिक सुंदर बात थी तस्वीर में। जो गुण उस तस्वीर के बताये गये थे हमें वो गुण कुछ अधिक थे उन तस्वीर में। आज भी वो तस्वीर वहीं पड़ी हुई है वैसे ही जैसी की थी मगर तस्वीर में जो गुण बताये गये थे हमे, वो गुण उस तस्वीर में नही हैं। वो गुण कुछ भिन्न परिवेश में हमारे अंदर आ गये हैं। ये है प्रेम उसका हमसे जिसकी वो तस्वीर थी।

सच पूछिए तो हमारी कोई कामना नहीं थी उस तस्वीर से। हमने सिर्फ उस तस्वीर से आँखें मिलाने की सोची थी और इसी क्रम में उस तस्वीर को एकाग्र मन से देख रहे थे। इस दर्शन या सोच की निरन्तरता में तस्वीर हमे दिल दे बैठी और यकीन मानिये हम हम नहीं रहे। उस तस्वीर के प्रेम भर से जो कहानी हमारे जीवन की बन रही है वो कहानी कहने भर को हमारी है।

जो लोग ऐसा कहते हैं उनका नज़रिया भी हमारे प्रति कुछ ऐसा ही है कि हम अपने अलावा भी कुछ और हैं। या कोई और है हमारे साथ साथ हमारा हित करते हुये। हमारे जीवन को हमारे जीवन की दिशा को बदलने के लिये। सचमुच जो बदलाव हमारे अंदर आया है हम उस खुद भी चमत्कृत हैं। वजह तो इस चमत्कार की उस तस्वीर का हमसे प्रेम ही है। कुछ और होगा तो हमे नहीं मालूम। हम तो इतना ही कह सकते है कि वो तस्वीर हमसे प्रेम करने लगी है। हमने सुना है आप ने भी सुना होगा प्रेम ईश्वर का एक नाम भी है। ईश्वर कुछ बोलता नहीं सिर्फ करता है। कहने वाले तो यही कहते हैं कि हम लोग निमित्त मात्र हैं कर्ता तो कोई और है। हमारे प्रेम की कहानी इतनी सी है। एक सरल और सीधी कहानी। इसलिये यह पाठक को आकर्षित नहीं करती। लोगों को क्रेज चाहिये होता है प्रेम कहानियों में। एडवेंचर आकर्षित करता हैं लोगों को और हमारी कहानी एक दम से सरल सी कहानी है।

लेकिन इसमें आकर्षण की संभावना है क्योंकि हमें भी सक्रिय होना है अपने प्रेम के साथ। हालांकि यह आसान काम नहीं है कि प्रेम में खोये खोये सक्रिय हुआ जाय। पर इत्तेफ़ाक से जीवन भी है हमारा और बिना सक्रिय हुये चल ही नही सकता तो चलेंगें तो इसमें थोड़ा रोमांच हो सकता है।

हमारी कहानी रोमांचक हो सकती है और एडवेंचर की तो इतनी सम्भावना है कि पूछिए मत। दिन में रात और रात में दिन होने की तरह। चाँद को पृथ्वी पर उतरकर टहलते हुये दिखने की तरह और समुन्दर को हमारे पानी पीने वाले बोतल में छिपते हुये। हम तो कहेंगे कि इस सरल सी कहानी को पढ़ते रहिये और इसी सरलता में वो सब ढूंढते रहिए जिसमें आप की रुचि है। जो आप को पसंद है। अभी तो हम है और हमारी इतनी सी कहानी है जो हम आप को सुना रहे थे।

कहानी आँखें तस्वीर

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