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© Harish Sharma

Drama

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“ए बल्ली , खेल पूरा कर के जा | यूं बीच में ही भगौड़ा हो रहा है|”

शाम का इतना कहना था कि बल्ली को जाने क्या हो गया उसका खून खौलने लगा | उससे लगा जैसे किसी ने गर्म लोहे की छड़ उसकी पीठ पर रख दी हो|

“मुंह संभाल के बात कर | हां , हूँ मै भगौड़ा | अगर सगे बाप की औलाद है तो दोबारा कभी मेरे साथ मत खेलने की जुर्रत मत करना , समझे |” बल्ली ने पूरे जोर से चिल्लाते हुए कहा और घर की तरफ चल दिया | ये शब्द घर तक उसका पीछा करता रहा | ‘भगोड़ा ‘ |

बल्ली एक किसान परिवार का लड़का था उसके पिताजी ने अपने पूर्वजों की तरह खेती बाड़ी का काम ही अपनाया | खेती के लिए जमीन चाहे थोड़ी थी पर बल्ली के पिता ने अपने छोटे भाई यानी बल्ली के चाचा हरनाम को खूब पढ़ाया-लिखाया | हरनाम ने दसवीं की कक्षा पास की | खेल कूद में वो तगड़ा था | कबड्डी खेलता और सुबह सवेरे खूब दौड़ लगाता | खाने पीने में कोई कमी नहीं थी | घर में दो भैंसें भी थी जिस कारण घी दूध का टोटा नहीं रहता था | गाँव के लडके दसवी करते तो फ़ौज की भर्ती के लिए पास के शहर जाकर परीक्षा देतें | हरनाम भी ऐसे ही एक दिन अपने दोस्त के साथ फ़ौज की भर्ती देखने गया था | उसे सब नौजवान देखकर जोश चढ़ा और खुद भी भर्ती के लिए अपनी शारीरिक परीक्षा दे डाली | भर्ती अफसर ने जब हरनाम की फुर्ती देखी तो बहुत खुश हुआ और बोला ,” आज से तुम देश की फ़ौज के नए रंगरूट हो गये हो |”

हरनाम ने घर आकर भर्ती के बारे में बताया तो एकदम सब हैरान हो गये | बल्ली खुश था तो सबने इस बात पर सहमती जताई और उसे बड़े चाव से फ़ौज के लिए विदा किया | बल्ली भी चाचा को गाँव के बस स्टैंड तक छोड़ने गया था उस दिन | उसे लगता कि अब उसका चाचा एक बहादुर आदमी है जिसके पास बन्दूक भी रहती है |

जब भी हरनाम छुट्टी पर आता बल्ली के लिए जरूर कुछ ना कुछ लाता | दोनों की खूब बनती | उनकी उम्र के बीच सिर्फ दस साल का फांसला था | सारा दिन हरनाम उसे लेकर इधर-उधर घूमता रहता और खेतों की मेड़ों पर घूमते और रात को सोते समय फ़ौज के किस्से सुनाता| बल्ली अपने चाचा से बहुत प्रभावित था | वो फ़ौज के अनुशासन , ट्रेनिंग और रहने सहने के बारे में हर बात जानना चाहता था |

“चाचा सारा दिन जब तुम खड़े होकर फर देते हो तो तुम्हारी टाँगे दर्द नही करती |” वो पूछता |

“ अरे नही बल्ली , सब साथी मिल जुलकर अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से करते हैं | और फिर आदत सी पद जाती है |” उसे सुनकर बड़ी हैरानी होती जब उसका चाचा उसे बंदूक की गोलियों और तोपों के बारे में बताता, बल्ली को लगता उसके चाचा कितने बहादुर हैं , जो इन सब चीजों को चलाना जानते हैं ....और यह सब कितनी खतरनाक होती हैं | गोली लगने से तो आदमी भी मर ही जाता है | फिल्मों में भी उसने ऐसा ही देखा था |

