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Bicycle (The Riddle of Race Track)
Bicycle (The Riddle of Race Track)
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© Akarshan Sharma

Drama Inspirational Thriller

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ओलम्पिक गेम जो की चार साल में सिर्फ एक बार होती है और ये साल ओलम्पिक का साल है। लेकिन इस साल ओलम्पिक में साइकिल की प्रतियोगिता में बहुत से देशों ने हिस्सा लिया है। इसीलिए ओलंपिक मैनेजमेंट ने कुछ गिने-चुने देश में साइकिल की छोटी-छोटी प्रतियोगिता रखी जिसमे से जीता हुआ खिलाड़ी ओलंपिक के फ़ाइनल के लिया जा सकेगा और जो हारा वो बाहर। ऐसी एक प्रतियोगिता के लिए हिंदुस्तान को भी चुना गया।

इसीलिए कहानी की शुरुआत होती है दिल्ली के एक स्टेडियम से जहाँ आज वैसी ही एक रेस होने वाली है। आज इस रेस में छह देशों ने हिस्सा लिया है और हर देश की ओर से सिर्फ एक खिलाडी इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहा है। इन छह खिलाडियों में से जो पहले तीन स्थान पर आयेगा उसे फाइनल के लिया चुना जायेगा और बाकी को ओलंपिक से बाहर कर दिया जायेगा। इस रेस में सिर्फ खेल से सम्बंधित लोग ही इस प्रतियोगिता को देखने आये है।

हिंदुस्तान की ओर से “गौरव” इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहा है। प्रतियोगिता शुरू होने में अभी कुछ वक़्त है ज़हीर गौरव के कमरे के अन्दर आता है और उसे तैयार होने को कहता है। गौरव ने अपने माँ-बाप को नहीं बताया कि वो साइकिल सीख रहा था और आज रेस में हिस्सा लेने जा रहा है क्यूंकि वो जानता हैं कि उसके माँ-बाप इसके लिए उसे कभी हाँ नहीं करेंगे। लेकिन जब वो जीत जायेगा शायद तब वो हाँ कर दें। अब वो वक़्त आ गया है जब रेस शुरू होने लगी है। सभी खिलाडियों के साथ गौरव भी मैदान पर पहुँच जाता है। वो आस-पास बैठे कुछ लोगो को देखता है जिन्हें आज गौरव से बहुत उमीदें हैं, उसका कोच और उसके दोस्त, लेकिन गौरव डरा हुआ था। जाने कौन सी ऐसी चीज़ थी जो उसे डरा रही थी। सभी खिलाड़ी अपनी अपनी साइकिल पर बैठ जाते हैं। एक फायरिंग होती हैं और सभी खिलाड़ी तेजी से साइकिल भगाना शुरू कर देते हैं।

अब तक सभी खिलाडी बराबर ही साइकिल भगा रहे होते हैं लेकिन अचानक उन सबमे से गौरव तेजी से साइकिल चला सबसे आगे निकल जाता है। उसकी रफ़्तार देख सभी हैरान रह जाते हैं। उसके और बाकी खिलाड़ियों के बीच फासला बहुत ज्यादा हो जाता है। जिससे ये साफ़ ज़ाहिर हो जाता है की आज की ये प्रतियोगिता गौरव ही जीतेगा। उसकी ये रफ़्तार कायम रहती हैं अब भी खिलाडी उससे काफी दूर होते है।

अब गौरव के लिए जीत बस कुछ ही दूरी पर रह गयी है ओर वो सबसे आगे है और बाकी के खिलाड़ी बहुत पीछे छोड़ दिए हैं उसने। गौरव फिनिशिंग लाइन के पास है और सबसे आगे। गौरव् साइकिल भगाते हुए दाहिने तरफ बैठे अपने कोच की तरफ देखता है जो  अपनी सीट से खड़े हो गए हैं और मुस्कुरा रहे हैं। क्यूंकि उन्हें लग रहा है की गौरव जीत ही चुका है। फिर गौरव अपनी नजर उनसे हटाकर ट्रैक के सामने की और फिनिशिंग लाइन की ओर करता है। उसकी नजर जैसे ही फिनिशिंग लाइन पर जाती है वो बहुत हैंरान हो जाता है और उसके चेहरे पर घबराहट शुरू हो जाती है। वो एक दम से अपनी साइकिल को रोक देता है। उस स्टेडियम का नजारा पूरी तरह से बदल चुका होता है जैसे वो किसी और ही दुनिया में पहुँच गया हो।

 गौरव सामने फिनिशिंग लाइन की ओर देखता है जहाँ का मौसम पूरा बदल चूका है। काले घने बादल छाए हुए हैं और इक अनजान आदमी जो उससे आगे है फिनिशिंग लाइन की ओर साइकिल भगा रहा है और पूरे स्टेडियम से “अर्जुन-अर्जुन” की आवाजें आ रही हैं। वो ये आवाजें सुन कर जब अपनी नजर उस आदमी से हटा कर ऑडियंस की तरफ करता है तो देखता है जो स्टेडियम सिर्फ90-100 लोगो से भरा था अब वो पूरा खचाखच भरा है और उन ऑडियंस में ना कोई उसका दोस्त है और ना ही कोई उसका कोच। वो सभी चेहरे अंजान थे और वो पहली बार उन चेहरों को देख रहा था। वो अभी भी अर्जुन अर्जुन चिल्ला रहे हैं कि अचानक वो चिलाना बंद कर देते हैं। तभी गौरव अपनी नजर उन लोगो से हटा वापिस सामने फिनिशिंग लाइन की ओर करता है। अब वो देखता है वो आदमी जो साइकिल भगा रहा है अचानक से वो दाहिने तरफ बहुत बुरी तरह से साइकिल से गिर जाता हैं।

उसकी साइकिल एक तरफ गिरी पड़ी होती है और वो पीठ के बल लेट जाता है। इतने में गौरव देखता है की एक अनजान औरत जो ऑडियंस में बैठी थी, वो ट्रैक पर आ जाती है और उसी आदमी की तरफ भागने लग जाती है अर्जुन अर्जुन चिल्लाते हुए। वो आदमी जो पीठ के बल लेटा था वो लेटे हुए ही अपनी गर्दन उठा तड़पता हुआ गौरव की तरफ देखने लग जाता है तब तक वो औरत भी उस आदमी के पास पहुँच जाती है और उसके पास बैठ जाती है। वो भी गौरव की तरफ देखने लग जाती है। ये देख गौरव पूरी तरह से घबरा जाता है और अपनी आँखें बंद कर लेता है और जोर जोर से साँसे लेने लगता है। कुछ सेकंड्स बाद जब वो अपनी आँखें खोलता हैं तो देखता हैं की सामने फिनिशिंग लाइन पर कुछ भी नहीं था। वो स्टेडियम और वो ट्रैक फिर वैसा का वैसा सामन्या है। वही दोस्त, वही कोच और वही 90-100 लोग। इतने में जो लोग उसके साथ रेस लगा रहे थे एक दम तेजी से एक एक करके सभी उससे आगे निकल जाते हैं और फिनिशिंग लाइन को क्रॉस कर लेते है और गौरव वहीँ खडा रह जाता हैं सबसे आगे होने के बावजूद भी और फिनिशिंग लाइन के बहुत करीब पहुंचे के बाद भी वो हार जाता है।

