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सेवा लाल हवा सड़क जयपुर
सेवा लाल हवा सड़क जयपुर
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© Yogesh Suhagwati Goyal

Drama

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सेवा लाल हवा सड़क जयपुर, जी हाँ यही है सेवाजी का पूरा नाम | उनका अपना घर हवा सड़क जयपुर पर है | सेवाजी जब भी किसी को अपना परिचय देते हैं तो नाम के साथ साथ अपने घर का पता भी बता देते हैं | सेवाजी एक सरकारी दफ्तर में काम करते थे | घर में पत्नी के अलावा एक लड़का और एक लड़की है | दोनों की शादी हो गई और बंगलोर में बस गये | कभी कभी मिलने चले आते हैं | सेवा लाल सन २०१५ में सरकारी दफ्तर की नौकरी से रिटायर हो गये | पेंशन इतनी आ जाती है कि दोनों की ज़िन्दगी बड़े आराम से कट रही है |

रिटायर होने के बाद ज़िन्दगी में एक अजीब सा खालीपन था | कुछ करना चाहते थे लेकिन पहले इसके बारे में सोचा नहीं और अब सूझता नहीं | एक दिन पास के घर में खन्नाजी को दिल का दौरा पड गया | श्रीमती खन्ना को कुछ समझ नहीं आया और उन्होंने सेवाजी से मदद मांगी | सेवाजी ने अपने दिमाग के घोड़े दौडाये और समय रहते खन्नाजी के सही उपचार के लिए उपयुक्त अस्पताल, डाक्टर और दवाईयां आदि की सारी व्यवस्था करवा दी | चार दिन में खन्नाजी घर वापिस आ गए और सात दिन में हालत काफी सुधर गई |

खन्नाजी, श्रीमती खन्ना और सभी जानकार लोग सेवाजी का शुक्रिया करते नहीं थकते थे | यहाँ तक कि डाक्टर ने भी सेवाजी की सूझबूझ की तारीफ की | इस घटना ने सेवाजी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्यों ना उपचार से सम्बंधित कुछ समाज सेवा का काम किया जाये ? इसी उधेड़बुन में अगले दिन सुबह, जयपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, सवाई मानसिंह अस्पताल पहुँच गए | उस वक़्त उनका उद्देश्य, रोगी और उनके सम्बन्धियों को होने वाली परेशानीयों को समझना था | अगले दो घंटे तक वो बहुत से लोगों से मिले | उन्हें पता लगा कि वहां आने वाले रोगियों में बहुत सारे लोग जयपुर के बाहर से आते हैं और अधिकतर पहली बार | सही जानकारी के अभाव में उन्हें बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है | जैसे अस्पताल की कागजी कार्रवाई, सामर्थ्य के अनुसार रहने खाने की उपयुक्त जगह और सही दाम पर जांच और दवाइयों की उपलब्धता आदि |

उसके बाद सेवाजी प्रतिदिन अस्पताल आने लगे | रोज सुबह साढ़े आठ के करीब पहुँच जाते और दोपहर बारह या साढ़े बारह तक वहीँ रहते | शुरू के दिनों में तो अस्पताल के दरवाजे पर खड़े होकर खुद ही आवाज़ लगाकर पूछते, क्या मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूँ ? क्या आप उपचार सम्बन्धी कोई जानकारी चाहते हैं |

सेवाजी अपने पास एक डायरी रखते थे | हर नयी जानकारी से उसे अपडेट करते रहते थे | अगले एक महीने में ही उनके पास काफी जानकारी इकठ्ठी हो गई थी | नित नये लोग उनसे जुड़ने लगे थे | एक साल के अन्दर ही सेवाजी को बहुत से लोग जानने लगे थे | रोगियों के साथ २ अस्पताल प्रशासन के लिये भी ये एक बड़ी मदद थी | दो साल में सेवा लाल हवा सड़क जयपुर, सवाई मानसिंह अस्पताल में एक जाना माना मददगार बन गया था | अब सेवाजी को अपने इस नए काम में आनंद आने लगा था | उन्होंने अपने नाम और मोबाईल नम्बर की पर्चियां छपवा ली | अस्पताल में तो वे सुबह के ४ घंटे रहते थे लेकिन अपने फोन पर दिन भर उपलब्ध थे | कोई भी कभी भी उनसे कोई जानकारी ले सकता था |

एक दिन सुबह सेवाजी जब अस्पताल पहुंचे तो एक महिला उनका इंतज़ार कर रही थी | पूछने पर पता चला कि वो सेवाजी के पैतृक गाँव से आये हैं | उनके पति भैरों लाल, कैंसर के मरीज हैं और वो लोग आर्थिक तंगी के चलते महंगा इलाज कराने में असमर्थ हैं | गाँव में कई लोगों ने सेवाजी का नाम सुझाया | वो यहाँ उसी भरोसे पर आये हैं | सेवाजी की पिछले दो साल की मेहनत ने उनकी जिम्मेदारी और बढ़ा दी थी | उन्होंने अपनी सारी जानकारी का उपयोग किया | अस्पताल में कम से कम खर्चे पर इलाज और पास ही एक धर्मशाला में ठहरने की व्यवस्था करवा दी | जांच और दवाइयों में भी जो मदद कर सकते थे, हर संभव कोशिश की | सेवाजी की जानकारी और मेहनत का नतीजा ये हुआ कि तीन महीनों में भैरों लालजी की हालत काफी सुधर गई | आखिरी जांच से संतुष्ट डाक्टर ने, कुछ हिदायतें और दवाइयां लिखकर, उन्हें घर जाने की इजाजत दे दी | भैरों लालजी और उनकी पत्नी बेहद प्रसन्न थे और बार २ सेवाजी का शुक्रिया अदा कर रहे थे |

सेवाजी ने अपने सरकारी कैरीयर में काम तो खूब किया लेकिन संतुष्टि नहीं मिली | ऊपर वाले और साथियों ने उनके हाथ जो बांधे हुए थे | इसीलिए रिटायर होने के बाद वो कुछ ऐसा करना चाहते थे जिससे उन्हें ख़ुशी मिले | आज भैरों लालजी और उनकी पत्नी के चेहरे पर ख़ुशी देखकर मानो सेवा लाल हवा सड़क जयपुर का नाम सार्थक हो गया था |

Hardwork Life Society

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