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कद
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© Sadhana Sachan

Drama

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आज शारदा जिज्जी का फोन आया उन्होंने घर पर पार्टी रखी है।किसी समाज सेवी संस्था ने उन्हें सम्मानित किया है।सच में शारदा जिज्जी बहुत अच्छी हैं पिछली बार गर्मी की छुट्टियों में एक सप्ताह के लिए गाँव आई थी लगा ही नहीं कि पहली बार हमारे यहाँ आई हैं।जिज्जी हमारे दूर की मौसी की बेटी हैं।बचपन से ही शहर में पली बढ़ी।बस हवा पानी बदलने का मन किया तो हमारे गाँव आ गईं।इतना मिलनसार स्वभाव कि सबका मन जीत लिया।हमारे साथ तालाब पर जातीं और हमारे साथ मछलियों को आटे की गोलियाँ खिलाती हमारे घर के बाहर तालाब है वहीं पर हम लोग कपड़े धोते,नहाते और मछलियों को आटे की गोलियाँ खिलाते ये हमारी दिनचर्या में शामिल है।सुबह पीछे के आँगन में चिड़ियों को दाना चुगाते हैं।हमारे घर में गाय, कुत्ता सब पाले हुए हैं।चाचा जी गाय को नहलाते तो शारदा जिज्जी उसे नहलाने लगतीं।एक दिन हमारा कुत्ता पीलू कहीं से चोट लगाकर आ गया तो मैं उसे साफ करके हल्दी लगाने लगी तब भी जिज्जी बोलीं लाओ मैं लगा दूँ।हमारे घर के बाहर जितनी जगह है हम लोग उसे बरेंछा से साफ करते हैं जब भइया वहाँ साफ कर रहा था तब जिज्जी ने उससे कहा तुम इतनी बड़ी लकड़ी की झाड़ू से सफाई कैसे कर लेते हो भइया ने बताया यहाँ सब लोग इसी से अपने घर के बाहर की सफाई करते हैं।हमारे लिए ये नई बात नहीं है।जिज्जी ने उससे बरेंछा लेकर झाड़ना शुरू किया एक हाथ साफ करते ही बोलीं ये तो बहुत भारी है। जिज्जी अपने मोबाइल पर हर चीज की फोटो खींच लेतीं और कहतीं ये यादें मैं अपने साथ ले जाऊँगी।एक सप्ताह कैसे बीत गया पता ही नहीं चला।दूसरे दिन मैं अपने भइया के साथ जिज्जी के पास शहर के लिए चल दी आखिर उन्होंने इतने प्रेम से बुलाया था नहीं जाते तो उन्हें बुरा लगता।दोपहर तक हम लोग जिज्जी के घर पहुँच गए।जिज्जी ने हमारी खूब आवभगत की।आज वो बहुत खुश दिख रही थीं।शाम को गेस्ट हाउस में पार्टी रखी गई थी वहीं उन्हें सम्मानित किया जाना था।सब लोग शाम को गेस्ट हाउस पहुँच गए।सारे मेहमानों के आने के बाद प्रोजेक्टर पर उन कामों की तस्वीरें दिखाईं जिसके लिए जिज्जी को सम्मानित किया जा रहा था उस पर कमेंट्री भी चल रही थी ।तस्वीरें देखकर मैं हैरान थी ये वही तस्वीरें थीं मछलियों को आटा खिलाते,चिड़ियों को दाना डालते,पीलू को हल्दी लगाते और गाय को नहलाते हुए।ये सब उनके पशु पक्षियों के प्रेम और उनकी देखभाल को दर्शा रहे थे जो उन्होंने अपना अमूल्य समय निकाल कर गाँव जाकर गाँववालों को जागरूक करने के लिए किया और प्राकृतिक सन्तुलन में पशु पक्षियों के योगदान तथा हमारे जीवन में उनका महत्व बताया।आखिरी तस्वीर देखकर तो सिर चकरा गया जिसमें वो बरेंछा से सफाई करते हुए भइया के साथ खड़ी थीं।इसमे वो गाँव वालों को स्वच्छता का महत्व समझाते हुए स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ा रही थीं।लोग उनके कामों की सराहना कर रहे थे ।सबकी नजर में उनका कद बहुत ऊँचा हो गया था पर हमारी नजर में वो बहुत छोटे कद की हो गईं क्योंकि हम तस्वीरों का सच जानते थे।

गाँव शहर बचपन सेवा सम्मान

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