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मवाना टॉकीज भाग 13
मवाना टॉकीज भाग 13
★★★★★

© Mahesh Dube

Action Thriller

3 Minutes   1.4K    14


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अगले दिन पुलिस थाने में अभय मिश्र के आगे मवाना टॉकीज के अपराधी बैठे थे। सोमू भी था और डॉ चटर्जी भी। डॉ चटर्जी, आखिर आप पलक झपकते गायब कहाँ हो गए थे? अभय ने पूछा।

चटर्जी बोले, जब मैंने मनोहर द्वारा फिल्म का प्रक्षेपण देखा तो समझ गया था उसकी पिछली रात भी किसी न किसी ने जरूर फिल्म चलाई थी जो सोमू ने देखी थी तो मुझे लगा कि यहाँ कोई गुप्त जगह होनी चाहिए जहाँ कोई छुपा हो सकता है मैं उसी की तलाश कर रहा था कि अचानक मेरे सिर पर एक वार हुआ और मैं बेहोश हो गया फिर आँख खुली तो मैं बंधा पड़ा था।

अभय ने सिर हिलाया और गोली खा चुके आदमी से बोला, हां तो मवाना साहब ! आपने ही इन्हें मारा था या आपकी बीवी ने?

मवाना नाम सुनकर डॉ चटर्जी और सोमू बुरी तरह चौंक पड़े। फिर ध्यान से उन्होंने उस इंसान की शक्ल देखी तो उनके मुंह से विस्मय की सिसकी निकल पड़ी। यह आदमी सचमुच नारायण मवाना था और यह नौजवान औरत उसकी बीवी रेणु थी।

यह जिन्दा है? सोमू बोला, लोग तो कहते थे कि ये आग में जलकर मर चुके हैं!

भाई नारायण, अभय बोला, अब यह रहस्य अपने ही मुंह से बता दो।

नारायण मवाना ने एक निश्वास भरी और बोला, मेरा टॉकीज का बिजनेस मंदा हो गया था और लंदन में पढ़ रहे मेरे बेटे राजवीर की मांगें बढ़ती जा रही थी। ऊपर से नौजवान और फैशनेबल बीवी के खर्च अपरंपार थे। ऐसे में कुछ विदेशी एजेंटों ने मुझे बच्चों की तस्करी का ऑफर दिया। जिनकी खाड़ी देशों में गुलामी के लिए हमेशा मांग रहती है। शुरू में मैं कुछ हिचका लेकिन बाद में मेरी हिम्मत बढ़ती गई। मैं धड़ल्ले से बच्चे किडनैप करके सप्लाई करने लगा और खूब कमाई होने लगी।

फिर टॉकीज जलाने की नौबत क्यों आई? अभय ने पूछा

दरअसल मेरे यहाँ एक आदमी काम करता था जिसका नाम मोहन था। उसे मेरा राज मालूम पड़ गया और वह मुझे ब्लैक मेल करने लगा। तब मैंने और रेणु ने प्लान बनाकर पहले झगड़े का नाटक किया और दुनिया के सामने यह जताया कि हम दोनों में भारी विरोध है। फिर हमने एक दिन धोखे से मोहन और उसकी बीवी को बुलाकर मार दिया और उनकी लाशों के साथ मवाना टॉकीज में भी आग लगा दी। सभी को लगा कि मैंने अपनी बीवी और टॉकीज को जला दिया जबकि हम आसानी से उन तहखानों में रहकर अपना बिजनेस चलाते रहे। सबकुछ बढ़िया चल रहा था लेकिन इस बीच यह आदमी यहाँ आने लगा, मवाना सोमू की तरफ उँगली उठा कर बोला, जबकि यह जगह भुतहा इमारत के रूप में मशहूर थी।

फिर? डॉ चटर्जी ने पूछा, क्या तीन दिन पहले सोमू को फिल्म तुमने दिखाई थी?

हां, मवाना बोला, जब सोमू कई दिन आकार यहाँ मंडराता रहा फिर उस दिन आकर टॉकीज में बैठ गया तो मैंने प्रोजेक्शन रूम में जाकर फिल्म चला दी और रेनू जली औरत का मेकअप करके इसे डराने लगी। यह डरा तो लेकिन न जाने क्यों प्रोजेक्शन रूम में चला आया जहाँ से मैंने प्रोजेक्टर यह सोचकर नहीं हटाया था कि इतना डर जाने के बाद कोई इधर का रुख नहीं करेगा।

भुतही कहानी

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