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एकता है तो हम है
एकता है तो हम है
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© Kamal Purohit

Children Stories Inspirational

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अमित और असलम अभिनव शिक्षा मंदिर में कक्षा नौ के विद्यार्थी थे। दोनो में गाढ़ी मित्रता थी। दोनों पढ़ाई में तो अच्छे थे ही साथ ही क्रिकेट भी अच्छा खेलते थे। हर साल की भांति शहर के सभी विद्यालय के मध्य क्रिकेट टूर्नामेन्ट होने वाला था। अमित असलम की स्कूल ने कभी भी यह टूर्नामेन्ट नहीं जीता था।

आज स्कूल की क्रिकेट टीम का चुनाव होने वाला था। प्राचार्य और खेल शिक्षक किसे चुनेंगे और किसे नहीं इसे लेकर सब बच्चे कशमकश में थे।

प्राचार्य ने सभी खिलाड़ियों में से एक एक कर के नाम पुकारना शुरू किया जिन्हें टीम में स्थान मिला था। राहुल जैन, अमित शर्मा, असलम अंसारी, कुंवर देशमुख ,हरप्रीत सिंह और अब्राहम डिसूजा को टीम में चुना गया था। अपना अपना नाम सुन कर बच्चे बहुत खुश हो रहे थे। कुछ समय पश्चात खेल शिक्षक ने सबको अपने कमरे में बुलाया।

जब सब बच्चे सर के कमरे में पहुँचें तो शिक्षक ने उन्हें सबको बैठने को कहा और बोलने लगे- जैसा कि तुम लोगों को पता है कि तुम सब भारत मे रहते हो। भारत में प्रत्येक धर्म के लोग रहते है। हो सकता है कि तुम जब बड़े हो जाओगे तो कभी अपने धर्म के प्रति कट्टर बन सकते हो,इसमें कोई बुराई नहीं है। स्वधर्म पर नाज़ होना ही चाहिए।

लेकिन लेकिन लेकिन, कट्टरता ऐसी न हो कि दूसरों के धर्म को नीचा दिखाना शुरू कर दो। प्रत्येक धर्म के संदेशवाहकों ने एक ही संदेश दिया है और वह है मानवता।अगर तुम्हारे अंदर मानवता नहीं, तो तुम में और एक पशु में ज्यादा अंतर नही रह जाएगा।

इतना बोलने के बाद शिक्षक कुछ पल के लिए रुके, सारे बच्चे उन्हें एकटक देख रहे थे।

शिक्षक ने कहा, तुम सब यह सोच रहे हो न कि खेल के शिक्षक खेल की बजाय आज क्या सिखाने लग गए ?

सब विद्यार्थी बोले- यस सर।

शिक्षक ने कहा- देखो बच्चों, आज तुम सब इंटरनेट इस्तेमाल करते हो। इंटरनेट का जितना लाभ है उतना नुकसान भी। जब तक हम इंटरनेट से होने वाले लाभ हानि को न समझ लें तब तक इसका इस्तेमाल सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही करें।

शिक्षक ने पूछा- तुम सब के सब सोशल मीडिया पर एक्टिव हो ?

सब बच्चे बोलें- जी सर। 

शिक्षक- सोशल मीडिया पर बहुत सी गलत खबरों की वजह से लोग एक दूसरों के बारे में, उनके धर्म के बारे में उल्टा सीधा मतलब निकाल लेते हैं। इसका सीधा प्रभाव तुम्हारे मस्तिष्क पर पड़ता है और दूसरों धर्म को तुम नफरत की नजरों से देखने लगते हो।

इतने में अमित बोला- सर कल ही मैंने ऐसी कुछ पोस्ट पढ़ी जिसमें मुस्लिम, हिन्दूओं की बुराई कर रहे थे और हिन्दू मुस्लिम की।

शिक्षक ने अमित से पूछा- इस स्कूल में तुम्हारा सबसे अच्छा दोस्त कौन है ?