हरनाम के घर होते बल्ली अपने चाचा के साथ ही रात का खाना खाकर देर रात तक फ़ौज की कहानियां सुनता था | वह सोचता फौजी देश के लिए कितने जोखिम उठाते हैं | वह भी बड़ा होकर चाचा की तरह फौजी बनेगा| उसे सपने में फौजी वर्दी पहने और बन्दूक उठाये अपनी फोटो दिखा करती | फिर एक दिन सब कुछ बदल गया | पड़ोसी देश से बल्ली के देश की लड़ाई हो गई| हरनाम की छुट्टियां बीच में ही रुक गई | सरकार ने सभी फौजियों को वापस बुला लिया| हरनाम को भी आए अभी दो दिन ही हुए थे | रेडियो पर बार्डर के बारे में समाचार सुनकर वह भी अपना सामान बांधने लगा | उसकी आँखों में उत्साह और फर्ज का जोश था | घर वालों ने उसे बड़ी सजल आंखों से विदा किया | बल्ली की दादी यानी हरनाम की माँ ने जाते हुए अपने बेटे से भावुक विदा ली और उसे जीते रहो का आशीर्वाद देकर उसका माथा चूम लिया | बल्ली भी बहुत दुखी था पर उसके चाचा ने कहा, ” बल्ली अगली बार तेरे लिए मेडल लेकर आऊंगा और दुश्मनों को उनके घर तक खदेड़ कर आऊंगा |”

सारे देश में लोग रेडियो पर कान लगाये रहते | युद्ध बढ़ता जा रहा था | रोज कितने ही सैनिको के शहीद होने की ख़बरें आती | बल्ली को लगता जैसे पूरे घर में एक चुप सी पसर गयी है |

लगातार पन्द्रह दिन युद्ध चला | बल्ली के देश की विजय हुई | रेडियो पर जंग जीतने पर बधाइयों का ताँता लग गया | देशभक्ति के गीत रेडियो पर सारा दिन बजते रहे | कई सैनिक शहीद हुए | उनोहने अपनी कीमती जाने देकर देश की आन और शान को सलामत रखा | बल्ली के पास के कई गांवों में शहीद हुए सैनिको के ताबूत आये | पूरा गाँव उनके अंतिम संस्कार में शामिल होता | सब भावुक होते | बल्ली के चाचा का कोई अता पता ना था | वो भी तो सरहद पर ही युद्ध कर रहा था| सब उसकी चिट्ठी या उसके आने का इंतज़ार कर रहे थे | बल्ली की दादी ने कह रखा था |

“इस बार लड़का घर आएगा तो उसकी शादी करके ही वापिस भेजूंगी |”

फिर एक दिन उनके घर आर्मी दफ्तर से पत्र आया | खबर चौकाने वाली थी | बल्ली के पिता ने पत्र पढ़ा तो उन्हें जैसे झटका लगा हो |” हमें यह बताते हुए बड़ा दुख हो रहा है कि आपका बेटा हरनाम सिंह जो कि युद्ध में अपने 20 साथियों के साथ लड़ रहा था , उसका कहीं अता-पता नहीं | बाकि पलटन की शिनाख्त भी हो गयी है इससे यह साबित होता है कि उसने फ़ौज से गद्दारी की है और वो मौके से भगौड़ा हो गया है | इसलिए हम उसे भगोड़ा करार देते हुए फ़ौज से डिसमिस करते हैं |’

सारा परिवार इस आरोप से स्तब्ध रह गया | हरनाम की मां बेहोश होकर गिर पड़ी और इस सदमे को बर्दाश्त ना कर सकी | कुछ दिनों बाद उसने अपने प्राण त्याग दिए | पूरे घर में जैसे दुःख और क्षोभ की लहर दौड़ गई |

सारा घर शोक में डूबा था | मोहल्ले वाले हफ्ता दस दिन आते रहे, जितने मुंह उतनी बाते | बल्ली समझ रहा था | लोगों की नजरे और हाव भाव उसे कांटे की तरह चुभता |

सारे देश में शहीदों को सम्मान दिया जा रहा था बड़े बड़े जुलूस निकाले जा रहे थे और यहां पर एक भगौड़े की चर्चा थी| बल्ली के पिता कितने दिनों तक घर से ना निकले | मोहल्ले में भी धीरे-धीरे सारी बात फैल चुकी थी | सारा गांव बड़ी हेय दृष्टि से उन्हें देखता जैसे सारा कसूर इस परिवार का था | इस परिवार ने बेटा और भाई तो खोया ही , उम्र भर का कलंक भी पा लिया |

खेत के काम करने के बाद बल्ली के पिता घर में ही रहते | अब वे ना तो गांव की चौपाल में जाते और ना ही बुजुर्गों के साथ ताश खेलते | लोगों का आना जाना भी धीरे-धीरे कम हो गया | अब बल्ली चुपचाप रहता | मोहल्ले के बच्चे और स्कूल में उसे अजीब तरह से टार्गेट किया जाता | कई तरह के ताने मारे जाते यहां तक कि कई व्यस्क लोग भी इस मामले पर बढ़-चढ़कर अपना वाक चातुर्य बखान देते |’ अजी आदमी चुल्लू भर पानी में डूब मरे , इज्जत भी कोई चीज है | बताइए जहाँ इतने लोग अपनी जान कुर्बान कर रहे थे देश की खातिर , वही ये जनाब और ही गुल खिला गये | पूरे गाँव का नाम मिटटी में मिला दिया है |’

