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हौसलों की उड़ान
हौसलों की उड़ान
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© sonam prajapati2013

Drama Inspirational

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साहिल अपने परिवार के खिलाफ जाकर एक अनाथ लड़की "रानी" से शादी कर लेता है। रानी उसके ऑफिस में उसके साथ ही जॉब करती है।

अपनी नयी ज़िन्दगी की शुरुआत करने से पहले दोनों माता वैष्णो देवी का आशीर्वाद लेने पहुँचते हैं। दर्शन के लिए जाते वक्त रास्ते में उन्हें एक नवजात बच्ची लाल चुनरी में लिपटी रोती हुयी मिलती है। इस रस्ते से गुजरने वाले सभी व्यक्ति बच्ची को देखते और चले जाते, रानी से इस बच्ची का रोना देखा नही जाता, वो बच्ची को गोद में लेकर सहलाती है तो बच्ची एकदम शांत होकर सो जाती है।

साहिल बच्ची के अपनों का पता लगाने की बहुत कोशिश करता है, पर कहीं कुछ पता नही चलता, अंततः साहिल व रानी बच्ची को माता रानी का आशीर्वाद मान अपना लेते हैं और उसे अपना नाम जोड़कर "सारा" नाम देते हैं।

साहिल जब अपने इस नए परिवार के साथ घर पहुँचता है, तो उसके बाबूजी ये बिल्कुल स्वीकार नही करते। वो साहिल को ये घर या इस बच्ची में से किसी एक को चुनने को कहते हैं, इस मासूम सी बच्ची को अब ऐसे छोड़ देना मुमकिन नही होता रानी और साहिल के लिए,

मगर साहिल अभी इतना आत्मनिर्भर भी नही होता की यूँ अचानक अपने घर से अलग होकर इतनी बड़ी जिम्मेदारी उठा सके। मगर फिर भी बच्ची की खातिर साहिल अपना ये घर छोड़ देता है। रानी साहिल को हौसला देते हुए कहती है, अगर इंसान हालात को न बदल सके तो उसे स्वीकार कर लेने से हालात इंसान को जरूर बदल देते हैं।

रानी साहिल के साथ वापस अपने उसी फ्लैट में आती है, जहाँ वो अपने जॉब टाइम से रह रही थी। रानी ने साहिल के साथ जो सपने सजाये थे एक परिवार में रहने के, वो ऐसे बदल जायेंगे, ये तो दोनों ने सपने में भी न सोचा था। मगर सारा का मासूम सुन्दर सा मुखड़ा देखकर दोनों अपनी हर परेशानी को भूलकर अपनी इस नयी दुनियां को सवांरने की कोशिशों में जुट जाते हैं।

अपनी सारा को बेहतरीन परवरिश देने के लिए दोनों ही अपनी-अपनी जॉब का समय अलग-अलग रखते हैं।

धीरे-धीरे दोनों मिलकर सारा के लिए सबकुछ मैनेज कर लेते हैं।

सारा जब दो महीने की होती है, तब भी उसके शरीर में ज्यादा कोई मूवमेंट नही होते हैं, सामान्य बच्चों की तरह सारा लेटे हुए करवट भी नही ले पाती। रानी अपनी सारा के संग खेलना चाहती है, उसको चहककर खिलखिलाते हुए देखना चाहती है, मगर सारा के प्यारे से चेहरे व उसके हाथ-पैरों में कोई चहक नही होती है।

डॉक्टर से पूरा चेकुअप कराने के बाद वो रिपोर्ट्स देखते हुए बताते हैं, सारा अपने शरीर से अपाहिज है। ये सुनकर साहिल व रानी के पैरों तले जमीं खिसक जाती है। जिस बच्ची को वो एक खुशहाल ज़िन्दगी देना चाहते हैं, उसका इतना बड़ा दर्द सहना बेहद मुश्किल है।

