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एक प्यार ऐसा भी...
एक प्यार ऐसा भी...
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© Binay Kumar

Abstract Inspirational

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प्यार एक ऐसा शब्द जो हर एक कोई इससे वाकिफ है। मैं बात कर रहा हूँ एक ऐसा प्यार जो सभी ने अपने जीवन में किसी ना किसी से किया है, अक्सर उस पड़ाव पर जब हम स्कूल और कॉलेज में होते हैं। सबसे पहले हम प्यार कहते किसे हैं? प्यार मतलब एक आकर्षण एक ऐसा आकर्षण जिसमे हम उसे पूरे दिलो दिमाग से चाहते हो उसे पसंद करते हो उसकी पसंद नापसंद का पूर्ण तरीके से ख्याल रखते हो मतलब उसके बिना ज़िंदगी मानो बिल्कुल कुछ नहीं है कुछ भी नहीं। स्कूल और कॉलेज का प्यार से हम सभी वाकिफ है क्या महसूस होती है जब हम किसी से प्यार करते हैं उनसे बातें करते हैं उनके साथ समय बिताते हैं मानो ज़िंदगी में सबकुछ मिल रहा है। एक तरीके से कहा जाए तो हम बहुत खुश रह रहे होते हैं। लेकिन क्या ये प्यार वाकई सभी के लिए खुशकिस्मत साबित होती है? क्या ये प्यार सफल होता भी है? और नहीं तो आखिर किस हद तक इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ता है। आज मैं आपको एक ऐसी ही सच्ची घटनाओ से प्रेरित एक कहानी सुनाने जा रहा हूँ।

 

एक लड़का था जिसका नाम ऋतिक था, वो बिहार के मुंगेर जिले में रहता था और वो अपने परिवार के साथ रहता था। उसके घर में एक बड़ा भाई और एक छोटी बहन रहती थी। वो बारहवीं कक्षा में पढता था। वो काफी खुले दिल का इंसान था सबसे बातें किया करता था सभी से दोस्ती रखता था। और ना किसी चीज़ की चिंता थी उसे बिल्कुल बिंदास ज़िंदगी जीता था। एक घटना उसके साथ हुई जिससे की उसकी ज़िंदगी बदल गयी और वो घटना थी प्यार की घटना। 

बात उन दिनों की हैं जब ऋतिक अपने बारहवीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा की तैयारियां कर रहा था परीक्षा नजदीक थी क्योंकि दिसंबर का महीना था। वो काफी मेहनत कर रहा था अपने परीक्षा के लिए। एक दिन की बात हैं जब ऋतिक अपने गणित की ट्यूशन क्लास गया था वो दिन था 15 दिसंबर। 

जब ऋतिक क्लास के अंदर गया तो अक्सर जैसा वो किया करता था अपने दोस्तों के साथ हँसी मज़ाक करते हुए बातें कर रहा था। फिर सर आये और सर ने पढ़ाना शुरू किया। तभी उसकी नज़र एक लड़की पर गयी जो नयी थी उस क्लास में। उस दिन की क्लास खत्म हो गयी। धीरे धीरे दो दिन-चार दिन बीतते गए ऋतिक अपने में खुश था और एक दिन उस क्लास में बच्चे काफी कम आये थे क्योंकि ठण्ड बहुत थी उस दिन सर ने ग्रुप वार्तालाप में पढ़ने की सलाह दि। उन सभी ने सहमति जताई और फिर वो सब बैठे। बच्चे कम होने के कारण वो सभी ने बेंच को आमने सामने रख कर एक दूसरे के सामने बैठे और उस दिन ऋतिक ने उस लड़की को अच्छे से देखा (उस लड़की का नाम स्वाति था)। लेकिन ऋतिक ने बात नहीं की। शायद स्वाति को ऋतिक के साथ दोस्ती करनी थी उसने ऋतिक से पहली बार बात की उसने उससे उसका नाम पूछा और बस ऐसे ही स्कूल और कुछ बातें की। दूसरे दिन फिर कुछ बातें हुई। कुछ दिनों तक उन दोनों में ऐसा ही चलता रहा। एक दिन स्वाति ने कहा ऋतिक यार मैंने तेरा नाम फेसबुक पर ढूँढा लेकिन तू मुझे मिला नहीं यार तू मुझे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दे। बस फिर वो दोनों में सोशल नेटवर्क्स पर अच्छी खासी बातें शुरू हो गयी। एक रात जब वो दोनों बातें कर रहे थे उन दोनों में बहुत अच्छे से बातें हो रही थी। और फिर स्वाति ने सबसे पहले ऋतिक को कहा मैं तुमसे प्यार करती हूँ। और फिर उसने अपना मोबाइल नंबर देते हुए कहा मुझे कल कॉल करना प्लीज़। 