गौरव की इस हार से हिंदुस्तान इस साल ओलिंपिक से बाहर हो गया। लेकिन गौरव के हारने की वजह सिर्फ गौरव ही जानता था। जिन लोगों ने इस रेस को देखा था कि जिस तरह से गौरव खुद ही रुक गया फिनिशिंग लाइन पर आकर। सभी यही समझ रहे थे कि गौरव जानबूझ कर हारा था और उसे सभी उसे ग़द्दार समझ रहे थे। जिसके चलते साइकिल फेडरेशन ऑफ़ इंडिया ने गौरव को पूरी उम्र के लिए बैन कर दिया। जिसका मतलब था की अब गौरव कभी भी हिंदुस्तान की और साइकिल की किसी रेस में हिस्सा नहीं ले सकेगा। उसका कैरियर ख़त्म हो गया था।

सिर्फ एक प्रिया थी जो गौरव की बातों पर विश्वास कर रही थी। प्रिया गौरव के कोच प्रताप की बेटी है और गौरव की बहुत अच्छी दोस्त भी। इसीलिए प्रिया गौरव मिलने उसके कमरे गयी। जहां उसने बताया की नीचे माहौल बहुत खराब हो चुका है मीडिया, अख़बार और बाकी सभी नीचे इकठा हुए और तरह तरह के सवाल उठा रहे हैं और तुम पर गद्दार जैसे कलंक लगा रहे हैं। इसीलिए प्रिया गौरव को सलाह देती हैं कि तुम्हे गाँव वापिस चले जाना चाहिए कुछ वक़्त के लिए। लेकिन गौरव कहता हैं की मैं बेकसूर हूँ मैं वापिस नहीं जाऊंगा।

इतने में पांच छह लड़के आते हैं जो की खुद भी साइकिल रेसर हैं जो गौरव से जलते थे क्यूंकि उसे रेस के लिए चुन लिया गया था। उन सब के हाथो में बेस बॉल हैं और गौरव के कमरे के दरवाजे को जोर जोर से खटखटा रहे हैं और साथ में गद्दार-गद्दार भी बोल रहे हैं उन लोगो को एक मौका मिला हैं इसीलिए वो भड़ास निकलने आये हैं। अन्दर प्रिया ये देख  घबरा जाती है। प्रिया गौरव को पीछे के रास्ते से निकलने को कहती है। बहुत समझाने के बाद जाकर गौरव प्रिया की बात मानता है और पिछले दरवाजे से भाग जाता है। इतने में वो लड़के वो दरवाजा तोड़ कर अन्दर आ जाते हैं और देखते हैं कि अन्दर सिर्फ प्रिया है। गौरव के लिए वो अनजान लोग अभी भी एक रहस्य थे जिसने उसका कैरिअर बर्बाद कर दिया था और फिर से शहर छोड़ कर वापिस अपने गाँव जा रहा था। लेकिन अपने साथ एक गद्दार का कलंक लेकर, लेकिन गौरव ने ये अनजान चेहरे पहली बार नहीं देखे थे।

इसकी शुरुआत हुई थी गौरव के गाँव उत्तराखंड से। जहाँ वो अपने माँ-बाप के साथ रहता था। उसकी उम्र उस वक़्त इक्कीस साल की थी। उसकी स्कूल की पढाई पूरी हो चुकी थी। गौरव के गाँव मेंतीन और दोस्त थे। जिसके साथ वो सारा दिन बिताता था और वो खूब मस्ती शरारतें करते थे। गौरव ज़िन्दगी में कुछ बड़ा करना चाहता था। जिससे उसका, उसे गाँव और उसके माँ-बाप का नाम हो, लेकिन बचपना होने की वजह से वो अपने टार्गेट से वाकिफ नहीं था। गौरव अपने लक्ष्य को जानता हो या न हो लेकिन किस्मत जानती थी वो क्या बनेगा। एक दिन जब गौरव के पिता सुबह-सुबह गाँव से शहर को निकल गए कुछ सामान लाने के लिए तो वो जल्दबाजी में अपना बटुआ भूल गए। जब गौरव की माँ को उनका बटुआ दिखा तो उसने गौरव को वो बटुआ दिया और बाबू जी को देने को कहा। चूंकि उन्हें निकले आधा घंटा हो चुका था इसीलिए गौरव की माँ जल्दी उन तक ये पर्स भेजने को कहा। गौरव बटुआ लेकर अपने पापा की तरफ भागने लगा। उसकी नजर अपने दोस्त पर गयी जो साइकिल से उसी की तरफ आ रहा था। उसने अपने दोस्त से साइकिल ली और तेजी से अपने पापा की तरफ साइकिल पर जाना शुरू कर दिया।

वो साइकिल को सड़क पर तेजी से चला रहा है। ये एक चौडी सिंगल सड़क है जिसके दाएं-बाएं खेत हैं। गौरव उसी सड़क पर साइकिल तेजी से भगा रहा है, कि अचानक से आस्मां पर काले घने बादल छा जाते हैं। गौरव बदलो की तरफ देखता है तो हैरान हो जाता है अचानक से उसे अर्जुन-अर्जुन नाम की आवाजे सुनाई देने लग जाती हैं चारो और से। जैसे की बहुत सारे लोग इकठा बोल रहे हों। वो अचानक से साइकिल को रोकता है। और आस-पास सिर्फ घुमा कर देखता है कोई नहीं होता है लेकिन आवाजे अभी भी आ रही हैं लोगो की जो अर्जुन-अर्जुन बोल रहे हैं। अचानक से आवाजें बंद हो जाती हैं। अर्जुन को ऐसे लगता है की जैसे कोई उसका पीछा कर रहा है। अर्जुन घबराता हुआ सर पीछे की ओर घुमाता है तो देखता है इक आदमी जो सपोर्ट साइकिल पर है और साइकिल रेसर की ड्रेस डाली हुई है और सर पर हेलमेट, तेजी से उसकी तरफ साइकिल चलाते हुए आ रहा है। वो ये देख कर हैंरान हो जाता है क्यूँ कि गौरव ने उसे कभी नहीं देखा। वो आदमी उसकी तरफ देख रहा है और मुस्कुरा रहा है बहुत डरावने तरीके से। उसे तेजी से अपनी ओर आता देख गौरव तेजी से अपनी साइकिल भगाना शुरू कर देता है। वो बहुत तेजी से भगाता जाता है साइकिल। साइकिल को आधा मिनट तेज से भागने के बाद वो रफ़्तार धीरे कर देता है।

