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तोता राम व्यास
तोता राम व्यास
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© Harsh Arora

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गुप्त साम्राज्य के दिनों से करीब एक हजार से अधिक वर्षों तक भारत में पुराणों का संकलन हुआ था। पुराण हिंदू धार्मिक ग्रंथों की वो शैली है जिसमें ब्रह्मांड के निर्माण से विनाश का इतिहास और महत्वपूर्ण राजाओं, नायक, संतों, और देवी देवताओं की वंशावलियाँ पाई जाती है। सब पुराणों में सर्वश्रेष्ठ पुराण भागवत को माना जाता है। भागवत में मुख्य रूप से विष्णु और उनके अवतार भगवान कृष्ण के जीवन की गाथा है। तोता राम व्यास भागवत के उन पात्रों पर आधारित है जो उसके विकास और प्रसार में महत्वपूर्ण रहे थे।

पहला दृश्य


जब पर्दा उठता है तो शिवजी ध्यान मे बैठे हैं और पार्वती जी कुल्हढ़ मे चाय पी रही हैं

नारद: नारायण नारायण । होली शुभ हो पार्वती देवी।

पार्वती: आपको भी शुभ हो होली नारद जी आइये यहाँ पधारिये । इस बार बहुत दिनों बाद हमारी याद आई ।

नारद: याद तो बहुत बार आई पर अब बुढ़ापे मे रोज रोज आया नहीं जाता ।पार्वती चाय का कुल्हढ़ देते हुए।

पार्वती: चाय पियेंगे बस अभी बनायी है।

नारद: हाँ हाँ अवश्य पियेंगे देवी पर चीनी हम डट कर पीते हैं।

पार्वती: मुझे मालूम है डट कर ही डाली है । कहें तो होली के मौके पर थोड़ी सी भांग भी डाल दूँ।

नारद:अरे वाह चाय मे भाँग। आपके मुह मे घी शक्कर।

दोनों हंसने लगते हैं।

नारद (शिव की ओर देखते हुए): हमारे शिव जी तो ध्यान में मग्न हैं। आपके क्या हाल चाल हैं आजकल।

पार्वती: हम सब ठीक हैं। कार्तिके और गणेश बड़े हो रहे हैं। जीवन में सब तरह की शान्ती है।

नारद: सब शांति है यह तो बहुत अच्छा है तो देवी एक बात बताओ। शिवजी हमेशा की तरह अब भी आपको प्यार करते हैं।

पार्वती: यह कैसी बात करते हैं नारदजी वो मेरे पति हैं मुझे प्यार क्यों नहीं करेंगे।

नारद: बस ऐसे ही पूछ लिया। समय के साथ आदमी अक्सर बदल जाता है। अभी कुछ दिन पहले मैंने शिवजी को भांग के अड्डे पर देखा था।

पार्वती: पर नारदजी आप भांग के अड्डे पर क्या कर रहे थे?

नारद: जहाँ भी नारायण का नाम लिया जाता है, में तो वहां पहुँच जाता हूँ।

पार्वती: मेरे शिवजी मुझे बहुत प्यार करते हैं मैंने ही उन्हें भांग के अड्डे पर भेजा था । होली जो आ रही थी ।

नाद: तो शिवजी आपको अपने सब रहस्य बता देते हैं।

पार्वती: हाँ हाँ मुझे अपने बारे में सब बता देते हैं।

नारद: अच्छा तो आपको मालूम है यह जो मुंडों की माला पहनते हैं यह मुंड किसके हैं।

पार्वती: यह मुंड किसके हैं। हाँ, यह तो कभी नहीं बताया।

नारद: कभी नहीं बताया। ओ हो। ठीक है जैसा है ठीक ही है। तो अब मैं तो चलता हूँ। नारायण नारायण।

पार्वती जी वहीँ बैठी सोचती रहती हैं। यह मुंड किसके हैं फिर उठ कर मंच पर चलते हुए कहती रहती हैं, "किसके मुंड हो सकते हैं"

