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हमसफ़र
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© Jaya Jadwani

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'सो ......लेट्स बिगिन?'

'याह .....श्योर......'

'हम एक-दूसरे से कितने भी सवाल कर सकते हैं?'

'वेल.....वी विल हैव टु डिफाइन अ लिमिट ..'

'डोंट टेल मी .....आप हर काम लिमिट में करती हैं?'

'आनेस्टली स्पीकिंग .....करना तो अनलिमिटेड चाहती हूँ पर कभी फैमिली परमीशन नहीं देती कभी सोसायटी.....'

'आय नो ......आज के लिये भी बहुत इंस्ट्रक्शन दे के भेजा होगा...'

'सो मेनी ....बताऊँ क्या ....?'

'इफ यू वांट ....प्लीज़ .......'

'आय डोंट हैव एनी प्रोब्लम. मॉम सेड .....लड़के को अच्छी तरह समझ लेना ...फारेन में रहता है ....दिखने में तो हैण्डसम है ...सैलरी भी हैण्डसम है....और कितने लड़के रिजेक्ट करोगी बेबी?कहीं तो जाकर रुकना पड़ेगा....ऐसा ही और भी बहुत कुछ.......' 

'हा.....हा....हा......आल राईट...तो शुरू करते हैं...जब तक आगे जाने में दिक्कत न हो तब तक. या अगर दूसरा जवाब न देना चाहे...'

'बट नो प्रायवेट कोश्चंस ...'

'पर ऐसा कैसे हो सकता है अगर हम साथ रहने का सोच रहे हैं तो?'

'आय वांट टू मेंटेन अ पर्सनल स्पेस इन माय लाइफ़ ...'

'स्पेस फॉर व्हाट?'

'फॉर थिंकिंग....फॉर लिविंग ...मेकिंग डीसिज़न्स...फॉर माय सेल्फ़ ....एग्री?'

'ओ. के...... एग्री.'

'वेल ...लेट मी स्टार्ट बाई आस्किंग फ्यू सिम्पल कोश्चंस....आर यू वेजिटेरियन?'

'नो....आय ईट एवरीथिंग....सच एज़ ...पोर्क ....बीफ़....सी फ़ूड....व्हाट अबाउट यू?'

'आय एम वेजिटेरियन एक्चुअली...'

'बट यू डोंट माइंड ....इफ....'

'नॉट एट आल....आप यू. एस. में कब से हैं और इंडिया कब -कब आते हैं?'

'आय एम् इन यू. एस. ए. सिंस सिक्स इयर्स एंड विज़िट इंडिया वंस इन अ इयर...इधर ममा मुझे लगातार लड़कियों से मिलवा रही है....'

'डू यू बिलीव इन अरेंज मैरिज ...आय मीन ........?'

'याह ..... आय बिलीव इन अरेंज मैरिज ...मे बी इंडियन हूँ इसलिए .....'

'वेल......व्हाट डू यू थिंक ....पहले मैरिज फिर प्रेम....इज़ इट पासिबल?'

'यू सी.......देयर इज़ नथिंग सरटेन इन लाइफ़ ....जैसा हम सोचते हैं. हर रिश्ता उम्मीद की नन्हीं कोंपल से शुरू होता है ...जब तक बड़ा न हो जाये उसे बहुत संभालना पड़ता है तो यह बिफोर मैरिज हो या आफ्टर मैरिज ....इट हार्डली मेक्स एनी डिफ़रेंस ......'

'ओह .....आय एप्रिशियेट.....यू आर सो मैच्योर ......'

'लाइफ़ इज़ अ ग्रेट टीचर......यू नो ......'

'बाय द वे .........यू टेक वाइन?''

'याह.......ओकेज़नली...डू यू?'

'वेल .....आय लाइक वाइन बट घर वालों को मालूम नहीं है.....छिप -छिप कर घर से बाहर दोस्तों के साथ .....'

'डू यू लाइक म्युज़िक?'

'याह.....वैरी मच ...मोस्टली गज़ल्स ......जगजीत सिंह, हरिहरन एंड गुलाम अली......एंड यू?'

'नाइस......आय लाइक ...... म्युज़िक विदाउट वर्ड्स ......'

'म्यूजिक विदाउट वर्ड्स...सच एज़ ......?'

'मोज़ार्ट......सिम्फ़नी आफ़ बिथोविन एंड विवाल्डी .....'

'डोंट टेल मी....मैंने तो कभी नहीं सुना ...ये शौक कैसे चढ़ा?'

'अपनी मॉम से.. मैं ट्वेल्थ तक पैरेंट्स के साथ था. मेरी मॉम हमेशा यही चलाये रखती थी घर में...इंस्ट्रूमेंटल. यू नो पुरानी चीजें नहीं छूटती ...'

'आफ्टर मैरिज आप अपने पेरेंट्स को बुलाना चाहेंगे?'

'वहां...यू .एस. में?याह.... अगर वे आना चाहें ....आय एम द ओनली चाइल्ड. क्या आप उनके साथ रहना चाहेंगी अगर ये रिश्ता ....?'

'इट डिपेंड्स कि वे मुझसे कैसा सुलूक करते हैं?'

'माय मॉम इज़ वैरी प्रिटी वूमन...वे किसी भी लड़की को उसका स्पेस ज़रूर देंगी ..वैसे भी ये टू वे प्रोसेस है .....विदाउट गिविंग यू कैन नॉट रिसीव एनीथिंग .....व्हाट अबाउट योर पेरेंट्स बिकाज़ यू आर द ओनली चाइल्ड टू ...'