साइकिल की रफ़्तार बहुत धीरे होती है अब गौरव पीछे मुड कर देखता है साइकिल चलाते हुए तो पीछे कोई नहीं होता है। जो बादल काले हुए थे अब वो पहले जैसे हैं। गौरव पीछे देखते हुए जा रहा होता है कि अचानक उसे हॉर्न की आवाज सुनाई देती है वो जैसे ही वापिस सामने देखता है, तो एक बड़ा सा ट्रक उसके सामने बहुत करीब पहुँच चुका होता है। वो एक दम अपनी साइकिल को बाएँ तरफ करता है और बहुत करीब फर्क से बच जाता है। क्यूंकि सड़क सिंगल लेन थी तो गौरव् जैसे ही बाईने तरफ घुमाता है सीधा खेतों में घुस जाता है। उसका साइकिल एक बड़े से पत्थर से टकराता है और वो साइकिल से निचे गिर जाता है पीठ के बल और बाहें फैला कर लेता होता है वो आसमान की और देख रहा होता है। गौरव बिलकुल वैसे ही लेटा होता है जैसे उसने उस रेस में आदमी को जमीन पर लेटा हुआ देखा था। वो जैसे अपनी नजर दायिने खेतों की तरफ करता है तो देखता है एक औरत उसकी तरफ दोड़ती आ रही है अर्जुन-अर्जुन चिलाते हुए। ये वही औरत थी जो गौरव को शुरआती रेस में ट्रैक पर दिखयी दी थी। ये देख अर्जुन की साँसे तेज हो जाती है और वो झट से अपनी ऑंखें बंद कर लेता है और गहरी गहरी साँसे लेने लग जाता है। कुछ सेकंड्स बाद वो आवाजे बंद हो जाती है तो गौरव धीरे धीरे अपनी ऑंखें खोलता तो देखता है वहां कोई नहीं होता है, अचानक उसके पास उसके पिता पहुँच जाते हैं गौरव को लेटा देख वो उसे उठने को बोल रहे होते हैं। गौरव को सब धुंधला दिखाई दे रहा होता हैं और वो बेहोश हो जाता है।

अब तक गौरव की ज़िन्दगी सामान्य थी लेकिन अब सवालों से भरी हुई। जिसका जवाब किसी के पास नहीं था। आखिर कौन थे वो क्या रिश्ता था उनका गौरव से। कौन था अर्जुन, कौन थी वो औरत और कौन थे वो लोग जो –अर्जुन-अर्जुन चिल्ला रहे थे। गौरव को ये एहसास हो गया था कि वो कोई सामान्य लड़का नहीं था। कुछ तो था जो उससे छुपाया जा रहा था या उसे पता नहीं था। गौरव इस चीज़ से भी वाकिफ हो गया था कि उसका साइकिल रेस से बहुत गहरा रिश्ता था। लेकिन गौरव इसका जवाब जानना चाहता था। इसीलिए एक दो बार वो फिर जानबूझ कर साइकिल को भगाने की कोशिश की। इस बार फिर से उसे कुछ ऐसे ही लोग देखे। फिर से उसे वो आदमी दिखा जो मुस्करा कर उसकी तरफ आ रहा था। फिर से उसे लोगो की आवाजें सुनाई दीं जो अर्जुन-अर्जुन चिला रही थीं।

अब तो नींद में भी उसे वही लोग दिखने लगे थे जिस वजह से वो सो नहीं पा रहा था। लेकिन वो बात करता भी तो किस से , कोई भी उसकी बात का यकीन नहीं करता और सब उसे पागल ही कहते। उधर जब गौरव के घरवालो को पता लगा कि जिस दिन से वो साइकिल से गिरा है उन्होंने उस साइकिल चलाने से मना कर दिया था क्योंकि उस दिन के बाद से उनको गौरव बहुत बदला बदला और अपने आप में खोया सा लग रहा था। एक दिन गौरव के गाँव दिल्ली के कॉलेज से दोस्तों का एक ग्रुप आया। उन सभी स्टूडेंट्स को कॉलेज से प्रोजेक्ट मिला था गाँव के लाइफ स्टाइल पर डाक्यूमेंट्री बनाने का। इसीलिए वो स्टूडेंट्स और दोस्त डाक्यूमेंट्री बनाने गौरव के गाँव पहुंची। उस ग्रुप में कुछ लड़के और कुछ लडकियां थी। जिसे गाँव के लोग देख बहुत हर्षित से हो गए थे। उस ग्रुप में एक लड़की थी प्रिया। किसी तरह से प्रिया और गौरव के बीच दोस्ती हो गयी। प्रिया ने गौरव को अपने बाकी दोस्तों से भी मिलाया। एक दिन जब दोनों में बातचीत बढ़ी तो गौरव ने प्रिया से पूछा की उसे पापा क्या करते हैं, तब प्रिया ने बताया कि उसके पिता साइकिल फेडरेशन ऑफ़ इंडिया में साइकिल कोच हैं।

हिंदुस्तान की ओर से साइकिल प्रतियोगिता लड़ने के लिए वो साइकिल रेसर्स तेयार करते हैं। ये सुन कर गौरव चौंक गया, वो सोचने लग गया था कि उसके सवालों का जवाब और कहीं नहीं बल्कि इन्ही रेस में मिल सकेगा। अब तक जो गौरव ने देखा था उससे ये तो उसे साफ़ ज़ाहिर हो चुका था कि उसका साइकिल रेस से कुछ तो संबंध हैं। इसीलिए उसने प्रिया से यूँही झूठ बोला कि वो भी एक साइकिल रेसर बनना चाहता है, उसका सपना है ये तो प्रिया ने कहा फिर तो तुम्हारी दोस्ती सही लड़की से हुई है। उसके दोस्तों की डाक्यूमेंट्री ख़तम होने तक प्रिया और गौरव में बहुत गहरी दोस्ती हो जाती है और जाने से पहले प्रिय गौरव को अपना नंबर देकर जाती है और दिल्ली आने के लिए कहती है और कहती है कि अगर आगे बढना चाहते हो तो इस गाँव से आगे निकलो।

लेकिन अब अगर कोई परेशानी थी तो घर वालो को मनाने की। इसीलिए गौरव ने अपने माँ-बाप को बहुत मनाया लेकिन उसके घर वाले उसे दिल्ली भेजने के लिए राजी नहीं हुए। बहुत दिन तक ये ड्रामा चलता रहा, गौरव अपने माँ-बाप को मनाता रहा। उसने बहुत नौटंकियां की जैसे बूख हड़ताल, कमरे में खुद को बंद करना और फिर एक दिन उसके माँ-बाप उसकी जिद् के सामने हार गए और उसे दिल्ली भेजने के लिए राजी हो गए। यहीं से गौरव की शुरुआत की दिल्ली के लिए। गौरव अपना सामान लेकर दिल्ली पहुँच गया और प्रिया ने उसे रेलवे स्टेशन से ले लिया। प्रिया गौरव को दिल्ली में पाकर बहुत खुश थी। वो उसे अपने पापा प्रताप के पास ले गयी। 