ऋतिक भी स्वाति को बहुत पसंद करने लगा था वो उसके दिमाग में हमेशा रहने लगी थी फिर उसने भी स्वाति को हाँ कह दिया। ऋतिक अपने दिलो जान से स्वाति को चाहने लगा और इतना चाहने लगा कि उसके बिना कुछ सोच भी नहीं पाता था। स्वाति भी हमेशा उसे फ़ोन पर बात करते रहती थी। दोनों में नजदीकियाँ बड़ी और फिर दोनों कभी घूमने जाते तो कभी क्लास में दोनों एक दूसरे को सिर्फ देखते ही रहते। उन दोनों का घूमना फिरना इतनी बातचीत से ऋतिक को गहरा असर हो रहा था वो उसे और ज़्यादा और ज़्यादा चाहने लगा था। इतना की पागल हो गया था उसके प्यार में। 

और फिर महीनों बीतते गए और जैसे ही उन दोनों का बोर्ड परीक्षा खत्म हुई तभी से स्वाति का अंदाज़ बदलने लगा वो ऋतिक को धीरे धीरे नज़र अंदाज़ करने लगी फिर फ़ोन कॉल्स कम हो गए और फिर उसने फ़ोन करना बंद कर दिया। और इन सब से ऋतिक पागल हो रहा था उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उससे क्या गलती हो गयी है जो स्वाति ऐसा कर रही है। और फिर एक दिन स्वाति ने ऋतिक के दोस्त के द्वारा ऋतिक को एक सन्देश दिया कि वो उसे भूल जाए। बस इतना सा बोल कर उसने ऋतिक से सारा संपर्क तोड़ दिए। ऋतिक ये जानने के लिए पागल था आखिर हुआ क्या है हमारे बीच, वो हमेशा स्वाति को फ़ोन करता था लेकिन वो रिसीव नहीं करती थी और फिर उसने अपना नंबर भी बदल दिया और सोशल नेटवर्क पर भी ब्लॉक कर दिया। कई बार ऋतिक उसके घर पर भी जाने की कोशिश करता लेकिन जा नहीं पाता था। फिर उसके बारहवीं का परिणाम आया और उसके पापा ने उसका नामंकन दिल्ली विश्वविद्यालय में करवा दिया लेकिन वो लड़का यहाँ नहीं रह पाया, उसे यहाँ भी वो लड़की याद आती थी बिल्कुल रह नहीं पा रहा था और उसने अपने घरवालों से कहा मैं यहाँ नहीं पढ़ सकता मुझे वहाँ पढ़ना है और उसने एक बहाना बना दिया कि उसे पढ़ाई समझ में नहीं आ रही है और वो दिल्ली से चला गया वापस अपने घर। वो बहुत रोता था दिन भर रोता था, बस एक बार बात कर लो ऐसी मन्नते मांगता था ईश्वर से। वो मन्नत माँगा करता कि मेरी बात करवा दो स्वाति से, वो रोज़ मंदिर जाता था हमेशा रोते रहता था और प्यार में जो पागलपन होता है उसने वो भी कर दिया अपने शरीर को नुकसान पहुंचाता था। एक दिन उसे किसी तरीके से एक लड़के से नंबर मिला स्वाति का और फिर ऋतिक ने अपने नंबर से फ़ोन ना कर उसे दुसरे नंबर से मैसेज किया कि आखिर तुमने ऐसा क्यों किया बस इसका जवाब दे दो। अगर तुम्हे कोई दिक्कत है तो प्लीज़ मुझे बताओ अगर तुम्हे और भी कोई दिक्कते है तो तुम मेरी दोस्त बनके रहो मैं  तुम्हे कभी कुछ नहीं बोलूंगा लेकिन प्लीज़ ऐसे मत छोड़ो, मैं मर जाऊँगा।

