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जान की कीमत
जान की कीमत
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© Avinash Mishra

Inspirational

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रात के बारह बज चुके थे। मि. रमेश के घर पार्टी में पैग का अंतिम दौर चल रहा था। आधे मेहमान घर जा चुके थे। जो बचे थे, वे भी जाने वाले थे। मि. राहुल भी किसी तरह पत्नी का सहारा लेकर कार तक पहुंचे। शराब का सुरूर पूरी तरह दिमाग पर छाया था। स्टेयरिंग हाथ में आते ही हवा से बातें करने लगी। कार सांप की तरह लहराते चल रही थी। लगता था कि अब लड़ी कि तब लड़ी। यह देखकर मिसेज राहुल की जान सूखी जा रही थी। अभी वह यहीं सोच रही थी कि कार फुटपाठ पर चढ़ उस पर सो तीन लोगों को कुचलते हुए खंभे से टकरा कर रुक गई। एक आदमी की मौत हो गई। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। चीख-पुकार सुन आसपास के लोग आ गए। पुलिस प्रभारी को देख मि. राहुल ने जेब से सौ की गड्डी निकालकर दे दी। इसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्यवाही करते रिपोर्ट बना दी कि मृतक शराब पीकर सड़क पर सो गया था। इससे उसकी मौत हुई। इसके बाद फाइल क्लोज़ हो गई।

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