अमित- असलम ! है सर। 

शिक्षक- क्या कभी असलम ने हिन्दू धर्म पर तुमसे कोई गलत बात की थी ?

अमित- नहीं सर।

शिक्षक- क्या कभी तुमने असलम को उसके धर्म के लिए टोका ?

अमित- नहीं सर।

शिक्षक- अब तुमने कल जो पोस्ट पढ़ी थी वैसी आये दिन पढ़ने लगोगे तो आहिस्ता आहिस्ता ये होगा कि हिन्दू होने के नाते तुम उस पोस्ट के सभी हिन्दू भाइयों का समर्थन करने लगोगे और मुसलमानों से नफरत। ये तुम्हारी और असलम की दोस्ती पर पहला वार होगा।

सोशल मीडिया पर कोई भी पोस्ट पढ़ने से पहले एक बार अपने आस पास नजर दौड़ाओ और जानो कितने परधर्मी से तुम्हें खतरा लग रहा है ?

अब तुम सब अपनी टीम के खिलाड़ियों को देखो इसमें हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध सब धर्म के खिलाड़ी है।

क्रिकेट का खेल सिर्फ खेलने के लिए नहीं है। यह आपस में एकता दिखाने का खेल भी है। सिर्फ एक बल्लेबाज या एक गेंदबाज मैच नहीं जीता पाता है, जब तक कि बाकी के खिलाड़ियों का भी योगदान न हो। खेल की एकता को और अच्छे से तभी समझा जा सकता है, जब हम एक दूसरे को समझ लें।

जब तुम सब बड़े हो जाओगे और तुम में से कोई अपने बेहतर खेल प्रदर्शन की वजह से भारत की टीम में स्थान पा जाता है या फिर कोई भी ऐसी जगह जहाँ साथ कि जरूरत पड़ती है। वहां यह मूलमंत्र काम आएगा (एकता है तो हम है, हम है तो मैं हूँ)।

क्योंकि भारत की टीम में प्रत्येक राज्य और धर्म के लोग चुने जाते हैं। तुम्हारा शिक्षक और कोच होने के नाते मैं तुम सब को सिर्फ यह कहना चाहता हूँ कि इस टूर्नामेंट में तुम अच्छा खेलो या बुरा लेकिन अपनी टीम को एकजुट कर के रखना। 

बाकी मुझे आशा तो सिर्फ यही है कि तुम सब अच्छा खेलो।

छुट्टी की घँटी बज गयी थी।

सब बच्चे अपने घर की ओर चल दिये और पूरे रास्ते शिक्षक की बातों को सोचते रहे।

असलम मन ही मन खुद को कोस रहा था कि क्यों मैं चाह रहा था कि टीम में अमित का चुनाव नहीं हो। इधर अमित की हालत भी वैसी ही थी वह भी कुछ दिनों से असलम को नापसंद करने लगा था लेकिन आज उसकी आँखों से झूठ का पर्दा हट चुका था। दोनों मुस्कुराते हुए एक दूसरे के गले मिले और अपने अपने घर की तरफ मुड़ गए।

एक सप्ताह बाद क्रिकेट टूर्नामेन्ट का आरंभ हुआ। अभिनव शिक्षा मंदिर का पहला मैच ही गत वर्ष की विजेता टीम के साथ था। जैसा कि लोगों को लगा था कि यह मैच अभिनव शिक्षा मंदिर बुरी तरह से हार जाएगी लेकिन वैसा नहीं हुआ। अभिनव शिक्षा मंदिर ने बड़ी आसानी से मैच जीत लिया। 

अभिनव शिक्षा मंदिर की टीम ने अपने शिक्षक की कही बात को अपना नारा बना लिया, "एकता है तो हम है, हम है तो मैं हूँ"

एक एक कर के अभिनव शिक्षा मंदिर ने टूर्नामेंट के सारे मैच जीत लिए।

अभिनव शिक्षा मंदिर की टीम न सिर्फ टूर्नामेंट जीता बल्कि लोगों का दिल भी जीत लिया।

धर्म खेल योगदान

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