दोनों को ऐसे हताश देखकर डॉक्टर कहते हैं, सारा का इलाज केवल दवाइयाँ नही हैं, बल्कि इसका असली इलाज तो खुद आपके हाथ में ही है, सारा को मसल्स प्रॉब्लम्स है, वक्त के साथ ये प्रॉब्लम बढ़ती है, इसमें पूरा शरीर कमजोर होता जाता है। ऐसे में सारा की आत्मशक्ति इतनी द्रण होनी चाहिए की वो अपनी द्रण इक्षाशक्ति से अपने कमजोर शरीर में आत्मबल ले आये, और ये तभी पॉसिबल है, जब आप सारा के प्रति अपनी सारी नेगेटिविटी को अपने मन से मिटाकर सारा को फुल मेंटली सपोर्ट करेंगे। जब ऐसे बच्चे खुद पर विश्वास कायम कर लेते हैं तो इनकी ज़िन्दगी किसी दूसरे के सोच की मोहताज नही रहती, ये अपनी ऐसी खास शख्शियत विकसित करते हैं कि सच में ये सामान्य लोगों से भी बेहतरीन व कामयाब ज़िन्दगी जीते हैं।

रानी के मन में जो दर्द, डर था, वो अब एक उम्मीद व हौसलें में बदल गया। साहिल व रानी एकदूसरे से वादा करते हैं, कि हम अपनी सारा को इस काबिल बनाएंगे कि सारा न सिर्फ खुद अपना सहारा बनेगी बल्कि दूसरों का भी सहारा बनेगी, हमारी सारा एक बेहतरीन व कामयाब ज़िन्दगी ही जियेगी।

साहिल व रानी के विश्वास की इस चमक को देख वहाँ मौजूद सभी लोग उन पर गर्व करते हैं, और वहां पर फॉरेन की विकलांग संस्था की "एम.डी" मिस ग्रेसी भी मौजूद होती हैं, जोकि नन्ही सारा के मासूम सुन्दर से चेहरे को देख कर सम्मोहित हो जाती हैं, वो सारा को अडॉप्ट करना चाहती हैं, अन्य लोगों से बातों ही बातों में में उन्हें पता चलता है की सारा इनकी सगी बेटी नही है, ये जानकर मिस ग्रेसी साहिल से सारा को अडॉप्ट करने की अपनी इच्छा जाहिर करती हैं, मगर दोनों की इसके लिए साफ़ मना कर देते हैं, लेकिन मिस ग्रेसी उन पर दबाव डालते हुए कहती हैं, सारा आपकी सगी बेटी नही है और जब आपके अपने बच्चे होंगे तब उनके साथ में सारा का फ्यूचर इतना ब्राइट नही बन पायेगा, जितना की आप सोच रहे हैं, इसलिए हमारी बात मानिये, हम सारा को एक नयी दुनियां में एक खास ज़िन्दगी दे सकते हैं, फॉरेन में हम सारा को स्पेशल ट्रीटमेंट देंगे, और उसके वजूद को इतना ब्राइट बनाएंगे, जो यहाँ रहते आप सारा के लिए सोच भी नही सकते.

इस पर रानी कहती है, भविष्य में सारा की ज़िन्दगी क्या होगी ये तो हमने सच में नही सोचा है, क्योंकि भविष्य में सारा अपनी ज़िन्दगी के फैसले खुद डिसाइड करेगी, हम मानते हैं की आप सारा को अपने मुताबिक एक बेहतरीन ज़िन्दगी दे सकते हैं, लेकिन हम सारा की ज़िन्दगी को किसी दूसरे की सोच पर निर्भर नही बनने देंगे. हमारी सारा अपनी लाइफ को इंडिपेंडेंट जियेगी, हम उसे इस काबिल बनाएंगे की उसकी सोच जहाँ तक पहुँचे, उस मुकाम को वो हासिल करने में कामयाब भी हो सके.

रानी की आत्मद्रणता भरी बातें सुनकर मिस ग्रेसी कहती हैं, अगर सच में ऐसा होता है तो ये सारा के लिए सबसे बेहतर होगा. मगर सारा में मुझे कुछ ऐसा स्पेशल फील हुआ, जिससे मेरे दिल ने इसे अडॉप्ट करना चाहा. बाई द वे सारा इज ए अवर गॉड गिफ्टेड सेलिब्रिटी पर्सन... सो अगर लाइफ में कभी मुझे मौका मिला तो मैं ये प्रूफ भी करुँगी.

