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शुभ चिंतक - 4
शुभ चिंतक - 4
★★★★★

© Bharti Suryavanshi

Romance

6 Minutes   14.3K    23


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प्रिया ने राज को पूरी कहानी बताई के क्यों वो उसे well wisher समझ रही थी और यहाँ प्रेम कहानी तो नीलम की थी। सबकुछ सुनने के बाद राज ने अपनी राय देते हुए कहा “मुझे नही लगता के वो अभिषेक हो सकता है क्योंकि सुना है उसकी तो बीवी है गांव में और यहां भी कोई गर्लफ्रैंड पाल रखी है उसने….हो सकता है उसका नाम भी प्रिया हो।”

“अगर ऐसा है तो अभिषेक की कल ही क्लास लेते है फिर शक के दायरे में रुद्र ही रह जायेगा।” निलम ने कहा।

अगले दिन आँफिस ब्रेक में नीलम पास के कॉफी शॉप में पहुंची राज और प्रिया भी वहां पहले से मौजूद थे। राज ने दोनों को बताया “मैंने अक्सर इसे यू ही फ़ोन पर किसी से घंटो बातें करते देखा है। एक दो बार तो बात भी सुनी थी किसी से लड़ते हुए कह रहा था कि "जल्दी ही अपनी बीवी को तलाक दे देगा।”

“ओह और देखो आँफिस में तो किसी को पता ही नहीं के ये शादी शुदा है।” प्रिया ने थोड़ा गुस्से से कहा।"

"यहां बात करने से क्या होगा उठो तुम लोग।” नीलम ने कहा और फिर अभिषेक जहा खड़े बात कर रहा था उसके पास जाकर बोली

“hello… I am Nilam… प्रिया की दोस्त…! उसने मुझे तुम्हे ये बताने के लिये कहा है कि 'आज के बाद तुम उससे कोई बात मत करना और फ़ोन कर के परेशान करने की तो सोचना भी मत। वरना जेल में पहुंचा दूंगी समझे'…ऐसा प्रिया बोली (मासूम सा चेहरा बनाकर)”

“क्या बकवास है ये।" अभिषेक ने गुस्से में कहा

प्रिया और राज थोड़ी दूर से ये सब देख ही रहे थे लेकिन अभिषेक की आवाज़ ऊँची होते ही राज वहां आया और उसने अभिषेक को चेतावनी देते हुए कहा “ hey...Hey… आवाज़ नीचे रख के बात कर समझा।”

प्रिया भी वहां आयी और उसने राज को शांत रहने का इशारा किया।अब उसे tricky होकर बात निकलवानी थी उसने कहा “लुच्चे हो तुम यार...गांव में बीवी शहर में गर्लफ्रैंड और ये भी कम था तो मुझे वेल विशर बनकर ख़त लिखते रहे।

राज - “दो को...नहीं तीन को धोखा दे रहे हो तुम... टाइम पास... है ना।”

अभिषेक का पारा अब चढ़ गया उसने कहा “मैं कुछ भी करु तुम्हे उससे क्या? It's my personal matter...और तीसरा कौन ? ये प्रिया इसे मैंने कोई लेटरर्स नहीं लिखे? दो काफी है मेरे लिए।”

राज - “ओह्ह सुना प्रियांशी दो काफी है।"

प्रियांशी अभिषेक की गर्लफ्रैंड थी जिसने सब सुन लिया था। वो भी वही मौजूद थी और ये सब सुन गुस्से में वो वहां से चली गयी l

अभिषेक प्रियांशी को मनाने गया और नीलम राज से impress थी उसने पूछा "तुम्हे कैसे पता था वो टाइम पास कर रहा है।"

“अरे मैं भी लड़का हूँ समझ में आ जाता है। दोनों हाथ मे लड्डू चाहिए थे उसे! साला cheapo! इसलिए प्रियांशी को इतने कॉन्फिडेंस से बुला लिया था।”

लड़की का no. चुराना कौन सी बड़ी बात थी... पहले तो वो मानी नहीं लेकिन मैंने मना लिया राज ने बड़ा ही मुस्कुरा कर कहा लेकिन नीलम को ये बात पसंद ना आयी

“अच्छा लड़के ऐसे ही होते है। लड़की का no. चुराया और मना भी लिया वाह क्या बात है...! time pass okkay” नीलम ने शक करते हुए कहा और वो रुठ कर वहां से चली गयी

"अरे यार मैं मेरी बात थोड़ी कर रहा था। मैं बहुत सीधा हूँ।" राज भी उसके पीछे कहता हुआ गया।

प्रिया ये नोक झोंक देख मुस्कुरायी फिर उसने सोचा रुद्र से भी बात कर ली जाए ये बात जितनी जल्दी खत्म हो अच्छा है।

प्रिया रूद्र से बात करने के लिए उसके डेस्क के पास गयी वो अपने काम में busy था

"hello... तुमसे कुछ बात करनी है…! प्रिया ने बात शुरू की। 

“हां.. तुम्हे मुझसे बात करनी है?" रूद्र ने आसपास देख कर थोड़ा जैसे shock में हो कहा। रूद्र - "हां...बोलो"

प्रिया- "Don’t mind क्या तुम बहार मिल सकते हो? At 7:30... पास के coffee shop में ”

"हां ज़रूर" रूद्र ने बहुत खुश होकर कहा।

प्रिया तो वहां से चली गयी और रूद्र उसके ख्यालों में खोया रहा आज वो बहुत ही खुश था... पहली बार किसी लड़की ने उससे बात जो की थी। रूद्र ज़्यादातर अपने काम में ही खोया रहता था किसी से जल्दी बात कर ही नहीं पाता था, इसलिए उसके कोई खास दोस्त भी न थे... पूरा दिन वो घड़ी को बार बार देखता रहा... आखिरकार वो समय आ ही गया जब प्रिया से मिलने जाना था।

प्रिया कैफ़े में पहले से wait कर रही थी... रूद्र हड़बड़ाहट में जाकर बैठा प्रिया ने उसे देखते हुए कहा "Relax.."