'आय डोंट नो एक्चुअली ....आय लव देम बट..लीव इट नाउ ..आप कितनी लड़कियों से मिल चुके हैं?'

'आप चौथी हैं ...और शायद आख़िरी भी ...एक जैसी सीरिज देख चुका हूँ ...एक जैसे कपड़े .....एक जैसे शौक ....एक जैसी थिंकिंग .....आय एम बोर्ड एक्चुअली ......आपके बाद मैं किसी से नहीं मिलूँगा .....मुझे यहाँ की लड़कियों में अमेरिकन लड़कियां दिखती हैं ......वे उन जैसा न सिर्फ़ दिखना बल्कि हो जाना चाहती हैं मानो संस्कृति कोई वस्त्र हो जिसे बदल देने से वे बदल जायेंगी .....'

'बट हमारे यहाँ के लड़के नहीं बदले हैं ......'

'व्हाट मेक्स यू से दिस?'

'आय नो दिस .....उन्हें अभी भी इंडियन टाइप लड़की चाहिये जो सबसे पहले उनके घरवालों की सुने या उनसे एडजस्ट करने की कोशिश करे .....कई बार वे मैरिज अपने लिये नहीं अपने घरवालों के लिये करते हैं .....बहुत तो मेल शावनिस्ट भी होते हैं .....लड़की एडवांस हो ....इंग्लिश स्पीकिंग हो पर चले घरवालों के कहने पर ...घर की इज्जत बचाने की जिम्मेवारी सिर्फ़ उसी की ....हाउ इज़ दिस पॉसिबल? आय कांट अंडरस्टैंड .....उन मूल्यों को बचाना क्यों जरूरी है जो अब किसी काम के नहीं रहे ........'

'आय एग्री .....इवन आय बिलीव द सेम ....यू हैव टु वर्क एट क्रिएटिंग योर ओन कल्चर ......पर इसके लिये आप घरवालों को दोष मत दीजिये.....क्या हम उन्हें समझ पाते हैं ......हम क्यों अपने भीतर उन्हें जगह नहीं देते .....क्यों हमारे भीतर की जगहें इतनी छोटी हो गयी हैं कि ......?'

'क्योंकि उन्होंने मैरिज को एक बिजनेस में तब्दील कर दिया है. सबसे पहले वे घरवालों के बिजनेस की छानबीन करते है .....पार्टी कितने करोड़ में उतरेगी? यह उनका पहला सवाल होता है......इसके बाद वे बच्चों की छानबीन करते हैं.'

'यह मुसीबत तो हम लड़के वालों की है.....लड़की वाले यह पक्का कर लेना चाहते हैं कि हम उनकी लड़की को क्या -क्या दे सकते हैं?'

'आप इसका उल्टा भी सोच कर देखिये .....लड़के वाले भी पक्का कर लेना चाहते हैं कि हमसे उन्हें मिलेगा कितना .....?'

'मे बी यू आर राइट ....बट व्हाट इज़ दि सोल्युशन फ़ॉर दिस?'

'आय एम नॉट श्योर एक्चुअली ....जिसे एक वक्त तक मैं सोल्युशन समझती थी....बाद में पता चला वह मेरी मूर्खता थी....घरवाले रो-धोकर आपसे अपने मन का काम करवा ही लेते हैं ......पर इस बार मैं उनकी नहीं मानने वाली .....मैरिज होगी तो मेरे मुताबिक मेरी शर्तों पर .......ओ.के.?'

'इट साउंड्स ग्रेट ......आय एडमायर योर करेज.'

'मेरे पेरेंट्स तो एन. आर.आई. के लिये पागल हैं ......और सिर्फ़ मेरे ही नहीं मैंने अपने सर्कल में बहुतों को देखा है .....वे किसी भी तरह अपनी लड़कियों को विदेश भेज देना चाहते हैं......खास तौर पर यू. एस. .....आप जानते हैं क्यों?'

'याह .....थोड़ा बहुत .....मे बी .....विदेशों में आजादी अधिक है, मनी है, जीवन स्तर अच्छा है, प्रायवेसी है..मनुष्य की जान की कीमत है....बहुत ज्यादा आर्गनाइज्ड है. वहां रोजमर्रा का स्ट्रगल नहीं करना पड़ता .सोशल फियर जैसी कोई चीज़ नहीं है. करप्शन भी इस तरह नहीं है....जैसा यहाँ हर कदम पर है...हमारे यहाँ दोहरी मानसिकता है. हम यू. एस. को गालियां भी देते हैं पर हर पेरेंट्स अपने बच्चे को वहीं भेजना चाहता है. बट आय एम सॉरी एक बात और जो मुझे कई लड़कियों से बात करके महसूस हुई, वहां बच्चों के साथ उनके पेरेंट्स नहीं रहते.'

'बट एक बात और है जो आपको महसूस नहीं हुई ....'

'क्या?'

'वे मैरिज नाम की इस आर्गनाइजेशन के दुष्परिणामों से उन्हें बचाना चाहते हैं......'

'कैसे?मैरिज तो वे कर रहे हैं?'

'हां .....वह तो करना है ही ....पर वहां इससे छूटना आसान है ,इंडिया में नहीं .....इंडिया में तो निभती ही इस कारण हैं कि लोग क्या कहेंगे?'

'तो आपको क्या लगता है यह आर्गनाइजेशन ख़त्म हो जानी चाहिये?'