यहीं से शुरआत हुई उसके करियर की, किस्मत उसे यहाँ ले आई। प्रताप ने अपनी बेटी के कहने पर गौरव को रेसर बनाने के लिए हाँ कर दी। इस साल ओलंपिक आने वाला था और उसे बेस्ट रेसर चाहिए था। इसीलिए उसने सभी को ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। गौरव ने भी अपनी जी जान से ट्रेनिग में हिस्सा लिया। हालाँकि इस बीच उसे नींदों में या बीच बीच में वो लोग दिखाई देते थे। लेकिन उसने आगे बदने की ठान ली थी और बहुत कम वक़्त मेंगौरव ने अपनी एक पहचान बना ली थी। बाद में आने के बाद भी गौरव बढ़िया रेसर में माना जाने लग गया था। गौरव की रफ़्तार देख कर कोच प्रताप हैंरान थे। प्रताप को गौरव में इस साल का ओलिंपिक रेसर दिख रहा था। इसीलिए वो गौरव पर जादा धयान देते थे। यही वजह थी कुछ लड़के उससे जलते थे और उससे पंगे लेते थे। ये वही लड़के थे जब गौरव को गद्दार करार कर दिया था तब वो उसे मारने उसके कमरे तक आये थे।

हालाँकि इस साल ओलिंपिक में हिस्सा लेने के लिए प्रताप के कुछ स्टूडेंट्स ने पैसे देने की कोशिश की तो किसी ने सिफारिश करायी। लेकिन प्रताप का दिल गौरव आ चुका था। इसिलिय प्रताप ने टैलेंट को चुना। गौरव प्रताप सभी रेसर्स में से अच्छा था, इसीलिए प्रताप ने फैसला कर लिया उसे ओलिंपिक में उतारने का। लेकिन इससे पहले उसे साइकिल फेडरेशन ऑफ़ इंडिया को ये साबित करना था कि गौरव वाकई में सबसे बेहतर था। इसीलिए साइकिल फेडरेशन ने प्रताप के टॉप-पांच  रेसर के बीच एक रेस रखी। जिसमे गौरव भी मौजूद था। इस रेस को देखने सिर्फ फेडरेशन का स्टाफ ही आया था। प्रताप को ये यकीन था की गौरव ही जीतेगा। इसीलिए जब रेस शुरू हुई वही हुआ शुरुआतत में ही गौरव सबसे आगे निकल गया। उसने बाकी रेसर्स को बहुत पीछे छोड़ दिया। जिसे देख कर सब हैंरान थे। लेकिन फिर वही हुआ जो उसके साथ पहले भी होता था। जैसे ही वो फिनिशिंग लाइन के एक दम करीब पहुंचा, उसके सामने का नजारा फिर से बदल गया। सामने काले बादल छा गए। एक आदमी जो की उससे आगे हैं रेसर की ड्रेस में सपोर्ट साइकिल चला रहा है। ये देख कर गौरव एक दम से साइकिल रोक देता हैं। वो देखता हैं चारों ओर से अर्जुन-अर्जुन की आवाजें आ रही होती हैं। वो जैसे ऑडियंस की तरफ नजर घुमाता हैं तो स्टेडियम खचा-खच भरा होता हैं जो कि सिर्फ पहले कुछ ही स्टाफ से भरा था। वो पीछे मुड कर देखता हैं तो उसे वही रेसर्स दिखता है जो उसे गाँव में सड़क पर दिखा था जो डरावने तरीके से मुस्कुरा रहा था। वो ये देख कर डर जाता है और जोर-जोर से गहरी साँसे लेने लग जाता है उसे फिर से सब कुछ धुंधला दिखाई देने लग जाता है और बेहोश हो कर गिर जाता है। सभी स्टाफ भाग कर गौरव के पास पहुँचता है और उसे डॉक्टर के पास ले जाया जाता है। जहाँ डॉक्टर बताते हैं कि शरीर में विटामिन्स की कमी के कारण बेहोशी छा गयी है डरने वाली कोई बात नहीं।

उधर प्रताप साइकिल फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के प्रेसिडेंट्स और उसके बाकि के मेम्बरों के बीच बैठा होता है जहाँ पर चर्चा गौरव के ही बारे में हो रही होती है। गौरव के अन्दर शारीरिक कमी होने के वो फिनिशिंग से पहले ही बेहोश हो गया। लेकिन जिस तरफ से उसकी रफ़्तार थी वो जीत जाता अगर बेहोश न होता। उसी को देखते हुए गौरव को ओलिंपिक के लिए चुन लिया गया। जिसे सुन गौरव और प्रिय दोनों ही बड़े खुश होते हैं लेकिन साथ साथ गौरव को अभी उसके सवालों का जवाब मिला नहीं था। उसकी ज़िन्दगी उसके लिए एक रहस्य थी। उसकी सिलेक्शन से कई रेसर उसके दुश्मन भी बन गयी। और उसके बाद वाही रेस हुई जो सबसे पहले पेज पर दिखाई गयी ओलिंपिक की। जिसमे गौरव हार गया और उसे उम्रभर के लिए बेन कर दिया गया और वो वापिस गाँव के लिए निकल पड़ा।

गौरव अब वापिस गाँव पहुँच गया है। जिसे देख कर उसके माँ-बाप और उसके दोस्त बहुत खुश हैं। लेकिन गौरव परेशान और हैंरान था। क्यूंकि जिस सवाल के जवाब के लिए गौरव दिल्ली गया उसे न तो उसके जवाब मिले और उल्टा उस पर देश को हारने का इल्जाम लग गया था। पहली बार गौरव खुद की क़ाबलियत से वाकिफ हुआ था जो कि साइकिल रेस थी, लेकिन उसमे भी नाकामयाबी मिली। वजह थी वो अंजान लोग। जिसका रहस्य अब भी बरकार था। उसके जानबूझ कर हारने की खबर पानी की तरह फैली और उसके गाँव तक पहुँच गयी। जहाँ पर सब उससे नफरत करने लग गए। गौरव सारा दिन सभी दोस्तों से अलग अकेले चुप-चाप बिताता। वो खुद पर लगे इस दाग को मिटाना चाहता था। दिन में उसे खुद पर लगे आरोप याद आते रहते और रात में नीद में वो अनजान लोग। एक दिन उसकी मदद करने के लिए भगवान ने उसकी ज़िन्दगी में एक सख्श को भेजा। जिसका नाम था विजेंद्र जो की पचास साल का था, विजेंद्र गौरव के गाँव आया और उससे मुलाकात की, पूछने पर विजेंद्र ने बताया की किसी वक़्त पर वो भी साइकिल कोच थे इंग्लैंड में, लेकिन अब वो रिटायर हैं। उसने बताया उसने तुम्हारी ओलिंपिक की रेस देखी जिसमे तुम हार गए। सब तुम्हे गलत समझ रहे हैं लेकिन सिर्फ मुझे पता है की तुम जानबूझ कर नहीं हारे। गौरव ने पुछा क्या तुम जानते हो मैं क्यूँ हारा, तो विजेंद्र ने बताया कि नहीं लेकिन हाँ जिस वजह से तुम हारे और जो भी तुम्हारे दिल में सवाल है तुम्हे वक़्त आने पर उसके जवाब मिल जायेगा। लेकिन इस वक़्त अगर कुछ जानना जरूरी है तो वो है की तुम पर लगे इस कलंक को कैसे मिटाया जाये।

