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© Vijay Vibhor

Drama

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"नमस्ते! अंकल जी।"

दरवाज़ा खोलते ही स्वीटी ने पापा के साथ आए हुए पापा के दोस्तों का स्वागत किया।

"नमस्ते....।"

सभी दोस्त ड्रॉइंग रूम में बैठ महफ़िल जमाने लग गए।

"अरे मनोहर ! तुम्हारी बेटी तो जवान हो गयी।" मोहन ने कहा।

मनोहर, मोहन की आँखों और ज़बान का लहज़ा समझ गया लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया लेकिन उसके बाद अपने घर कभी दोस्तों की महफ़िल नहीं बैठाई।

दोस्त महफिल बेटी जवान

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