बल्ली के घर में एक अजीब सी उदासी छाई रहती | रात को जब सब खाना खाने बैठते तो एक अजनबी सी मुस्कुराहट चेहरे पर लाकर बात करते | हरनाम के बारे में कोई बात ना करता| बल्ली के पिता और मां उसे चाचा के बारे में पूछने पर टालते रहते | एक रात तो बल्ली ने अपने पिता को हरनाम चाचा की फोटो के पास रोते हुए देखा| ‘मेरे भाई मुझे पूरा यकीन है तू पीठ दिखने वालो में से नहीं , बस अब भगवान् से यही प्रार्थना है कि तू जहाँ भी हो , सही सलामत हो |’

पूरे 6 महीने बीत गए थे इस घटना को | बल्ली के पिता ने भी आर्मी दफ्तर से कई बार अपने भाई की कोई सूचना पानी चाही पर कुछ हाथ न लगा |

फिर पड़ोसी देश के साथ दोबारा संबंध सुधरने लगे | राजनीति की बिसात पर कई समझौते रखे गये | दोनों देश पुरानी बातें भुला कर आपसी मेलजोल को बढ़ावा देने पर ब्यान देने लगे | राजनीतिज्ञों ने एक बार फिर परिवर्तन का पल्लू पकड़ते हुए कुछ अच्छा करने की इच्छा जाहिर की | देश के दोनों वजीर आपस में गले मिलते और उपहारों का आदान प्रदान करते फोटो खिचवाते | अखबार और रेडियो में खूब वार्ताए और खबरे छाई रहती | यह कोशिश थी तो बंजर मिट्टी पर फूल उगाने जैसी| क्योकि पडोसी कई बार दगा दे चूका था | जवानो के सर काट कर लाशें भेज चूका था | खैर कई समझौते हुए जिनमें से एक समझौता युद्ध के दौरान बंदी बनाए कैदियों को अपने अपने देश के सुपुर्द करने के प्रस्ताव से भी सम्बंधित था | गांव में बनिए की दुकान पर सारा दिन रेडियो चलता और लोग बाग यह सब सुनते रहते | साल बीत चूका था | बल्ली और उसका परिवार अभी भी हरनामको भूल नहीं पाया था | उन्हें जब भी दरवाजे की कुण्डी खटकती सुनती हरनाम आता दिखता |

मोहल्ले वाले किसी लड़ाई झगड़े में उलझते या मजाक करते तो बड़ी बेशर्मी से भगौड़े हरनाम का ताना मार ही देते और कहते ,” देखो जी औलाद निकम्मी हो और मां बाप का नाम बदनाम करने वाली हो तो उनके मरने पर दुख नहीं करना चाहिए | इसमें आपका क्या दोष ? अरे जो अपने देश का नहीं हुआ वो इसका सगा बना है भला ?”

फिर एक दिन डाकिया घंटी बजाते हुए बल्ली के घर एक चिठ्ठी दे गया |बल्ली के पिता घर में ही थे | उनोहने जल्दी से पात्र पढ़ा | जैसे जैसे पत्र पढ़ते जाते उनके चेहरे पर ख़ुशी और आँखों में आंसू छलकते दिखते | पत्र पढकर वे एकदम घर से बाहर की तरफ भागे | पास ही लाला जी की दुकान पर जहाँ बाहर चबूतरे पर सब लोग ताश खेल रहे थे , पहुँच गये | लालजी को पत्र देकर बोले ,” लाला जी मेरे भाई की चिठ्ठी आई है , बस जरा एक बार चबूतरे पर पढकर सुना दो | लालाजी ने पात्र पर सरसरी निगाह मारी और वो सारा माजरा समझ गये | लालाजी ने ख़ुशी ख़ुशी चबूतरे पर जाकर बताया कि पत्र पड़ोसी मुल्क से आया है और अपने हरनाम ने लिखा है | उन्होंने पत्र खोल कर ऊंची आवाज में पढ़ा ,

” भाई साहब , नमस्कार | मैं यहां आपके आशीर्वाद से जिन्दा हूं और आप की और बाकी सबकी सलामती चाहता हूँ | मैं जानता हूं कि आप और देश की फ़ौज मेरे लापता हो जाने पर बहुत परेशान हुए होंगे | जंग के दौरान मै दुश्मनों के घर में कब घुस गया , पता ही न चला और कैद हो गया | इनोहने मुझे बंदी बना लिया और तब से अब तक मैं यहीं इस मुल्क की जेल में हूं | भाई साहब आप सब की बहुत याद आती है| माँ का ख्याल रखना और बल्ली से कहना कि उसका चाचा जल्द वापस आएगा | अब दोनों मुल्कों में समझौता हो गया है | शायद जल्द हमें अपने वतन जाने के लिए छोड़ा जाएगा | जल्द मिलेगें | आपका हरनाम |”