'आय रिअली डोंट नो .....फिर बच्चों का क्या होगा?'

'बच्चों से पहले हमारा क्या होगा?क्या हमें फैमिली की जरूरत नहीं है? क्या हम लगातार सेल्फ़ सेंटर्ड और अकेले होते नहीं जा रहे?पहले हम कुनबे में रहते थे .....फिर संयुक्त परिवारों में ....फिर न्यूक्लियर....अब तो दो लोग भी साथ नहीं रह पा रहे .....कमजकम यू. एस. में तो नहीं. और हम भारतीय भी उसी दिशा में जा रहे हैं ...हमारे देश में ही देखिये ...कोई किसी के साथ रहने को तैयार नहीं. पहले -पहल जब मैं यू. एस. गया था देखकर हैरान होता था कि वहां पड़ोस का कोई कान्सेप्ट ही नहीं है ...वहां अकेलेपन की ठण्ड में कांपते हुए मुझे इन रिश्तों की गरमाई का अहसास होता था .....मुझे अपना पड़ोस भी बहुत शिद्दत से याद आता था .....अब लौटकर देखता हूँ कि यहाँ से भी वह गरमाहट गायब होती जा रही है ....ले -देके खून के ही तो रिश्ते बचे हैं .....वे भी अब खून कर रहे हैं एक-दूसरे के अरमानों का .....'   

'पर अमेरिका तो कास्मोपोलिटन कंट्री है .वहां तो हर देश के लोग साथ रहते हैं ....'

'रहते हैं .....अपने -अपने खूबसूरत दड़बों में .....अमेरिका की शर्तों पर .....अपनी नहीं ....और वह ठीक भी है .......पर एक बारीक़ रेखा उनके बीच भी है .....अधिकतर या तो पैसे कमाने जाते हैं या अपने देश या घर के हालातों से घबराकर .......वे बहुत जल्दी किसी के साथ खुलते नहीं ....और इतनी ज्यादा प्रायवेसी मेंटेन करते हैं कि लगभग अकेले हो जाते हैं .....मैं उन बुजुर्गों को देखता हूँ जो पार्क में घंटों अकेले बैठे रहते हैं या अपने घर की बालकनियों में. क्योंकि कोई उनसे बात करने वाला नहीं है. मैं डरता हूँ क्या हम उसी तरफ़ जा रहे हैं?'

'चलिए आगे बढ़ें .....मैंने भी आपको कहाँ उलझा दिया .....हमें अपने रूटीन सवालों की ओर लौटना चाहिये.....हम बार -बार वहां चले जाते हैं जहाँ सवालों का कोई डेफिनिट आंसर नहीं है ......'

'हम इसीलिये तो यहाँ बैठे हैं ....डेफिनिट आंसर तो हर जगह मिल जाते हैं ....'

'थैंक्स ....इट मीन्स यू लाइक इट .....इट मीन्स हम एक कदम और आगे जा सकते हैं......वहां लड़की के जॉब करने के क्या चांसेस हैं?'

'डिपेंड्स कि वह किस वीज़ा पर जाती हैं?बट आप चाहती हैं जॉब करना....?'

'येस ऑफ़कोर्स....मुझे यह पसंद नहीं कि कोई मेरा खर्च उठाये या मुझसे मेरे पैसों का हिसाब मांगे..'   

'ओ के....लेट्स थिंक अबाउट इट लेटर ......वन मोर क्विक कोश्चन ....डू यू लाइक मूवीज़?'

'ऑफ़कोर्स यस ...बट नॉट इंडियन मूवीज़...इनमें कुछ नया नहीं होता. एक ही कहानी हर फिल्म में.....आय लाइक फॉरेन फिल्म्स ....'

'बट आय लाइक इंडियन मूवीज़....आय लाइक आमिर खान ..दीपिका पादुकोण एंड रणवीर सिंह. बट मुझे बेलातार और किज़लोवस्की भी अच्छे लगते हैं. मैंने उन्हें पूरा देखा है. बर्गमैन का तो मैं दीवाना हूँ.....'

'ये किसी एक्टर्स के नाम हैं?'

'नो ......डायरेक्टर्स....'

'ओह ......डू यू नो हाउ टू कुक?'

'याह ....वेरी मच.....मैं हैदराबादी चिकन बिरयानी और मटन करी इतनी अच्छी बनाता हूँ कि मेरे फ्रेंड्स जब भी आते हैं इसी की डिमांड करते हैं .एंड यू?'

'आय डोंट लाइक. माय मॉम डज़ मोस्ट ऑफ़ दि कुकिंग. मैं बस चाय या काफ़ी बना सकती हूँ. डू यू हैव एनी प्राब्लम?'

'नाट एक्चुअली ....अगर मेरी वाइफ नहीं बनाना चाहेगी तो मैं बना लूँगा या हम बाहर चले जायेंगे....व्हिच कुजीन डू यू लाइक द मोस्ट?'

'आय लाइक ....चाइनीज़ ....थाई एंड इटैलियन...व्हाट अबाउट यू?'

'आय लाइक इन्डियन ...सच एज़ चिकन बटर मसाला एंड दाल एंड होम मेड रोटी....जिंजर नान .मुझे अभी तक ब्रेड खाने की आदत नहीं पड़ी.....एंड बुक्स? ......आय लव रीडिंग ....डू यू लाइक इट?'

'नो......आय डोंट लाइक बुक्स....देखकर ही मुझे नींद आने लगती है. मुझे जो देखना होता है .ऑन लाइन देख लेती हूँ.'

