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बिड़ला विद्या मंदिर नैनीताल ७
बिड़ला विद्या मंदिर नैनीताल ७
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© Atul Agarwal

Drama

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हर महीने एक टाउन टर्न होता था। पेरेंट्स द्वारा हाउस मास्टर के पास जमा रुपयों में से पॉकेट मनी मिलती थी। शायाद २० रूपये या और कम। जेल से छूटे कैदियों की तरह ढलान पर घुड़ दौड़ करते हुए टाउन पहुंचते थे। पहला स्टॉप मॉडर्न बुक डिपो, उसकी ४ चीज़ ज्यादा फ़ेमस थी। सोफ्टी आइस क्रीम, पॉप कॉर्न, पेस्ट्री व विदेश के पोस्टेज स्टैम्प्स, खास कर चेकोस्लवाकिया के। पता नहीं कहाँ से छपवाते थे। सोफ्टी व पॉप कॉर्न लगभग सभी छात्र खाते थे। उसी के पास एक चाइनीज की जूते बनाने की दुकान भी थी।

एक राउंड फ्लैट्स में कैपिटल टॉकीज स्केटिंग रिंग के सामने से निकलते हुए नैनी मंदिर के पास चाट की दुकानों तक होता था। पहली बार गरम कुत्ता (हॉट डॉग) कैपिटल टॉकीज में ही खाया था। वो उस समय बर्गर की तरह ही होता था। वापसी में बोटिंग स्टैंड के पास की दुकानों से टिन्नड ठंडा पाईनएप्पल जूस फिर मॉल रोड पर २ स्पोर्ट्स दुकानों (दुआ स्पोर्ट्स व् एक अन्य) से टेबल टेनिस की बॉले खरीदते हुए या उनके सामने से निकलते हुए नानक स्वीट हाउस की ठंडी रस मलाई खाते थे।

फिर कंसल बुक डिपो व बाल मिठाई वाले मामू स्वीट हाउस से होते हुए बड़े पोस्ट ऑफिस के सामने से वापसी। खड़ी चढ़ाई, फिर भी तेज़ चलने का कम्पटीशन होता था।

कभी कभी फ्लैट्स में बैंड भी बजता था। एक तरह फुटबॉल मैच होते रहते थे।

फ्लैट्स में कोई खास भीड़ नहीं होती थी।

अब नैनीताल में भीड़ के सिवा कुछ नहीं है। फ्लैट्स में टूरिस्ट कंधे से कन्धा मिला कर चल रहा है। इस समय जो हमारे परिचित वहां गए हैं, वो मैसेज भेज रहे हैं, हाउस फुल।

पहले नैनीताल पहुचनें का एक ही मार्ग था, हल्द्वानी-काठगोदाम से। अब रामनगर की तरफ से भी मार्ग बन गया है। घोड़ा स्टैंड उसी तरफ शिफ्ट हो गया है। कारें होटल से दो दो किलोमीटर दूर खड़ी होती। जनसंख्या नियंत्रण तो होना है अगर नैनीताल की शान बचानी है, तो परमिट सिस्टम करना पड़ेगा, नहीं तो......

क्रमशः

पोस्टऑफिस चढ़ाई जनसंख्या

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