"yes yes…i m ok तुम्हे क्या कहना था?" रूद्र ने पूछा... वो काफी excited था। 

तभी प्रिया ने नोटिस किया के उसके दाए हाथ में gold bracelate है जिस पर R letter दोनों तरफ की कड़ी से जुड़ा हुआ लिखा था बिलकुल वैसा ही R जैसा टुकड़ा प्रिया के पास था उसे देख प्रिया ने पूछा "ये तुमने फिर से बनवाया…रूद्र - “क्या...?”

प्रिया - “ये bracelate टूट गया था न!”

रूद्र -“हम्म्म…. हां तुम्हे कैसे पता..?”

ये जवाब सुन प्रिया खुश हो गयी उसने कहा "अच्छा तो वो तुम ही थे... पर उस दिन ना भागते और न ये bracelets टूटता... well I am sorry for that!”

रूद्र प्रिया की बातो को सुनकर हैरान था... पर फिर भी उसने उसकी बातो में हां में हां मिलायी और कहा "क्या करता situation ही ऐसी थी"

“क्यों पर? तुम अब तक सामने क्यों नहीं आये... मुझे इतने motivate किया और एक बार भी तुम्हारा मन नहीं हुआ well wisher से रूद्र बनने का”

प्रिया की बातें सुनकर रूद्र तो हैरान था ही लेकिन यहां कोई और भी था जो ये सुनकर सदमे में था… पास की ही टेबल में सामने प्रिया का असली well wisher ये सब सुन रहा था। प्रिया धन्यवाद कर रही थी रुद्र का… इतनी मदद करने के लिए, उसका साथ तब देने के लिए जब वो टूट चुकी थी। रुद्र सबकुछ जान कर भी कुछ न बोला वो जनता था कि प्रिया को सच पता चला तो हाल ही मिली उसकी खुशी खत्म हो जाएगी। दूसरी तरफ वेल विशर भी चुप था उसे डर था कि पता नहीं प्रिया कैसे रियेक्ट करेगी सब जानकर। दोनो की चुप्पी ने प्रिया को ग़लतफहमी में रखा।

प्रिया अपने वेल विशेर रुद्र से मिलकर खुश थी... रुद्र प्रिया से झूठ बोलकर guilt में था... और गम के बादल छा गए थे हमारे वेल विशेर -करन राजपूत पर…! उसकी आँखों के सामने वो सारे नज़ारे एक एक कर के आने लगे जब पहली बार उसने प्रिया को देखा था मुम्बई एयरपोर्ट पर परेशान सी प्रिया…डरते हुए ही सही पर अपने हक के पैसों के लिए टैक्सी ड्राइवर से लड़ाई कर रही थी। अगले दिन वो उसे खुद के ही आँफिस में इंटरव्यू के लिए देख चोंक गया था…उसने प्रिया को जॉब तो दी...पर प्रिया के काम में अब भी वो बात नहीं थी की वो उसे pramote करे। एक दिन beach पर उसने प्रिया को देखा टोटल ड्रंक...टूटा हुआ जो अपनी नाकामयाबी से हार चुकी थी। उस दिन उसने ही unknown no. से कॉल कर नीलम और राज को बुलाया और फिर अगली सुबह जन्म हुआ well विशेर का आज 6 महीनों बाद भी करन में इतनी हिम्मत नहीं आई के एक बार भी वो प्रिया का बॉस नहीं बल्कि उसका दोस्त बनकर उससे बात करे हमेशा उसने जज़्बात छुपाये और आज जब प्रिया को खोने की नौबत आ गयी तब उसे एहसास हुआ की वो सिर्फ प्रिया की ख़ुशियाँ नहीं चाहता बल्कि उसे अपनी ज़िन्दगी में चाहता है। उस रात उसने सोचा कि जाकर सब बता दूं….

“पर क्या प्रिया यकीन करेगी? वो भी रुद्र से मिलने के बाद? क्या सोचेगी वो उसके बारे में... कल तक ठीक से बात न करने वाला बॉस आज उसका वेल विशर कैसे बन गया... प्रिया को खोने से ज़्यादा इस बात का दुःख होगा की वो मुझे गलत समझ मुझसे नफ़रत करे…” प्रिया की ख़ुशियाँ उसके लिए सबसे ज़्यादा अहम थी भले ही उसका साथ ना हो पर उसकी नफ़रत ना सही जायेगी और आखिरकार डर प्यार पर भारी पड़ा करन ने तय किया के वो खामोश ही रहेगा…!

ख़ामोश खुशियाँ डर

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