'बुक्स देखने के लिये नहीं होती ये हमको अपने साथ एक बिलकुल नए सफ़र पर ले जाती हैं .......'

'व्हिच सफ़र ......?'

'लेट मी स्पीक इन प्योर हिंदी ...किसी को पढना उसके भीतर के संसार में प्रवेश करने जैसा है. आप उन-उन कोनों में चले जाते हैं..जहाँ आप वैसे कभी नहीं जा पाते. वह आपको अपने शहर की बंद गलियों में ले जाता है ....अपने बंद घर में.  वो जो गिर चुका है अब ....उसका सीलन भरा फर्श और अँधेरे कोने जहाँ अब भी न जाने कितने ख्वाबों के कंकाल लटके हैं. हम उन्हें छूते हैं तो हमारे भीतर सूखे आंसू बहने लगते हैं ...हम चाहते हैं वहां से भाग जायें पर कोई चीज़ हमारे पैरों और रूह को जकड़ लेती है.'

'आय डिंट अंडरस्टैंड ....फिर जाते ही क्यों हैं?'

'उसके भीतर की गलियों में भटकते हुए हम पाते हैं यहीं कहीं हमारे भीतर से भी कुछ गिरकर खो गया था...उसके बचपन के पुराने -टूटे जर्जर खिलौनों और कचरे के ढेर में कुछ हमारे लिये भी होता है, जिसे हम सबकी आँख बचाकर चुपके से उठा लेते हैं ....एक अच्छी किताब में एक अनोखा जानलेवा संगीत होता है जो उसके शब्दों में से फूटता है और हम पर एक नशे की तरह चढ़ता है.'

'व्हाट आर यू सेइंग मैन? और ये हैबिट भी आपको आपकी ममा से आई है?'

'यस ऑफ़कोर्स....आपको आपकी ममा या डैड से कुछ नहीं मिला?'

'आय डोंट लाइक ममाज़ लाइफ़. टिपिकल इंडियन वुमन. हसबैंड के बिना जिसकी कोई आइडेन्टिटी नहीं.'

'आइडेन्टिटी से आपका क्या मतलब है?'

'अपना काम.....अपना नाम, अपनी जमीं और ऑफ़कोर्स अपनी मनी ....'

'बट उस लाइफ़ में कुछ अच्छी बातें भी हैं ....'

'सच ..एज़ ........'

'त्याग....समर्पण .....लव .....'

'और ये शब्द सिर्फ़ औरतों के लिये ही हैं .....वे ही खोती हैं खुद को इनके पीछे ...'

'नहीं ....ये दोनों के लिये हैं ....और अन्फोर्चुनेटली दोनों खो रहे हैं .....इस पर हम बात करेंगे तो बहुत लम्बी हो जायेगी ....'

'मे आय आस्क नेक्स्ट कोश्चन ......?'

'याह.......श्योर .......'

'आर यू रिलीजियस?'

'नॉट दैट टाइप. आय बिलीव इन गॉड बट नाट बिलीव इन रिलिजन. एंड यू?'                                  

'आय एम सेमी रिलीजियस .....आय डोंट गो टू टेम्पल बट प्रेयर डेली....आपकी दूसरी हाबीज़ क्या हैं?'

'वेल....मुझे जंगलों में घूमना अच्छा लगता है ...कभी -कभी वीकेंड्स में मैं फिशिंग के लिये जाता हूँ अकेला .....और बैठा रहता हूँ घंटों अपनी छोटी सी बोट में ....बार बी क्यू में अपना फ़ूड पकाता हूँ ....पीता हूँ ....और सैड सॉंग सुनता हूँ एंड यू?'

'मुझे क्लब जाना अच्छा लगता है और डांस करना....लेट नाईट पार्टी करना....तैयार होना ...शापिंग करना .....आय कांट लिव अलोन इवन फॉर कपल ऑफ़ आर्स..... बट आपको सैड सॉंग सुनना क्यों अच्छा लगता है?'

'आय डोंट नो ...शायद प्रेम और दुःख में एक मैग्नेटिक पॉवर होता है जो हमें अपनी तरफ खींचता है .....'

'वेल ....आय नेवर फेल्ट दिस वे .....'

'हैव यू एवर सीन द ओशन?'

'यस ....ऑफ़कोर्स......'

'उसे देखकर लगता नहीं वह आपको बुला रहा है अपने भीतर कि उतरो और उस पार चले जाओ ......'

'उस पार ......बट उस पार तो मृत्यु है .....'

'यस ......प्रेम और दुःख मृत्यु ही तो हैं ....घटते अलग -अलग तरीके से है....इससे गुज़रने के बाद तुम वही नहीं रह जाते जो तुम थे .....'

'हा....हा......हा.....यू आर वेरी इंट्रेस्टिंग.....साउंड लाइक यू हैव बीन थ्रू आल दिस .......बट वी कैन टॉक अबाउट दैट लेटर ....फर्स्ट यू आन्सर माय कोश्चन .....व्हाट इज़ द गोल ऑफ़ युअर लाइफ़?'

'इट्स वेरी डिफिकल्ट टू आंसर दिस कोश्चन ...वेल .....बाहर से देखने पर एक मिडिल क्लास मैन की तरह अच्छी ज़िन्दगी की ख्वाहिश.....एक या दो बच्चे एंड... अपनी कंपनी का सी.ई.ओ. बनने का ड्रीम ....बट आनेस्टली....आय वांट टु डू  समथिंग डिफरेंट .आय डोंट वांट टु बी लाइक द रेस्ट बट लाइफ़ इज़ वेरी डिमांडिंग एंड क्रुअल थिंग. इट वोंट लीव यू अलोन...हाउ डू यू फील अबाउट योर लाइफ़ ....?'