गौरव विजेंद्र की कहानियों और उसकी बातों से काफी आकर्षित होता है। विजेंद्र उसे भरोसा दिलाता है की वो उस पर लगे इस कलंक और इस बेन को हटा देगा। इसिलिए गौरव विजेंद्र को अपना गुरु बना लेता है। विजेंद्र ने उसे एक रास्ता दिखाया कि तुम भले ही हिंदुस्तान की तरफ कोई रेस नहीं लड़ सकते लेकिन एक ऐसी जगह है जहाँ तुम्हारे बैन को कोई नहीं पूछे अगर कुछ पूछेगें तो सिर्फ टैलेंट। गौरव के पूछने पर विजेंद्र ने बताया वो है गिनीज बुक। तुम ।हिंदुस्तान की तरफ से नहीं लड़ सकते लेकिन तुम अभी भी गिनीज बुक में अपना टैलेंट दिखा सकते हो। विजेंद्र ने गौरव को मना लिया और बताया कि जो रेस तुमने पहले की वो बस एक सिंपल रेस थी लेकिन अब जो तुम करने जा रहे हो तुमे उस रेस को करने के पहले तीन गुना तेज साइकिल भगाना होगा।

गौरव अपने ऊपर इस कलंक को हटाने के लिए बहुत मेहनत करता है जिसमे विजेंद्र उसका साथ देता है। वो दिन रात एक कर देता है प्रैक्टिस करता रहता है। विजेंद्र ने गौरव को एक बना बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ कर इक नया खुद के नाम का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने को कहा। फ्लाइंग २०० मीटर टाइम ट्रेलl नाम की केटेगरी है ओलम्पिक में जिसमे एक मुसलमान रफीक का वर्ल्ड रिकॉर्ड था। जिसमे उसने 200 मीटर के ट्रैक को ९१३८४७ सेकंड्स में पूरा किया था। ये ओलंपिक्स में बनाया गया था लेकिन वर्ल्ड रिकॉर्ड भी गिना जाता था क्यूँकि इतने कम सेकंड्स में अभी तक सिर्फ इसी शख्स ने ये ट्रैक पार किया था।

अब विजेंद्र ने गौरव को ये रिकॉर्ड तोड़ने की बात की। तुम इससे कम वक़्त में 200 मीटर का ट्रैक पार करोगे और तुम्हारी इस विडियो को गिनीज बुक में सबमिट कराया जायेगा। जैसे रफीक ने ओलिंपिक के ज़रिये वर्ल्ड रिकॉर्ड बने वैसे ही तुम भी गिनीज बुक के ज़रिये नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाओगे। ये ओलिंपिक में गिना नहीं जायेगा लेकिन वर्ल्ड रिकॉर्ड में तुम्हारा नाम ही गिना जायेगा। और इस रिकॉर्ड की तारीफ हर जगह होगी।

गौरव इसके लिए हाँ कर देता। बहुत अड़चनें आती हैं बहुत बार फ़ैल होता है बहुत बार मेहनत करने के बाद गौरव ने २०० मीटर के रफीक के ९१३४७८७ सेकंड्स  के रिकॉर्ड को तोड़ कर पूरे 9सेकंड्स में पूरा कर दिया था। जब इसकी विडियो गिनीज बुक में सबमिट करायी गयी। सभी गौरव की रफ्तारार को देख कर हिल गए। ये विडियो हर जगह शेयर हो गयी। ये गिनेस बुक के लिए भी गर्व की बात थी की वर्ल्ड रिकॉर्ड में जिस गौरव का नाम वो पेश करने जा रहे थे वो ओलिंपिक के बजाये गिनीज़ की तरफ से था। जिसके बाद गौरव का नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में जोड़ दिया जाता है। इसके बाद तो जैसे गौरव की ज़िन्दगी बदल सी जाती है।

उसके गाँव सब उसकी बहुत तारीफ करने लग जाते हैं उसे मानने लग जाते हैं। अगले दिन अखबारों, मीडिया में गौरव के बारे में बताया जाने लगता है। गौरव ने ये साबित कर दिया था की वो एक बेस्ट रेसर है। लेकिन इस बीच उसे वो लोग अभी भी दिखाई देते थे लेकिन उसने खुद के दिमाग को स्ट्रोंग रखा और वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। उकी हर तरफ चर्चा होने लग गयी। प्रिया ने भी उसे बधाई दी फोन पर। लेकिन अगले दिन सब बदल गया। रफीक को जब पता चला किसी गौरव नाम के शक्श ने उसका रिकॉर्ड तोड़ 9 सेकंड में बना दिया उसे बहुत गुस्सा आया। रफीक गिनीज़ को फोन करके ऐलान कर दिया वो आप लोगो के ज़रिये ही नया रिकॉर्ड बनाएगा। गिनीज़ बुक के लिए और भी फख्र की बात भी उनके प्रॉफिट बाद रहे थे। अगले दिन अखबार मीडिया में सब जगह ऐलान कर दिया की वो नया रिकॉर्ड बनेयेगा। सभी हैंरान थे की क्या होगा।

 कुछ दिन बाद रफीक ने भी रिकॉर्ड बनाने की कोशिश की। सभी परेशान थे क्या गौरव का नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में बरकार रहेगा या रफीक तोड़ देगा। जब रफीक फिर से रिकॉर्ड तोड़ने की कोशिश करता। वो गौरव का रिकॉर्ड तोड़ तो नहीं पता लेकिन वो भी २०० के ट्रैक को 9९सेकंड्स में ही पूरा कर लेता है। ये एक इत्तेफाक ही था की जिस सेकंड्स में गौरव् ने रिकॉर्ड बने उतने ही सेकंड्स में रफीक ने भी रिकॉर्ड बना दिया। चूंकि वर्ल्ड रिकॉर्ड में सिर्फ एक रेसर का ही नाम डाला जा सकता है ये सवाल जब रफीक से पुछा गया कि आप दोनों ने ही एक समय में रिकॉर्ड बनया हैं। दुनिया को कैसे पता चलेगा की असली चैंपियन कौन है तो रफीक गौरव को चैलेंज कर देता है। वन टू वन रेस का। गौरव और रफीक की रफ़्तार की विडियो हर जगह वायरल हो चुकी थी। गिनीज़ की विडियो को भी पहले इतना किसी ने नहीं देखा होता। गिनीज़ बुक जब इस चैलेंज के बारे में गौरव से बात करता हैं तो वो भी उसके चैलेंज को एक्सेप्ट कर लेता हैं।

