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जोकर ..(आधी हकिकत आधा फसाना)
जोकर ..(आधी हकिकत आधा फसाना)
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© Anshu sharma

Drama

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जोकर का ध्यान आते ही हँसी मजाक वाला एक बौना कम कद का ही ध्यान आता है ।सामने उसकी जिन्दगी हँसी मजाक की ,पर पीछे उसको भी कोई दुख हो सकता है ,पर काम उसका हँसाना ही है तो मन ना भी हो झुठ ही मुस्कुराना होता है।ऐसी ही.एक कहानी है ,छुटकू की....

सफेद रंग से रंगा चेहरा ,नाक लाल रंग की बाल ,पैरो मे बडे़ जूते पहन भारत सर्कस मे सबको हँसाता । दिल का बहुत साफ ,सबके दुख मे आगे। झुमता चलता ,गाने का बड़ा शौक था। कद छोटा था तो सब छुटकू कहते । रस्सी पर झुलता एक से दुसरी ,तीसरी ,डर तो था नही झुलते भी सबको खुब हँसाता । जोकर कहते थे सब । ऊटपटांग काम करता ,मसखरी करता शारीरिक क्षमता से भाव प्रकट करता ।

सब आवाज लगाते ,अरे कितना मेक अप करेगा ।बहुत हो गया। छुटकू कहता बस मेक अप ही एसी चीज है जो चेहरे मे सब छिपा लेती है । आँसु ,दर्द सब । और गाना गाने लगकहता है जोकर सारा जमाना आधी हकिकत आधा फसाना'🎶🎵और हँसने लगता।

सब उसकी बातो को कभी गम्भीरता मे नही लेते थे। वो हमेशा फोन मे चार्ली चैपलीन ,रोनाल्ड मेकडोनाल्ड के विडियो देखता। हसाँने के विडियो देखता।

छुटकू की बहन की शादी थी ,दूसरे शहर जाना होगा तो रूपये इकट्टठा कर रखे थे ।सबको बार बार बताता ,घर जा रहा हूँ बहन की शादी है । खुशियो को संभाल नही पा रहा था । सब कितने खुश होगें देखकर ।भाई से कितनी बातें बतायेगा यहाँ की। कोट सिलाया । छुट्टी नही देते थे मालिक छुटकू के बिना सर्कस मे मजा नही आता वैसे तो और भी जोकर थे पर वो हावभाव पढ लेता था। और हँसा देता। सब उसको देखना चाहते थे।

छुटकू ने रिश्ता होते ही शादी की छुट्टी ले ली थी ।आज सब बाहर छोडने आये सबने बहन के लिये उपहार दिये। छुटकू कि आँखो मे खुशी के आँसू थे बोला फोटो भेजुँगा अपनी दुल्हन बनी बहन के। बहुत दिनो मे जा रहा हुँ घर ,भाई बड़ा आदमी हो गया है ।बहन की शादी बहुत बड़े घर से हो रही है।

घर पहुँच कर माँ की खुशी देखते बनती थी ।भाई से मिलने पहुँचा वो बहुत लोगो के साथ खड़ा था। छुटकू ने हाथ बढाये गले लगाने को ,भाई ने नजर अंदाज कर बोला मिलता हुँ रूको। अलग आकर डाँटने लगा क्या है छुटकू देखता नही बडे़ लोग थे साथ । बौना भाई देखते तो स्टेटस खराब हो जाता। कहकर चला गया । छुटकू का चेहरा फीका पड गया। तभी कुछ बच्चे देखो वो बौना ....और हँसने लगे । छुटकू घर के कामो मे लगा रहा नजर अंदाज करता रहा बातें ।तभी किसी ने माँ से पूछा क्या करता है छोटा बेटा माँ कुछ कहती छुटकू के चाचा ने जोकर है सर्कस में तभी कहा । अच्छा तो हम भी आयेगे देखने एक महाशय ने कहा की एक हफ्ते मे उसकी पोती का जन्मदिन है क्या वो आ सकता है हँसाने।

आज छुटकू का दिल तार तार हो रहा था । आज वो आम इंसान बनकर आया था ।बहन का भाई बनकर । ना कि जोकर बनकर ।केवल हँसी का पात्र बनकर रह गया था छुटकू। भाई को सब सम्मान दे रहे थे और वो केवल मसखरी करने वाला जोकर ।

शादी हो गयी ,माँ से मिले वापस आ गया ।अपने सर्कस । मालिक आया खुशी से बोला अरे वाह छुटकू तुम आ गये ,सबको तुम्हारा इंतजार है ,जाओ मेक अप करो ।

मेक अप ही तो था जो उसके चेहरे पर दुख के भाव नही आने देता था ,छुटकू अंदर से रो रहा था और बाहर से हँसा रहा था। आज वो चीख चीख कर रोना चाहता था। पर नही रो सकता था । वो बताना चाहता था उसका शरीर उसने छोटा नही बनाया ,वो भी आम इंसान है ,वो भी कभी चुप रहना चाहता है ,उसको भी दिल मे चोट लगती है। दिल मे रोना आ रहा हो तो हँसाना आसान काम नही ।

उसकी कलाबाजी की तालियाँ बज रही थी और वो हँसता हुआ। कमरे पर आ गया ,और जोर जोर से रो रहा था। सब सर्कस वाले आ गये ।सबने उससे पूछा बहन की शादी के बारे मे । उसने बताया वो वहाँ भाई नही जोकर बनकर गया था सबने समझाया जोकर बनना आसान नही ,किसी को हर कोई हँसा नही सकता , ये खुबी कम लोगो मे होती है, तुम देखते हो विडियो ,चार्ली चैपलीन , मिस्टर बीन ,ये सब भी तो जोकर ही है मसखरे सबको हँसाने वाले । अंतर इतना है तुम सर्कस मे हो वो टेलिविजन पर...छुटकू को समझ आ गया और वो आँसु पोछते हुये अगले दिन के लिये तैयारी के लिये उठ गया ।और गाने लगा ...छुटकू मेरा नाम ,हिंदु ,मुस्लिम ,सिक्ख ईसाई सबको मेरा सलाम ।

दोस्तो किसी की.शारीरिक रचना या काम पर नही हँसना चाहिये ,काम काम ही है कोई छोटा करता है या कोई बड़ा। आजकल सर्कस कम हो गये ,कुछ वन के पशु के प्रति शोषण पसंद नही कर रहे । इसलिये सबको चाहिये कि सब मनुष्य ही सर्कस चलाये वो ही करतब दिखाकर सबको हँसाये।

'ात

सर्कस भावना इंसान दर्द मुस्कान

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