'ओह........वेल ......मुझे आसमानों में उड़ना अच्छा लगता है....मैं वाइन भी इसीलिये पीती हूँ कि अपने भीतर उड़ती रह सकूँ. मैं दो साल से एयर होस्टेज हूँ.... बट जब मैं ज़मीन पर रहती हूँ तो लगता है आसमान चाहिये. आसमान में रहती हूँ तो लगता है ज़मीन चाहिये ...वन साइड ऑफ़ मी आलवेज़ वांटस टू हैव फन ..एंड एन्जॉय लाइफ़ बट द अदर साइड ऑफ़ मी सीज द डेंजर ऑफ़ आल दैट ....द डिफिकलटीज़ ....टेम्पटेशन्स ...सो आय रियली डोंट नो व्ह्यर आय विल एंड अप .....'

'जिसे हम जानना कहते हैं बहुत तकलीफें सहने के बाद आता है.....नहीं?'

'आपको सुनकर भी लगता है आपने बहुत संघर्ष किया है ...इज़ंट इट?'

'याह.....वे बड़े खूबसूरत दिन थे ..... मेरी इंजीनियरिंग की पढाई के लिये मैं जब यू. एस. गया तो सबसे पहले अपने लिये काम ढूँढा .....मेरे पास जितने पैसे थे उससे मैं सिर्फ़ दो महीने रह सकता था .....और मुझे तो पढ़ना था ....फ़ीस देनी थी ....जॉब ढूंढ़ते समय मुझे शर्म आ रही थी कि कैसे रेस्टारेंट या स्टोर में काम करूँगा .....और मैंने देखा कि वहां लगभग सारे बच्चे नाइंथ तक आते-आते पार्ट टाइम काम कर अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश करते हैं .....और  इस बात पर फ़क्र महसूस करते हैं. हर तरह का काम करने की आदत उन्हें बचपन से ही पड़ जाती है ....वहीं मैंने सीखा कि यह हम पर है कि हम परिस्थितियों को कैसे देखते हैं. लाइफ़ इज़ नॉट ए स्ट्रगल.....इट्स लेसन एक्चुअली .....आपको इस तरह का संघर्ष नहीं करना पड़ा होगा.'

'नो.....पर काश! करना पड़ा होता...तो दूसरों के बताये रास्ते पर चलने की विवशता न होती..स्ट्रगल आपको पंख भी तो देता है ......'

'आय कैन अंडरस्टैंड ....लाइफ़ इज़ नॉट वैरी सिम्पल. वन कैन लिव सिम्पली बट लाइफ़ इटसेल्फ़ इज़ काम्प्लेक्स .....'

'बाय द वे .....इज़ देयर एनीवन इन योर लाइफ़?'

'आय हैड वन्स ......आनेस्टली आय वांट टु शेयर विथ यू.....एक थी ....हम दो साल साथ रहे फिर वह चली गयी ....एंड यू?'

'मेरा एक्स ब्वायफ्रेंड फिर लौटना चाहता है ....'

'और आप उसे एक मौका और देना चाहती हैं ....'

'आय कांट से एनीथिंग.....'

'ओ.के. ...... सो ......दिस मीटिंग इज़ फिनिश ...'

'जिसे हम ख़त्म होना कहते हैं ...दरअसल वहीं से कुछ शुरू होता है....'

'ओ माय गॉड! यू आर टाकिंग लाइक माय मॉम ....'

'आय वांट सेकण्ड सेशन .....इफ यू ......?'

'ओह ....कम ऑन .....विद ग्रेट प्लेज़र ......'

'डू यू बिलीव इन लिव- इन रिलेशनशिप?'

'नॉट लाइक दैट ...वह मुझे अच्छी लगती थी, हालाँकि वह एक अमेरिकन लड़की थी, उनकी ज़िन्दगी का पैटर्न और सोच हम इंडियन्स से काफ़ी अलग है. एक मैक्सिकन रेस्टारेंट की टेबल पर उससे मुलाकात हुई थी....वह इतनी उन्मुक्त ...इतनी पारदर्शी ....इतनी जीवन से भरपूर लग रही थी कि उसका चेहरा उसके भावों को संभाल नहीं पा रहा था. वह समुद्र की विशाल लहर थी जो किसी को भी अपनी चपेट में ले सकती थी ....उसने बहुत पी रखी थी....बाहर आने के बाद हम सड़कों पर डांस करते रहे. सब हमें छोड़कर चले गये थे. उस क्षण प्यार का ऐसा आवेग उठा मेरे भीतर ....मैं उसे घर ले आया ....हमने एक-दूसरे को बहुत प्यार किया. सुबह वह चली गयी. बस हम मिलते रहे. उसके और भी दोस्त थे, जिनसे वह मिलती थी. जो कभी-कभी बेहोशी की हालत में उसे घर भी छोड़ आते थे ......मैंने कभी ऐतराज नहीं किया. फिर एक दिन वह मेरे साथ रहने आ गयी.'

'उसके पैरेंट्स?'

'वहां इंडिया की तरह नहीं है कि हमारे फैसले हमारे पेरेंट्स करें. इस तरह के संबंधों को लेकर भी वे काफ़ी सहज रहते हैं.'