बल्ली के पिता स्तब्ध रह गए थे , जैसे हजारों लहरें उनके शरीर में ऊपर से नीचे होते हुए उठी और फिर झटके से सिर को चढ़ गई | लाला जी और सभी गाँव वालों ने हरनाम की खबर मिलने पर ख़ुशी जाहिर की | सब ने कहा कि वे तो पहले ही जानते थे कि अपना हरनाम भागने वालो में से नहीं | वो तो कबड्डी के मैदान में भी सब सब को धुल चटा कर मानता था |

बल्ली के पिता ने पत्र लिया और घर पहुंचकर जल्दी-जल्दी शहर जाने की तैयारी करने लगे | बल्ली और उसका पूरा परिवार हरनाम की खबर को लेकर बहुत उत्साहित थे , आज उनके सर से जैसे कोई बड़ा बोझ उतर गया था |

अगले दिन सवेरे ही अपने भाई हरनाम के जरूरी कागजात और उसकी आई हुई चिट्ठी झोले में डालकर बल्ली के पिता शहर जाने के लिए तैयार थे | शहर के प्रवेश द्वार पर ही फौजी छावनी थी| वही उनका हेड ऑफिस था बल्ली के पिता ने गेट पर खड़ी सिपाही से बात की , और बड़े साहब को मिलने की गुजारिश की | सिपाही ने उन्हें इंतजार करने को कहा | साहब शायद किसी मीटिंग में थे | बल्ली के पिता पूरे 3 घंटे वही बाहर साहब का इंतजार करते रहे | इस बीच बल्ली के पिता बार-बार सिपाही से साहब के बारे में पूछते रहते और उसे अपने भाई का पत्र दिखा देते |

अचानक साहेब की गाड़ी हार्न बजती हुई भीतर दाखिल हुई | सिपाही ने दौड़कर कार का दरवाजा खोला | कला चश्मा लगाये और मेडल से सजी छाती लिए साहेब उतरे | वे सीधे आफिस पहुंचे | बल्ली के पिता को भी थोड़ी देर बाद अंदर बुलाया गया |

“ देखिए मेरा भाई हरनाम अभी तक आया नहीं है | उसका खत आया है पड़ोसी देश की जेल से साहब| अब तो दोनों मुल्क फिर समझौता कर रहे हैं |मेरा भाई भी वापस बुला लेंगे न साहब | कितने दिन हो गये थे उसकी खबर आये और फ़ौज ने तो उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था | पूरे गाँव में हमारी बदनामी हुई |” बल्ली के पिता ने साहब कीसामने बैठ कर गिडगिडाते हुए कहा |

साहब ने चश्मा उतारा | बल्ली के पिता के पत्र को हाथ में लेकर उस पर निगाह डाली और फिर बोले,” हमें इस बात का खेद है कि हम हरनाम सिंह को सूचना न मिलने के चलते सम्मान नहीं दे पाए | आपका भाई अकेला नहीं है वहां जेल में , और भी बहुत से सिपाही भी वहां युद्ध बंदी हैं और हां अभी दोनों देशों की सरकार ने बाकी सब समझौते तो मान लिए है पर युद्धबंदियों की रिहाई पर बात चल रही है |”

बल्ली के पिता मायूस थे पर उनोहने फिर कहा .” पर साहब क्या अब मेरे भाई के नाम पर जो भगोड़ा होने का कलंक लग गया था वो तो मिट जायेगा न | देश के प्रति उसका नाम खराब न हो साहब | ये बहुत बड़ा सदमा है हमारे परिवार और गाँव के लिए | इश्वर से प्रार्थना करते है कि सब फौजी जो वहां जेल में बंद है जल्द अपने घर लौटे | कम से कम अब हमारे पास एक इन्जार तो है और सुकून भी कि हमारा भाई जिन्दा है और एक न एक दिन घर लौटेगा |

साहब अपनी सीट से उठे और बल्ली के पिता के कंधे पर हाथ रख कर बोले ,”

हमारी पूरी फ़ौज और पूरे देश को हरनाम सिंह पर गर्व है |”

उस रात हरनाम के पूरे घर में दिए जलाये गये |

Soldiers Nation Motherland

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