फिर शिवजी के पास जा कर उनकी माला मै से एक मुंड ले कर कहती है "इनकी किस्से शकल मिलती है" उसी समय शिवजी जोर से साँस लेते हैं और पार्वती डर कर जहाँ नारद बैठे थे वहां बैठ गई और उनके कुल्हढ़ से चाय पीने लगी। तभी नारद मंच पर आ कर कहते हैं "यह कुल्हढ़ मेरा है"

पार्वती: (मुंह बना कर) यह कुल्हढ़ मेरा है …… पर यह नहीं बताएँगे कि मुंड किसके हैं। अच्छी भली चैन से चाय प़ी रही थी आ गए आग लगाने।

तभी शिव जी उठ कर आते हैं।

शिवजी: आज बहुत शांति रही ध्यान में। अरे आपको क्या हुआ प्रिय कुछ परेशान नजर आ रहीं हैं?

पार्वती: हाँ परेशान हूँ। बहुत परेशान हूँ।

शिवजी: ऐसा क्या हो गया आज प्रिय।

पार्वती: यह बताइए कि आप मुझसे प्यार करते हैं?

शिवजी: यह कैसी बात कर रहीं हैं आज प्रिय। आपका और हमारा तो जन्म जन्मान्तर का। साथ है हम आपको प्यार क्यों नहीं करेंगे।

शिवजी पार्वती की ओर आते हैं ।

पार्वती: बस अभी दूर रहिये।। पहले आपसे आवश्यक बात करनी है।

शिवजी: हाँ हाँ कीजिये अपनी बात।

पार्वती: यह बताईये कि आप अपने सारे रहस्य हमें बता देते हैं।

शिवजी: जिन रहस्यों को आपको जानने की आवश्यकता होती है हम आपको बता देते हैं।

पार्वती: तो यह बताईये यह जिनकी माला आपने पहनी हैं यह मुंड किसके हैं।

शिवजी: यह मुंड किसके हैं यह जानने की आवश्यकता हमारे विचार से आपको नहीं है।

पार्वती: आवश्यकता है। आपको अभी बताना होगा कि यह मुंड किसके हैं।

शिवजी: अब आप इतना पूछ रही हैं तो बता देते हैं … यह सब मुंड आपके ही हैं।

पार्वती: मेरे हैं यह किस तरह का मजाक है मेरे कैसे हो सकते हैं मेरा मुंड तो मेरे अन्दर है।

शिवजी: यह तो इस जन्म का मुंड है प्रिय हमारा और आपका तो जन्म जन्मान्तर का साथ यह मुंड तो आपके पिछले जन्मों के हैं।

पार्वती: मेरे पिछले जन्मों के हैं? मैं हर जन्म मे मरती रही और आप जिन्दा रहे और मेरे मुंडों की माला बड़ी करते रहे यह कैसा प्यार है आपका।

शिवजी: अब देखो प्रिय मैं तो भगवान हूँ मैं तो कभी मर नहीं सकता।

पार्वती: ऐसा क्या रहस्य है जिससे आप कभी मर नहीं सकते मुझे भी बताइए अमर रहने का रहस्य।

शिवजी: प्रिय यह रहस्य बताना तो बहुत मुश्किल है।

पार्वती: क्यों मुश्किल है। आपको बताना पड़ेगा।

शिवजी: ठीक है आप इतना कहती हैं तो बताते हैं पर कुछ शर्तें हैं।

पार्वती: क्या शर्तें हैं।

शिवजी: एक तो मैं यह रहस्य सिर्फ एक बार बताऊंगा।ठीक से सुनना।दूसरा मैं सिर्फ तुम्हें। सुनाऊंगा और किसी को नहीं।

पार्वती: ठीक है यहाँ कोई और नहीं है अभी जल्दी बताइए।

शिवजी: आओ बैठो ध्यान से सुनना।

शिवजी रहस्य बताते हैंपार्वती जी सुनते हुए सो जाती हैं।

शिवजी: कहा था रहस्य एक बार सुनाऊंगा। बस सो गईं।

शिवजी को पीछे एक तोता दिखता है।

शिवजी: अरे यहाँ तोता कैसे आ गया। शायद इसने मेरा रहस्य सुन लिया। पकड़ो इसेऔर वो तोते के पीछे भागते हुए मंच से बाहर चले जाते हैं।