'बट ....फिर आपके बीच क्या हुआ?'

'मुझे उसमें यह बात अच्छी लगती थी कि अपनी भूख और प्यास छिपा नहीं रही या कुछ और होने का अभिनय नहीं कर रही...पर फिर उसने मुझको जकड़ लेना चाहा. मेरे शौक उसे अच्छे नहीं लगते थे ...उसे मेरा अकेले रहना और घूमना समझ में नहीं आता था.....जैसे यह करके मैं उससे कुछ छीन रहा हूँ...मुझे बाद में पता चला उसके पास देने को सिर्फ़ उसके जिस्म का बियाबान है .....मैं उसमें कुछ और ढूँढने की दो साल कोशिश करता रहा...पर वह मुझमें कभी कुछ नहीं ढूंढ़ सकी .....मैं उसके लिये टिपिकल इंडियन था ......फिर हमने अपना रास्ता बदल दिया ...वहां के लिये ये भी कोई बहुत बड़ी बात नहीं है .....अब वह किसी दूसरे के साथ रह रही है और खुश है ...बट इस सबके लिये मैं उसे बिलकुल दोष नहीं देता. हम एक-दूसरे से बहुत दूर खड़े थे ...बस.....और यह दूरी मैं पहले नहीं देख पाया.'

'आय लाइक दिस थिंग.......हमारे यहाँ तो यह आजीवन कैद से कम नहीं...आप छूट ही नहीं सकते. मैंने अपनी ममा को देखा है. शी हेट्स पापा. दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है....फिर भी वे साथ रहने को मजबूर हैं. मैं ममा से कहती हूँ मेरी शादी के बाद तुम तलाक ले लेना बट एटलीस्ट मरने से पहले एक बार ज़िन्दगी चुन लो....इस पर भी वे बहुत नाराज होती हैं ....? हम मनचाही चीजों को चुनने के लिये स्वतंत्र हैं तो रिश्तों को क्यों नहीं ....ये चुनाव कोई दूसरा कैसे कर सकता है? हम यहाँ इतने जड़ क्यों हो जाते हैं?'

'करेक्ट .... आय थिंक यू हेट अरेंज मैरिज?'

'यस आय डू ......बट आय डोंट नो व्हाट इज़ रांग व्हाट इज़ राईट?हमारे यहाँ क्लास कोई भी हो ,अधिकतर औरतों के काम निर्धारित होते हैं ....सातों दिन खाना बनाना ..घर की देखभाल करना ..अच्छी बीबी अच्छी मां बनने की कोशिश करना. उसके पास उसकी अपनी सोच की कोई जगह ही नहीं बचती....कोई उससे क्यों नहीं पूछता कि जो तुम्हें दिया जा रहा है ....वह तुम्हें चाहिये या नहीं?शादी के बाद तो उसकी सोच पर ही फुलस्टॉप लगा दिया जाता है ......फिर वे ये फ्रस्ट्रेशन कहीं और निकालती हैं ...अक्सर अपने बच्चों पर ....'

'फिर अपने पति पर .....तो आपको उसके लिए तय हुए कामों से नफ़रत है....न कि मैरिज से ......'

'हां ....पर ये काम तो उसे मैरिज की वजह से करने पड़ते हैं ....न चाहते हुए भी.'

'अगर आपको आज़ाद औरत देखनी है तो पश्चिम में आइये....यहाँ से बहुत आगे हैं वहां की औरतें ....वहां फिर इस आजादी से पैदा हुई दूसरी समस्याएं हैं .....किसी भी स्थिति से छूटने के लिये अपनी कोशिशें काम आती है ......सबसे पहले तो अवेयरनेस. किसी दूसरे से कुछ मांगोगे तो वह देगा पर अपनी शर्तों पर .....वे क्यों जल्दी हथियार डाल देती हैं .....वे क्यों वैसी ही बन जाना चाहती हैं जैसा पुरुष या समाज उनसे उम्मीद करता है .....सिर्फ़ इसलिये कि वे एप्रिशियेट की जायें .....और ......उन्हें अपने लिये तमाम सुविधाएं मिल जायें ....? वे क्या चाहती हैं ....वे क्या जानती भी हैं? सिर्फ़ सुविधाएं या खुद अपना आप ....? खुद को देखने के लिये खुद की नज़र भी तो हो ....तुम कीमत चुकाने के लिये भी तो तैयार रहो .....अपनी आजादी की कीमत .....मिली हुई ज़िन्दगी को जब तक और बेहतर और नया बनाने का हुनर तुम्हारे पास नहीं है तब तक तो तुम मजबूर हो ही उसमें सड़ते रहने के लिये.....और इसके साथ ही तुम्हें उस फ्रीडम की सीमाओं का भी पता होना चाहिये...कि कहाँ तुम्हारी खत्म और दूसरे की शुरू होती है?'

'यस ......यू आर राइट ....अच्छा दिखने और पेश होने की कोशिशें बहुत कुछ नष्ट करती चलती हैं हमारा .....अपनी उधार की आजादी जीते वक्त मुझे अक्सर लगता है, मैं अपनी मां की खोई आजादी भी जी रही हूँ. इस फ्रीडम लफ्ज़ ने मुझे बेपरवाह भी बनाया है....इसी के चलते मैंने कई फैसले गलत किये. मैं हमेशा अपने पैरेंट्स से झूठ बोलती आई हूँ. मैं जानती हूँ वे सच नहीं सुन सकते. बट आप ठीक कहते हैं मैं वैसी ही बन गयी जैसी मेरे दोस्त मुझे देखना चाहते थे ....मैं घर में एक तरह की ज़िन्दगी जीती हूँ .....बाहर दूसरी ....और कभी कह नहीं पाई किसी से कि मुझे दोनों पसंद नहीं है ....बट आय डोंट नो, ऐसा क्या है तुममें कि मुझे झूठ बोलने की जरूरत ही नहीं रही.'