सारा की बेहतरीन परवरिश के लिए रानी जॉब छोड़कर अपने फ्लैट का एक रूम खाली कर उसमे ब्यूटी पॉर्लर शुरू करती है, इस काम का सुझाव और इसमें फाइनेंसियल तौर पर पूरी मदद साहिल करता है.

रानी पॉर्लर के साथ-साथ ही सारा का पूरा ख्याल रखती, पॉर्लर से थोडा सा भी फ्री होने पर सारा को एक्सरसाइज कराती और उसे हेल्थी डाइट भी देती. सारा जब बैठने लगती है तब रानी सारा के पास कुछ ऐसे खिलौने रखती है जिनसे खेलने के लिए सारा उनकी ओर आकर्षित होकर खुद ही खिलौनों को उठाने की कोशिश करे. शुरुआत में सारा खिलौने अपने हाथ में न उठा पाने की वजह से रोती है, लेकिन रानी सारा को खिलौनों से खेलने के लिए लगातार उत्साहित करती रहती है, सारा खिलौनों को पकड़कर उठाती है लेकिन खिलौने उसके हाथ से छूटकर गिर जाते हैं, सारा की इस बेबसी पर सारा की आँखों में आंसू देखकर रानी का दिल भी रो पड़ता है. लेकिन रानी अपने मन को दृण करते हुए सारा की नियमित एक्सरसाइज व दवाइयाँ और सारा के मन की कोशिशो को लगातार प्रोत्साहित करते हुए सारा के हाथों में इतना दम ले आती है की सारा खुद खिलौनों से खेलने लगती है, खिलौनों से खेलते हुए सारा के खिलखिलाते हुए चेहरे को देखकर रानी व साहिल को बहुत सुकून मिलता है.

सारा जैसे-जैसे बड़ी होती है, उसके आत्मविश्वास की चमक उतनी ही बढ़ती जाती है, सारा जब पांच वर्ष की होती है, तो रानी सारा का स्कूल में दाखिला कराती है, सारा पढ़ाई में बहुत होशियार होती है. सारा व्हीलचेयर पर निर्भर होती है, फिर भी सारा की स्मार्टनेस उसकी कुशाग्रबुद्धि को देखते हुए शहर के सबसे अच्छे स्कूल में उसका दाखिला हो जाता है. सभी टीचर्स सारा से बहुत खुश होते हैं, मगर स्कूल के बच्चे सारा को अलग नजरिये से देखते हैं, कोई भी सारा को अपनी दोस्त नही बनाता. रानी को सारा के प्रति बच्चों के इस व्यव्हार से थोडा दुःख होता है, मगर सारा इस बात को इग्नोर करते हुए अपनी माँ से कहती है, माँ आज ये लोग मुझसे दोस्ती नही करना चाहते मगर कल यही सब मेरे एक ऑटोग्राफ के लिए मेरे पीछे आएंगे.

सारा के इस पॉज़िटिव एटिट्यूड और उसके खूबसूरत ख्वाबों को देख रानी बहुत खुश होती है, मगर सारा के इन ख्वाबों को पूरा करने के लिए रानी व साहिल को अपने जीवन की हर छोटी-बड़ी ख़ुशी की कुर्बानी देनी होगी, बस सारा को ही अपनी दुनियां अपनी ख़ुशी मानकर अपने परिवार को और आगे नही बढ़ाया. समाज ने बहुत ताने दिए की जिस अपाहिज लड़की के लिए तुम अपनी ज़िन्दगी की खुशियों को कुर्बान कर रहे हो, वही सारा कल को तुम्हारा सहारा नही बन पायेगी. समाज की इन बातों को दरकिनार करते हुए साहिल व रानी एक बार फिर से ये द्रण संकल्प लेते हैं की हमारी सारा को हम इतना कामयाब बनाएंगे की वो न सिर्फ हमारा सहारा बनेगी बल्कि ऐसे समाज में सारा जैसे लोगों के प्रति इस मानसिकता को भी बदलेगी.

