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आधुनिक भारत
आधुनिक भारत
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© Hukam Singh Meena

Fantasy Inspirational

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फिल्मचेष्टा इश्कध्यानम् घोरनिद्रा तथैव च।

मुर्गाहारी बोतलधारी विद्यार्थी पंच लक्षणम्।

      आधुनिक विधार्थी जीवन के पांच लक्षणों की पुष्टि भारतीय किसानों के बीए, बी एड, शिक्षा धारी व्हाट्स एप्प ग्रुपों के एडमिन पुत्रों द्वारा की गयी है। श्लोक को युग में एवं स्वयं के साथ घटित घटनाओं के आधार पर रचा है। यही एक कारण है कि भारत में बेरोज़गारी,निर्धनता एवं अज्ञानता जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। ज्ञानियों ने कहा है कि वृद्धजनों की बातों पर अपना ध्यान जमाना चाहिए, उन्हें अपने जीवन में उतारना चाहिए। लेकिन आज के युवक-युवतियां A से Z तक क्या सीख गये। अपने पिता तुल्य लोगों को अंगूठा छाप का दर्जा दे रहे हैं। स्वय् तीन-तीन साल से एक ही क्लास में अध्‍ययनरत हैं, उन्हें पता नहीं की नौकरी के लिये शमशान तक का रास्ता भी कम पड़ेगा, इनके अंगुठा छाप पांच क्लास पढ़ लेते तब उन्हें डॉक्टर के जितना ज्ञान अर्जित हो चूका होता था। आज की पीढ़ी सिर्फ एक सीढ़ी चढ़ने के लिए बारह वर्ष का सा वनवास काटती है फिर भी कुछ खास हासिल नहीं कर पाती इस कमी को पूरा करने के लिए फिर पांच साल कर अज्ञात वास सा ग्रहण कर लेते हैं, फिर भी कुछ खास नहीं कोई नया ग्रहवनवास जहां कोई हाल पूछने वाला तक नहीं होता। ज्ञानियों ने कहा भी है इस पवित्र भारत के लिए, संसार में शिक्षा का नाम भी लोगों ने तक सुना नहीं था, तब हमारे भारतीय आर्यव्रत सन्तों ने ग्रन्थों की रचना की थी। आज जिस संस्क्रति को लोग अपने जीवन काल में उतारने में लगे हुए है वो भूल रहे हैं ये शिक्षा विदेशी बच्चे हमारे भारत से ही सीख कर गए हैं।

          उस कालखण्ड में लोगों को नौकरी के लिए ढूंढते फिर रहे थे तब ये ज़रूरी नहीं था कि उन्हें अंगूठा छाप होने पर नॉकरी दे दी जाती थी। तब शिक्षक अपना पूरा ज्ञान विद्यार्थी को नहीं दिया करते थे। आधुनिक शिक्षक दोगुना चौगुना ज्ञान छात्रों को दे रहे हैं लेकिन फिर भी पास होने के लाले पड़ते हैं। ऐसा क्यों? और यदि किसी ने गिरपड़ के या कैसे भी डिग्री हासिल कर ली हों वे उच्च स्तरीय नौकरी क्यों नही करते क्यों व्हाट्स एप्प और फेसबुक पर ज्ञान गंगा बहा रहे हैं। क्यों? कह देते हैं लोग की राजनीतिज्ञ अंगूठा छाप है, या यूँ कहूँ मंत्री अंगूठा छाप और संत्री स्नातक स्नातकोत्तर, डिग्री, डिप्लोमा धारी। एक मंत्री जब सत्ता में आता है तो करोड़ों की बारिश कर चुका होता है। अब यदि वो तुम्हारी जेबें कुरेदता है तो उसे अंगूठा छाप कहोगे। ज़रा सोचो उनके दौर की शिक्षा को जानो और अपने दौर के शिक्षक को पहचानो।

आज भारत विश्व की सबसे बड़ी शिक्षा प्रणाली वाला देश है यहाँ उत्तरोत्तर शिक्षा का विकास हो रहा है। एवं भारत डिजिटल भारत की कड़ी में दौड़ पड़ा है जिसका पहला कदम नोट बन्दी को लेकर किया गया। हर वैसे हर एक किसान तक को डिजिटल इण्डिया अभियान से जोड़ा जा रहा है। मज़ाक की बात ये है कि इस कड़ी में टेलीकॉम कम्पनी भी मुफ्त वाई-फाई सर्विस प्रोवाइड करा रही हैं।किसको कितना फायदा है जो भी कुछ हो वो जाने। नेता जी ने एक तरफ कह दिया देश को स्वच्छ एवं डिजिटल बना दूंगा। सबको अमीर बना दूंगा। दावा करते तो है लेकिन नेता जी एक बात "किसी एक मंच पर यदि एक ही चरित्र के डायलॉग सभी कलाकारों से बुलवाओगे तो आपका नाटक कोई नहीं देखेगा। डिजिटल इण्डिया बन रहा है मेरा देश बड़ा हो रहा है, कैशलेस ट्रांजेक्शन हो गया भारत लेकिन माफ़ करना बापू आपको लोग ज़बरदस्ती हमारी आँखों से ओझल कर रहे हैं। लेकिन आपका सपना भी तो पूरा हो रहा है।और वैसे भी मेरा भारत समृध्द भारत बन रहा है।

जय हिन्दुस्तान

article hukam singh meena

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