'हा ....हा ....हा....यू शुड गिव इट अ थाट .....यू मस्ट .....बट अगर आपको दोनों पसंद नहीं हैं तो फिर तीसरी आपको खुद ढूंढनी होगी .....'

'याह ......वह कौन सी होगा ....मैं नहीं जानती.......बट आपको क्या लगता है जिसे हम अच्छी तरह जानते हों ....पूरा .....उसी से मैरिज करना चाहिये?'

'अब नहीं लगता........पूरा कैसे जाना जा सकता है किसी को अगर हम खुद को नहीं जान पा रहे ....और फिर ....ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जो तुम्हारे वजूद, तुम्हारे 'पन' को स्वीकारें. वे अक्सर तुम्हें बदल देना चाहते हैं.....और यह कोशिश बहुत घटिया है.....'

'पर बदल जाना क्या बुरा है? क्या जरा सा बदल नहीं जाना चाहिये?'

'अगर प्रेम है तो सब-कुछ अपने आप बदल जाता है ...नहीं तो करते रहिये कोशिशें ....'

'आप फिर प्रेम की बात कर रहे हैं जबकि एक धोखा खा चुके हैं .....और ज़िन्दगी बगैर प्रेम के बेहतर चलती है ...'

'सो व्हाट .....वह धोखा नहीं था.....एक भूल थी किसी को न पहचान सकने की. पर इससे सब कुछ ख़त्म नहीं हो जाता. और मैं ज़िन्दगी बगैर प्रेम के नहीं चलाना चाहता .....प्रेम तो भीतर बार-बार जन्म लेता है बार-बार हमें मारने के लिये ......बट यह भी पता है .....चाहने से नहीं होगा ....कुछ बातें हमेशा हमारे वश से बाहर रहती हैं. वे सिर्फ़ घटित होती हैं ....'

'और आप उसके घटित होने का इंतज़ार कर रहे हैं .....यह तो जोखिम है?'

'सचमुच का जीना जोखिम ही है ......लगता है आप ऐसा नहीं मानतीं .......'

'मुझे लगता है यह जिस्मानी भूख का दूसरा खूबसूरत नाम है...जिसकी आड़ में सब जायज़ है .......शादी भी यही है...एक लायसेंस....प्रेम ज्यादा वैलिड लायसेंस है ....यह लायसेंस आपको एक बन्दूक भी देता है .....आप मनचाहा शिकार कीजिये ....उसे मारिये ....उसके साथ फ़ोटो खिंचवा  दीवार पर टांगिये ....फिर उसी को पकाकर खाते रहिये ....जब तक स्वाद है ....फिर आगे बढ़ जाइये.....'

'अगर ऐसा ही है तो आप अपने ब्वायफ्रेंड को क्यों छोड़ती? वह यही तो कर रहा था ....स्वाद ढूँढने की कोशिश. इसमें शिकार कौन था ...शिकारी कौन?'

'........................................'

'यह बहुत मुश्किल है ....अपनी सोच और चाहनाओं को ठीक-ठीक देख पाना .....और उन्हें कोई शब्द दे पाना ......बहुधा तो हम दूसरों से मिले शब्दों में अपना अर्थ भरने की कोशिश करते हैं .....और गलत समझते या समझे जाते हैं....और इन्हीं शब्दों के कारण हम अपनी सोच के वास्तविक कारणों और समस्याओं को नहीं समझ पाते ......बस इतना जान लो कि कुछ चीजों के बिना तुम नहीं रह सकते ....'

'सच एज़ ......'

'दोस्ती ...प्रेम ......फैमिली ....आशा ....आस्था .....ड्रीम .......ग्रेटीटयूड .... अपने पंखों की सामर्थ्य पर यकीन ....अपने होने पर ...और साहस जोखिम वरण करने का '

'आपने तो बहुत कुछ बोल दिया.....कहाँ से लायें इतना सब?'

'कहीं से नहीं .....तुम्हारे भीतर है....नॉक योर डोर ...'

'ओह ....कम ऑन .....'  

'हा....हा.....हा....रियली ...बट लीव इट नाउ ....'

'आय वांट टु नॉक माय डोर .....कैन यू मेक मी अंडरस्टैंड हाउ ......?'

'आइल ट्राय ......इफ आय कैन .....बट एवरी थिंग कैन नाट बी एक्सप्रेस इन वर्ड्स ....समथिंग्स आर बेटर लेफ्ट अनसेड ......शब्द मदद नहीं करते ....किसी के भी हों .....हमारी कोशिशें करती हैं .......बट आय लव दिस थिंग इन यू ......चलो आगे बढ़ें .....मुझे लेकर आप क्या फ़ील कर रही हैं?'