इतिहास में पहली बार साइकिल की रेस को ओलिंपिक से ज्यादा गिनीज़ बुक को लोग देख रहे होते हैं। इसीलिए गिनीज़, गौरव और रफीक के बीच जो की साइकिल की रफ़्तार के बाप थे उन दोनों के बीच हिंदुस्तान के दिल्ली में ही रेस की तेयारी करती है। उसी स्टेडियम में जहाँ गौरव ओलिंपिक में हारा था। लेकिन साथ ही साथ गिनीज़ बुक का स्टाफ गौरव की डाक्यूमेंट्री  बनाने के लिए उसके गाँव भी आते हैं। जहाँ पर लोग अंग्रेज लड़के लड़कियों को देख कर पागल हो जाते हैं। लेकिन जहाँ सब लोग उत्साहित थे इस रेस को लेकर। वहीँ गौरव परेशान था क्यूँ इस दोरान उसे अभी वो अंजान लोग दिखाई दे रहे थे। गौरव अपने माँ-बाप और कोच विजेंद्र के साथ दिल्ली आ जाता है रेस के लिए।

रेस से एक दिन पहले गौरव उसी ट्रैक को देख रहा होता है। जिस पर आखिरी बार वो हार गया था। उसे वो लोग याद आ रहे होते हैं। वो परेशान था की इस बार जब फिरसे ट्रैक पर उतरेगा तो फिर से उसे वो लोग दिखेंगे और फिर से वो हार जायेगा। उसे इस बारे में प्रिया से भी शेयर किया लेकिन उसने उसे समझाया की इस बार तुम्हारा जीतना बहुत जरूरी है। जैसे तैसे उसने खुद को समझाया लेकिन वो सच जानता था कि कल वो हार जायेगा। उसे यकीन था की कल फिर से उसे वो लोग दिखेंगे। वो रात सो रहा होता है कि सपने अचानक उसे फिर से वो लोग दिखने लग जाते हैं।

वही आदमी जो ट्रैक की फिनिशिंग पर अचानक गिर जाता है लोग अर्जुन-अर्जुन चिल्ला रहे हैं। अचानक ऑडियंस में से एक औरत उसी आदमी की तरफ दौड़ रही होती है सभी खामोश हो जाते हैं। लेकिन इस बार गौरव की नजर जिस पर जाती है वो ये देख हैंरान हो जाता है। गौरव सपने में देखता है जहाँ पर ऑडियंस बैठी है उसमे विजेंद्र भी बैठा होता है वाही विज्नेद्र जो इस वक़्त गौरव का कोच है लेकिन जिस विजेंद्र को गौरव ने सपने में देख रहा है वो एक यंग विजेंद्र है जिसने चश्मा पहना है। विजेंद्र लोगो के बीच बैठा है उस आदमी को गिरता देख विजेंद्र अपनी सीट से खड़ा होता है और चश्मा उतारता है। तभी गौरव अपनी नींद तोड़ता है और उठ कर बैठ जाता हैं उसके माथे पर पसीना होता है। वो सोचने लग जाता है विजेंद्र सर। वो फटाफट आधी रात अपनी कमरे से बाहर निकलता है और विजेंद्र के पास पहुँच जाता है।

इतनी रात को गौरव को देख विजेंद्र हैंरान हो जाता है। उसके पूछने पर गौरव बताता है कि आपको सब कुछ पता था मेरे बारे में आप सब जानते थे मेरे बारे में। विजेंद्र ने कहा की वो कुछ नहीं जानता। तो गौरव बोलता है की मैंने देखा आपको उन सभी अनजान चेहरों के बीच सिर्फ आपका चेहरा ही जान पहचान का था। गौरव विजेंद्र से मिन्नत करता है की वो उसे बता दी आखिर वो हैं कौन या फिर वो लोग कौन हैं जो उसे दिखाई देते हैं क्या रिश्ता है उनका गौरव के साथ।

 विजेंद्र उसे अपने साथ चलने को कहता है वो उसे अपने पर्सनल रूम में ले जाता है वो कमरे की लाइट को जलाता है, जैसे ही वो लाइट जलाता है गौरव उस कमरे की दीवारों को देख कर हैंरान हो जाता है। उस कमरे की दीवारों के ऊपर उसी आदमी की तस्वीरे लगी हुई थी जिस आदमी की उसने फिन्शिंग लाइन पर गिरते देखा था। सभी तस्वीरे उस आदमी की रेसर ड्रेस में थी कुछ तस्वीरे ट्राफी को पकडे हुए की थी तो कुछ विजेंद्र के साथ। गौरव हैंरान होता ये सब देख के यही वो आदमी था। फिर विजेद्र गौरव को उसी आदमी की तस्वीर दिखता है उसी औरत के साथ जो गौरव को ट्रैक पर दिखाई देती है। गौरव के पूछने पर विजेंद्र बताता है की तुम किसी सामान्य इंसान के बेटे नहीं हो। तुम एक चैंपियन के बेटे हो।

फिर विजेंद्र उसे सारी कहानी बताता है ये तस्वीरें जिस आदमी की है और जो आदमी तुम्हे दिखाई देता है उसका नाम हैं अर्जुन और वो औरत उसी की पत्नी है और वो दोनों तुम्हारे असली माँ-बाप हैं। गौरव ये सुन कर हैंरान रह जाता है। विजेंद्र बताता है की तुम्हारे पिता अर्जुन इंग्लैंड में पले-बड़े थे, उन विवाह भी इंग्लैंड में ही हुआ और तुम्हारा जन्म भी इंग्लैंड में हुआ। तुम्हारे पिता एक साइकिल चैंपियन थे और मैं उनका कोच। उसने बहुत रेस जीती थी। वो इंग्लैंड की और से रेस लड़ता था। उसने इंग्लैंड में अपनी पहचान बनाने के बाद ओलिंपिक में दाखिल हुआ और वहां भी जीतता गया। अर्जुन का नाम हर जगह फैलता जा रहा था लेकिन जैसे जैसे उसकी क़ाबलियत और उसकी पहचान बदती जा रही थी। वैसे वैसे उसके दुश्मन भी बड़ते जा रहे थे। एक वक़्त ऐसा आया की वो अपने फैन से जयादा अपने दुश्मनों से घिर चुका था। पाकिस्तान का इमरान जो की बहुत ही अच्छा साइकिल रेसर था उसका रिकॉर्ड था सबसे जयादा साइकिल रेस जीतने का।

