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खूबसूरत बेड़ियाँ
खूबसूरत बेड़ियाँ
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© Kunda Shamkuwar

Abstract Tragedy Others

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आज ऑफिस में किसी कलीग से बात हो रही थी।बातें नोटबंदी से लेकर आज का मीडिया और देश के हालात तक जा पहुँची।मीडिया में ही काम करने के कारण हमें मीडिया के पावर का अंदाज है।आज फिर उसकी बातें सुनकर हमेशा की तरह मैने कहा,"अरे,तुम्हे यहाँ नहीं होना चाहिए था।तुम्हारी परफेक्ट जगह तो किसी न्यूज़ चैनल में है।तुम्हारी पर्सनालिटी इतनी डायनेमिक है,तुम कहीं किसी न्यूज़ चैनल में क्यों नहीं ट्राय करती?" उसने बड़ी उलझती आवाज में कहा, "मैडम,कुछ घर की पारिवारिक उलझने हैं जो मुझे इजाज़त नहीं देतीं।" मैंने फिर से अपने हार ना मानने वाले अंदाज में कहा,"अरे यार ,चल छोड़ो ये सब बातेँ।आज के समय में लड़का लड़की में कोई भेद नहीं है,बराबरी का जमाना है।" उसने कहा, "मैडम,किसी भी न्यूज़ चैनल में नाईट शिफ्ट तो कॉमन होती है,मेरा बेटा अभी छोटा है,इसलिए मैं नहीं कर सकती।" 

मुझे लगा कि इस लड़की के पास पंख है,और यह खुले आसमान में उड़ना भी चाहती है।लेकिन बेटे के प्यार और घर की जिम्मेदारीयों से वह चाह कर भी उड़ नहीं पा रही है। 

उसने जाते जाते कुछ बुझी हुई आवाज में कहा,"मैडम,बेटे को अभी मेरी जरुरत है।देखते हैं आगे क्या होता है?लेकिन हाँ,मैं अपने बेटे को जरूर एक कामयाब शख्स बनाना चाहती हूँ।"


उससे बात करते हुए मैंने महसूस किया कि लड़कियों के पंख होने के बावजूद वह उड़ नहीं सकती और फिर रिश्तों की बेड़ियों में बड़ी ही खूबसूरती से बँध जाती है और पूरी तरह उसमे

मगन हो जाती है....


..

परिवार की बेड़ियां

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