'आनेस्टली स्पीकिंग ...आय वांट टू हग यू ....आय वांट टू सिट बाय यू ......यू आर सो प्योर ......सो आनेस्ट ....इतने कम समय में तुम इतने अच्छे लगने लगे हो कि मै हैरान हो रही हूँ .......जैसे बहुत शोर से भरी सड़क से घंटों गुज़रते रहने के बाद एकाएक तुम किसी घाटी में पहुँच जाओ और तुम्हें अपनी ही आवाज़ साफ़ सुनाई देने लगे ......बहुत ही गहरी और साफ्ट .....जैसे आधी रात को अपनी सांस सुनाई देती है ......टेल मी वन थिंग ......हमें क्या चाहिये ....इसे क्या हमेशा कोई और बताता है?'

'नॉट ऑलवेज .....कभी-कभी बहुत वक्त लग जाता है ...पर ऐसा कभी नहीं होता कि जो हम जानने निकले हों वह न जान पायें ......बट इसका श्रेय आप मुझे मत दीजिये .......यह आप मेरा दिल रखने को कह रही हैं.'

'उसकी कोई जरूरत नहीं है आपको .....लिसिन .....आय लाइक यू डीपली ....आय डोंट नो व्हाई .....सोचकर आई थी कि तुम्हें 'न' कहूँगी तो मुझसे मेरी एयर होस्टेज की जॉब कोई नहीं छीन पायेगा और सच यही है कि मैं 'न' कहने ही आई थी ....बट ...बट .......यू आर वैरी नाइस गाय लाइक योर मदर....मैं तो और बातें करना चाहती हूँ बट वे चारों रिसेप्शन पर बैठे हमारा इंतज़ार कर रहे होंगे....बेचैन हो रहे होंगे ....क्या कहेंगे हम उनसे कि ये रिश्ता हमें पसंद है या नहीं? व्हाट डू यू वांट .......? आय नीड टु नो ....'

'हम दोनों बहुत अलग हैं एक-दूसरे से ....कुछ भी कामन नहीं है हमारे बीच ....बट अभी कुछ कह पाना जल्दबाजी होगी ....फिर आप अपने एक्स ब्वाय फ्रेंड को एक मौका और भी तो देना चाहती हैं ....'

'अब नहीं .......यू नो ....उसमें और मुझमें बहुत -कुछ कामन है फिर भी हम हर वक्त लड़ते रहते हैं....मैं न उसके साथ रह पाती हूँ न उसके बिना....मैंने उससे इस तरह कभी बात नहीं की जैसे आपके साथ ...इतनी फुरसत उसे नहीं है ....वह बहुत जल्दी में होता है उसे हर वक्त सेक्स चाहिये .....कभी-कभी मुझे लगता है मेरे पास जो कुछ भी है उसमें से उसे सिर्फ़ मेरा जिस्म ही चाहिये ...'

'आपके पास जो-जो है ....उसमें से आप पहचान भी तो अभी जिस्म ही पायीं हैं ......तो कोई दूसरा कैसे जानेगा .....कभी इससे तैरकर ऊपर आइये और सोचिये आप क्या हैं ....अपने भीतर से .....दिमाग से नहीं...फीलिंग्स नेवर लाइ ......'

'आय जस्ट रिअलाइज़ ..... मुझे जंगलों में घूमना अच्छा लग सकता है ....या नदी किनारे चुपचाप बैठे रहना ....फिशिंग करना.....फिशिंग मीन्स वेटिंग....आय मे ट्राय टु रीड बुक्स ...उनमें वे खंडहर ढूँढने की...जिनमें खोया हुआ अपना आप मिल जाता है....इज़ इट पॉसिबल टु डिस्कवर वनसेल्फ़ ...?'

 'हर बीज फूटता है अगर उसे सही जगह लगाया जाये ....बस अपनी मिट्टी का ख्याल रखना होता है ......हमें अपना रास्ता पहचानने की जरूरत है ....वी नीड सम टाइम टु डिसाइड ...आपके भीतर एक तकलीफ़ है अपने जैसा न हो सकने की ....अपना रास्ता न ढूंढ पाने की .....अनलेस वी रिकग्नाइज़ अवरसेल्फ़, वी कैन नॉट रिकग्नाइज़ अदर्स  .....'

'.........................'

'यह जो कुछ भी है सुन्दर है .....एक दूसरे को जानने की शुरुआत .....हमने जो कहा उसमें वह भी शामिल है जो नहीं कहा जा सका, पर सुन लिया गया. यह जरूरी नहीं कि हर मुलाकात नतीजों वाली ही हो. मुझे आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा. जितना संसार मैं आपका देख पाया डेफिनेटली उससे बड़ा संसार आपके भीतर है .....बहुत कुछ वह भी जिसे ढूंढ़े जाने की कोशिश नहीं की गयी. ज्यादा तो नहीं पर एक झलक तो पा ही ली मैंने आपकी. वी शुड टेक सम टाइम ...ओ.के.?'

'एक प्रोमिस ले सकती हूँ आपसे?'

'याह .....श्योर ......'

'यह रिश्ता हो न हो .....हम आपस में बात करते रहेंगे .....जहाँ भी तुम रहो या जहाँ भी मैं रहूँ .....आय डोंट वांट टु लूज़ यू ......एंड वन थिंग मोर ....वह मृत्यु जब घटित होगी मुझे बता जरूर देना ......एग्री?'

'हा ....हा ....हा ......पर अपनी मृत्यु की सूचना मैं तुम्हें भेजूंगा कैसे?'

'यही कहकर कि डोंट वेट ....आय एम नो मोर ......'

'और क्या करोगी सुनकर?'

'कुछ नहीं. एक दूसरी मृत्यु की तैयारी ......'

                                          

 

 

 

 

                                                      

 

 

#हमसफ़र

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