विजेंद्र गौरव को इमरान की तस्वीर दिखता है। गौरव ये देख कर हैरान हो जाता है ये वही इमरान था जो उसे पहली बार गाँव में साइकिल पर दिखा जब अपने पाप को बटुआ देने जा रहा था। जब वो बहुत डरावने तरीके से मुस्कुरा रहा था अर्जुन को देख कर और अर्जुन की और साइकिल चला रहा था। फिर विजेंद्र उसे बताता था की इमरान और अर्जुन दोनों ने अब तक बराबर रेस जीती थी। लेकिन अर्जुन इमरान के बाद आया था फिर भी बहुत जल्द उसके बराबर हो गया था। वो साल ओलिंपिक था जब इमरान और अर्जुन आमने सामने हुए। हालाँकि इस ओलिंपिक रेस में उन दोनों के इलावा 4 और रेसर थे। लेकिन सभी दर्शकों की नजर सिर्फ इमरान और अर्जुन पर थी। की जो जीतेगा सबसे जादा रेस जीतने वाली लिस्ट में उसका नाम दर्ज हो जायेगा। बाद में आने के बाद अर्जुन के इमरान से कहीं जादा फैन थे।

और कहीं न कहीं इमरान को भी ये लगता थे की अर्जुन जीत जायेगा और उसका नाम सबसे आगे हो जायेगा। इसीलिए उसने चाल चली। रेस शुरू होने से पहले इमरान ने किसी तरीके से अर्जुन की ड्रिंक में गोलियां डाल दी। वो अर्जुन की आखिरी रेस थी। सारा स्टेडियम खाचाखच भरा हुआ था। मैं, तुम्हारी माँ और तुम उस वाक्त पांच साल के थे। हम ऑडियंस में बैठे थे रसे देखने के लिए। अर्जुन, इमरान और बाकि के रेसर ने रेस शुरू कर दी।

और वही हुआ तुम्हारे पिता अर्जुन तेजी से सबसे आगे निकल और बहुत जल्द फिनिशिंग लाइन के बहुत पास पहुँच गए। लेकिन फिनिशिंग लाइन तक पहुँच से कुछ ही दूरी पूरी पहले उन्होंने ने अपने दिल पर हाथ रखा। हमे ये साफ़ दिख रहा था। उन्होंने दिल पर रखा जैसे उन्हें हार्ट अटैक आने वाला लो और वही हुआ वो झट से साइकिल से गिर गए। तुम्हारी माँ दौड़ती हुई उनके पास पहुंची, उसके बाद तुम भागते हुए अपने पापा के पास पहुंचे। मैं शॉक में चला गया था। तुम्हारे पिता की वहीं मौत हो गयी और तुम्हारी माँ जोर-जोर से रोने लग गयी। वो बहुत प्यार करती थी तुमरे पिता से आखिर लव-मैरेज थी उनकी। इतने में सभी रेसर्स ने फ्निशिंग लाइन पारर कर ली थी और इमरान जीत चुका था। मैं भी वहां पहुंचा तुम खामोश थे। तुम्हारी माँ ने अर्जुन की लाश को गले लगाया हुआ था जैसे वो नहीं चाहती थी की वो उसे छोड़ कर जाये। तुम्हारी माँ भी ये सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसकी भी वहीं सदमे की वजह से मौके पर मौत हो गयी। तुम्हारी आँखों के सामने उसी फिनिशिंग लाइन पर तुम्हारे माँ-बाप की मौत हो चुकी थी। तुम अचानक जोर-जोर से साँसे लेने लग गए तुम्हारी आँखें ऊपर को चढ़ गयीं जैसे तुम्हे भी कोई अटैक आया है। तुम्हें फ़ौरन हॉस्पिटल ले जाया गया। तुम कोमा में चले गए। एक पल में सारा परिवार बिखर गया। अर्जुन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ये ज़ाहिर हो गया की उनकी मौत ज़हर की वजह से हुई है। तुम्हारे कोमा से बाहर आने की कोई खबर न थी। इसीलिए मैंने ही तुम्हारी माँ-बाप की लाश को जलाया। पूरे दस दिन बाद तुम्हे होश आया और पता चला  उस सदमे की वजह से तुम कोमा में गए और सबसे जादा असर तुम्हारी याददाश्त पर पड़ा। तुम भूल गए कि तुम कौन हो। तुम अपने अतीत के बारे में बिल्कुल भूल गए।

डॉक्टर्स के हिसाब जिस दिन तुम्हे होश आया उस दिन दिन तुम्हारा नया जन्म हुआ। अगर हम तुम्हे याद दिलाने की कोशिश करते तो तुम फिर से सदमे में जा सकते थे। इसीलिए डॉक्टर्स की राय के अनुसार मैं तुम्हे इंग्लैंड से हिंदुस्तान के गाँव लाया। जहाँ सुविधाएं बहुत कम हो और तुम बाहरी दुनिया से दूर हो। जो तुम्हार अब माँ-बाप हैं उनके कोई बच्चा नहीं था तो उन्होंने तुम्हे पालने का फैसला किया। क्यूंकि तुम्हें कुछ याद नहीं था तो तुम्हें उनका बेटा बना कर तुम्हें उनके पास भेजा गया। मैं हर महीने उनसे तुम्हारे बारे में खबर लेता। लेकिन किस्मत तुम्हे फिर से वहीँ ले आई जहाँ तुम्हार पिता थे। जब मुझे पता लगा कि तुम दिल्ली आये हो जिद्द करके, मैं फिर से इंग्लैंड से दिल्ली आ गया और चोरी छुपे तुम पर नजर रखी। लेकिन तुम्हें रोकने की बजाये बढ़ने दिया ये सोच कर की शायद यही भगवन को मंजूर था।

गौरव ये सच जान कर बहुत हैरान की उसके असली माँ-बाप कोई और ही थे। उससे ये सच छिपाया गया। उसकी यादाश्त चली गयी थी लेकिन वो आखिरी रेस जिस जगह पर उसकी यादाश्त गयी अब भी कहीं न कहीं उसके दिमाग में थी और जब भी वो उस रेस से जुडी किसी चीज़ के संपर्क में आता उसे उस रेस से जुडी चीजें दिखाई देतीं। अब सच जानने के बाद गौरव रेस के लिए तेयार था। वो अपने पापा अर्जुन का नाम रोशन करना चाहता था। अब उसके लिए साइकिल और महत्वपूर्ण चीज़ हो गयी थी। अगले दिन गिनीज़ बुक के स्टाफ ऑफ़ दिल्ली के स्टेडियम में लोग भरे पड़े हैं। रेस होती है सिर्फ गौरव और रफीक के बीच। रेस शुरू होती फायरिंग होती है और दोनों रेसर तेजी से साइकिल भागना शुरू कर देते हैं। उन दोनों की रफ़्तार को कर सभी गौरव और रफीक चिल्ला रहे होते हैं। विजेंद्र को गौव में उसके पापा दिखाई देते हैं वैसी ही रफ़्तार वैसा ही अंदाज और एक दम से गौरव रफीक से आगे निकल जाता है। सभी खुश हो जाते हैं। गौरव अपना पूरा जोर लगाने लग जाता है वो रफीक से बहुत आगे निकल जाता है। गौरव तेजी से साइकिल भगाना शुरू कर देता है कि फिर से वो एक दम से अपनी साइकिल को रोकता है।