रानी जब अपने पॉर्लर के काम में व्यस्त होती है, तब सारा मॉडल्स के लुक में खुद को मेन्टेन करने की कोशिश करती, नन्ही सी सारा को सजने-संवरने का बहुत शौक होता है.

सारा के इस ग्लैमरस इमेजिनेशन को देख कर रानी समझ जाती है की सारा का ख्वाब क्या है. रानी भी सारा का सपोर्ट करने लगी. उसने सारा के रूम में ही एक ऐसी दुनियां बना दी थी कि बचपन से ही सारा ग्लैमरस लुक को अपने एक अलग खास अंदाज में मेन्टेन करने की कोशिश करने लगी, और इस सबके साथ ही साहिल ने सारा को बाहर की दुनियां की उस हकीकत से भी अवगत कराया, जिसकी सही समझ होना सारा के लिए बहुत जरुरी है. बढ़ते वक्त के साथ सारा की आकर्षक पर्सनालिटी में और उसके आत्मविश्वास में बहुत निखार आता है. सारा की कॉलेज लाइफ में एंट्री होते ही सारा की लाइफ में कई बदलाव आने लगे. व्हीलचेयर पर निर्भर होते हुए भी सारा के अट्रेक्टिव लुक और उसके आत्मविश्वास को देखते हुए कॉलेज के टीचर्स ने सारा को सपोर्ट करते हुए मिस इंडिया डेफ की प्रतियोगिता में सारा के पार्टिसिपेशन के लिए सारा के पैरेंट्स से बात की, सारा बहुत उत्साहित होती है, उसके हौंसले और भी बुलंद हो जाते हसीन. सारा के सपनों को जैसे पंख लग गए. उसे अपना हुनर दिखाने का प्लेटफार्म जो मिल गया, मगर इसके बीच सारा के लिए सबसे बड़ी बाधा बनी रही, व्हीलचेयर, फुल टैलेंटेड सारा ने अपने एक खास अंदाज में व्हीलचेयर रैंप वॉक कर फर्स्ट राउंड में ही सबका दिल जीत लिया, एक जाने-माने ड्रेस डिज़ाइनर सारा की मदद के लिए आगे आये, उन्होंने मुफ़्त में हर राउंड के लिए सारा के ड्रेसेस डिज़ाइन किये. सारा को ग्रूमिंग में भी बहुत सहायता की, ये सब वो इसलिए कर रहे थे, क्योंकि सारा के रूप में उन्हें डिसएबिलिटी पर्सन्स के लिए एक ऐसा आइडल मिल गया, जिसके जरिये वो अपना एक फाउंडेशन बना कर ऐसे लोगों के लिए बहुत कुछ करना चाहते हैं.

सारा मिस इंडिया डेफ प्रतियोगिता की हर पायदान पार करती गयी, उससे प्रश्न भी पूछे गए और अन्ततः कोमल ह्रदय सारा की बोल्डनेस ने जीत सारा की झोली में ही डाल दी... और इस जीत ने सारा को उस मुकाम पर ला दिया, जिसका ख्वाब वो बचपन से देखती आ रही थी, सारा सभी के सामने सबसे पहले शुक्रिया अदा अपने पेरेंट्स का करते हुए कहती है, कोई भी मेरे जैसा व्यक्ति अपाहिज अपने तन से नही बल्कि उसकी निगेटिव सोच, अपने मन से होता है. और आज मुझे अपने से ज्यादा गर्व अपने पेरेंट्स पर हो रहा है, क्योंकि आज मैं जिस मुकाम तक पहुँची हूँ इसकी पाजिटिविटी इसका एक माहौल मेरे पेरेंट्स ने मुझे बचपन से ही दिया है. कहते हैं की इंसान तो सब एक जैसे ही होते हैं मगर उनको किसी से अलग, सबसे खास बनाते हैं उनके विचार और आसपास का माहौल... मैंने भी ज़माने की बहुत सी बातें देखी व सुनी हैं मगर मुझ पर जिसका असर हुआ, वो हैं मेरे पेरेंट्स की मेरे प्रति द्रण सकारात्मक सोच.... अगर वो उस वक्त हार मान लेते तो आज मैं इस मुकाम पर आकर नही जीत पाती.

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