उसने कहा मैं तुमसे प्यार नहीं करती हूँ मुझे छोड़ दो और मुझे जीने दो। मैं किसी और के साथ खुश हूँ। मैंने तुमसे कोई प्यार नहीं किया था वो बस टाइम पास था और वो जो मैंने तुम्हे लव यू कहा वो मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी भूल थी। और मुझे तुमसे दोस्ती करने में भी कोई इंटरेस्ट नहीं है। वो सब एक मज़ाक था।

ऋतिक को बहुत बड़ा झटका लगा और वो जीने की उम्मीद छोड़ दी फिर उसकी तबियत ख़राब ही रहने लगी उसके दोस्तों ने स्वाति से काफी कुछ कहा बहुत कुछ समझाया ऋतिक ने उससे भीख मांगी की कम से कम वो उसके साथ रहे दोस्ती के नाते भी क्योंकि वो बिल्कुल नहीं रह पाता था उसके बिना लेकिन वो नहीं मानी। और वो अपनी ज़िंदगी बहुत अच्छे से जीने लगी। फिर उसके ज़िंदगी में बहुत सारे लड़के आते गए और ऋतिक को जब ये सब बात पता लगती थी तो उसे बहुत दुःख होता था।

ऋतिक ने अपने जीने की उम्मीद छोड़ दी थी लेकिन उसके पापा ने हमेशा से एक सपना देखा था कि उसका बेटा एक अच्छा आदमी बनेगा वो उसे IAS बनाना चाहते थे। उसके पापा ने उसे बहुत समझाया उसकी बहुत मदद की और एक वो माँ पापा ही थे जो उसके इस हाल पर रोये। वो बहुत ज़्यादा बीमार रहने लगा था। 

ऋतिक ने सबकुछ भूलना तय किया और एक नयी ज़िंदगी जीने की सोची उसने सोचा मेरा कोई सपना नहीं बचा अब लेकिन मैं हूँ और मैं करूंगा सिर्फ अपने पापा के लिए मैं बहुत पहले मर चूका हूँ लेकिन मैं जिन्दा रहूंगा अपने पापा के लिए और पापा का सपना पूरा करूंगा। 

प्यार तो मैं उससे ही करता था और ज़िंदगी भर उसे ही चाहता रहूंगा। और फिर उसने दोबारा नया साल दिल्ली विश्वविद्यालय में नामंकन करवाया।

उसने अपना एक साल बर्बाद कर दिया लेकिन उसने एक साल में जो कुछ भी सीखा वो उसकी ज़िंदगी बदल दी अभी भी वो स्वाति को ही चाहता है, किसी और को वो अपने लिए कभी नहीं चुन सकता। वो सच में बहुत प्यार करता था और करता रहेगा। आज वो सबसे ज़्यादा प्यार करता है तो सिर्फ अपने माँ पापा से। क्योंकि उसके माँ पापा ने उन्हें बहुत संभाला है। हर स्तिथि में। ऋतिक आज जी रहा है तो सिर्फ अपने माँ बाप के लिए वो सिर्फ उसकी खुशी के लिए है अब। 

सारांश:- दोस्तों मैं ये नहीं कहता की प्यार मत करो लेकिन प्यार में धोखा मत दो और प्यार की इज्ज़त रखो। क्योंकि आपका एक धोखा किसी की जान ले सकती है उसकी ज़िंदगी बर्बाद कर सकती है। प्यार को मज़ाक मत समझिए प्यार शब्द के साथ मत खेलिए इसे पवित्र रहने दीजिये। प्यार एक से करिये, सच्चा प्यार।

माँ बाप का ही एक ऐसा प्यार है जो कभी नहीं धोखा देता वो हमेशा साथ रहता है किसी भी हालात में। इसलिए ज़िंदगी में सबकुछ करना लेकिन माँ बाप को कभी मत छोड़ना वो ही एक ऐसे भगवान है जिसकी सेवा करने का अवसर हमें जीते जी प्राप्त है कृपया कर उन्हें ना रुलाये उन्हें ना ठुकराये। हमेशा अपने माँ बाप से प्यार करते रहे। क्योंकि वो है तो हम हैं आज जो भी है सब उन्ही की बदौलत से। उनकी इज्ज़त करे और हमेशा उन्हें खुश रखे।

यह एक सच्ची घटना है । प्यार में धोखा कैसे किसी को किस हद तक लेके चला जाता हैं।

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