आसमान में फिर से बादल काले घने हो गए। वो सामने की और देख रहा होता है। उसके सामने का नजारा फिर से बदल जाता है। वही रेस, इस बार अपनी नजर घुमा कर अपनी माँ की तरफ करता है जो की ऑडियंस में बैठी हैं और देखता है की उसकी माँ के साथ वो खुद भी बैठा है जो रेस देख रहा है। अब एक बड़ा गौरव जो कि ट्रैक पर वो नहीं बल्कि वो गौरव जो की ऑडियंस के बीच अपनी माँ के साथ बैठे हैं अब उसकी नजर से ये रेस देख रही हैं। वो पांच साल का गौरव देखता है । उसके पापा अर्जुन सबसे आगे हैं और फिनिशिंग लाइन के बहुत पास अचानक से वो अपना हाथ अपने दिल पर रखते हैं वो साइकिल से गिर जाते हैं। वो छोटा गौरव देखता है उसकी माँ सीट से फ़टाफ़ट उठ कर उस ट्रैक पर पहुँच जाती हैं। फिर वो दौड़ती हुई उसके पापा के पास पहुँचती हैं। उसके पापा पीठ के बल लेटे हुए हैं वो लेटे हुए ही अपनी गर्दन उठा सामने आ रहे खिलाडियों की ओर करते हैं तो देखते हैं सबसे आगे इमरान होता है और बाकि के खिलाडी उसके पीछे। अर्जुन को इमरान की तरफ देख कर गौरव की माँ भी इमरान की तरफ देखती हैं। इमरान गौरव को लेटा देख बहुत डरावने तरीके से मुस्कुरा रहा है जिससे साफ़ साबित होता है की वो ज़हर उसी ने डाली थी। इतने वो इमरान अर्जुन के पास से होकर निकल जाता है और वो रेस जीत जाता हैं। अर्जुन अपनी बीवी से कहता है की मैं चैंपियन नहीं बन पाया। दरअसल पहले जिस गौरव को लगता था की अर्जुन और उसकी माँ उसकी तरफ देख रहे हैं दरअसल वो उसकी तरफ नहीं बल्कि इमरान की तरफ देख रहे थे और उसे जो लगता हैं इमरान उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा रहा है वो उसकी तरफ नहीं बल्कि अर्जुन की और देख कर मुस्कुरा रहा होता है। अर्जुन ने ये सारा वाक्य देखा होता है इसीलिए याददाश्त जाने से पहले उसने जो जो देखा होता है उसे वही दिख रहा होता है और ऐसा लगता है जैसे उसके साथ हो रहा है। फिर व्ही छोटा अर्जुन अपनी जगह से खड़ा होता है और बगल में बैठे जवान विजेंद्र को देखता है। वो देखता है विजेंद्र खड़ा होता है चश्मा उतारता है और शॉक में होता है।

तभी कहानी वापस उसी गौरव रेसर पर आ जाती है। उसके सामने का नजारा फिर सामान्य हो जाता है। जैसा की आज हो रही रेस का रफीक के साथ। वो फिर से बीच ट्रैक पर रुका होता है और दर्शको की तरफ देख रहा होता हैं। जो उसे सपोर्ट कर रहे होते हैं वो चिल्ला रहे होते हैं गौरव चलो – गौरव चलो तभी अचानक से रफीक उसके पास से होकर उससे आगे निकल जाता है। जिसे देख कर गौरव हैरान रह जाता है और उसे सपोर्ट करने वाले सभी मायूस। वो फिर से अपनी साइकिल को भागना शुरू कर देता है रफीक उससे बहुत आगे निकल जाता है और गौरव उसके पास पहुंचने की कोशिश कर रहा होता है वो भी तेजी से साइकिल भगा रहा होता है साइकिल को भागते हुए उसे वो अपने पापा की रेस याद आने लग जाती है। अब कहानी फिर से उसी आखिरी रेस की तरफ जाती है।

वाही आखिरी रेस होती है , सभी दर्शक खामोश होते हैं। इमरान जीत चुका होता है। उसके पिता ट्रैक पर लेटे है साथ में उसकी माँ बैठी रो रही हैं। अब छोटा गौरव भी ट्रैक पर पहुँच जाता है वो भी दोड़ता हुआ अपने पाप के पास पहुँचता है। उसके पापा उसे देख कर मुस्कुराने लग जाते है। और तड़पती हुई आवाज में बोलते हैं कि मेरा बेटा बनेगा चैंपियन। मेरा सपना पूरा करेगा। करेगा न बेटे।

अब कहानी वापिस उसी प्रेजेंट रेस पर आ जाती है जहाँ पर रफीक आगे निकल चुका है और गौरव उसके पीछे। अपना पापा के उस अल्फाज को याद कर अर्जुन की आँखों में आसूं आ जाते हैं और वो आंसू भरी निगाहों से साइकिल भगा रहा होता है। ना जाने इतनी ताकत उसमे कहाँ से आ जाती है। ना जाने वो रफ़्तार उसमे कहाँ से आ जाती है कि बहुत ही तेजी से फिनिशिंग की लाइन की ओर बदने लग जाता है। उधर रफीक फिनिशिंग लाइन बहुत पास है दूसरी तरफ लोग गौरव की रफ़्तार को देख कर हैंरान रह जाते हैं। रफीक को लगता है की वो जीत गया। वो फिनिशिंग लाइन को छूने ही वाला होता है कि एक दम तूफ़ान की तरह गौरव उसके पास से निकल कर उससे पहले फिनिशिंग लाइन को पार कर लेता है। सभी ये देख एक दम से खड़े होकर चिल्लाने लग जाते हैं। गौरव फ्निशिंग लाइन पार करके कुछ दूरी बाद अपनी साइकिल को रोकता है और देखता है कि चारो तरफ उसके नाम गूँज रहे होते हैं अचानक से उसे महसूस होता है उसे कोई देख रहा है। गौरव पीछे मुड कर उसी फिनिशिंग लाइन की और देखता है। वो देखता है कि उसके पापा रेसर की ड्रेस में खड़े हैं उन्होंने के एक तरफ अपनी साइकिल खडी की हुई हैं और दूसरी तरफ उसकी माँ उनके साथ खडी हैं। वो दोनों उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा रहे होते हैं और एक दम से गायब हो जाते हैं। इस जीत के बाद गौरव का गिनीज़ बुक में नाम दर्ज हो गया वर्ल्ड चैंपियन का। उस पर लगे बैन को हटा दिया गया। उस जीत के उसे कभी ना तो सपनो में और ना ही कहीं फिर से उसके माँ-दिखे। शायद वो खुद अपने बेटे को इस मुकाम तक लाना चाहते थे।

रहस्य्मी रेस ट्रैक चैंपियन

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