दूसरा दृश्य


व्यास की पत्नी (पिंजला) अपना पेट पकडे हुए मंच पर आती हैं।

पिंजला: अरे यह कैसा तोता था जो सीधा कर मेरे मुंह में चला गया।

कुछ ही देर में शिवजी मंच पर आते हैं।

शिवजी: अरे मेरा तोता कहाँ है मुझे वो तोता चाहिए।

पिंजला: तोता कैसे देदूं वो तो मेरे पेट में चला गया।

शिवजी: पेट में चला गया तो पेट से निकालो मुझे मेरा तोता चाहिए।

तभी व्यास मंच पर आते हैं।

व्यास: यह क्या हो रहा है यहाँ प्रिय आप ठीक तो हैं।

पिंजला: क्या ठीक हूँ मैं यहाँ होली के रंगे कपड़े सुखा रही थी …एक जंभाई आई क़ि जाने कहाँ से एक तोता आया और सीधा मेरे पेट में चला गया और यह शिवजी उसे मेरे पेट से निकालना चाहते हैंव्यास: शिवजी यह क्या मजाक है आप क्यों तंग कर रहे हैं मेरी पत्नी को।

शिवजी: यह मजाक नहीं है वेद व्यास जी। इस तोते ने मेरे अमर होने का रहस्य सुन लिया है यह रहस्य सबको पता लग गया तो अनर्थ हो जायेगा दुनिया में कोई कभी मरेगा ही नहीं ।

व्यास: अगर इसने आपका रहस्य सुना होता तो बेचारा मेरी पत्नी के पेट में जा कर क्यों मरता।

शिवजी: आपकी बात तो ठीक है पर फिर भी अगर यह जिन्दा पेट से निकल आये तो मुझे दे दीजियेगा।

व्यास: ठीक है अब आप जाइये मेरी पत्नी की तबियत ठीक नहीं है।

शिवजी: अच्छा मैं चलता हूँ।

व्यास: प्रणाम शिवजी।

शिवजी: प्रणाम वेद व्यास जी।

शिवजी मंच से चले जाते हैं।

पिंजला: मुझे इन शिवजी के लक्षण कुछ ठीक नहीं लगते भांग खा के लुंगी पहन के जब देखो चले आते है।

व्यास: प्रिय आप तो ठीक हैं न।

पिंजला: ठीक तो नहीं हूँ इस मरे तोते ने मेरा सारा जी ख़राब कर दिया है। अब मेरे बच्चे का क्या होगा।

व्यास: चिंता मत कीजिये एक तोता हमारे बच्चे का कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

पिंजला: पेट के अन्दर तोता कुछ भी कर सकता है।

व्यास: हाँ कर तो सकता है। आपके बेटे को तोता बना सकता है।

पिंजला: आपको तो मजाक लगता है न। मेरे बच्चे को कुछ हो गया तो मैं जान दे दूंगी।

व्यास: अच्छा ऐसा करेंगे आपके बेटे का नाम तोता रख देंगे वो मेरी भागवत को तोते की तरह रट लेगा और बड़ा हो कर सब को सुनाएगा।

पिंजला: यह कैसी बात कर रहें हैं मैं बिलकुल अपने बेटे का नाम तोता नहीं रखने दूंगी तोता भी कोई नाम है।

व्यास: ठीक है हम उसे तोता राम बुला लेंगे।

पिंजला: नहीं… मेरे प्यारे से बच्चे के नाम में कहीं भी तोता नहीं होगा आप कोई भी और नाम बताइए मुझे स्वीकार होगा।

व्यास: वचन देती हो?

पिंजला: हाँ वचन देती हूँ।

व्यास: ठीक है हम आपके बेटे का नाम सुक रखदेंगे।

पिंजला: सुक नहीं सुक देव कैसा रहेगा।

व्यास: ठीक है सुक देव ही सही । पक्का रहा।

पिंजला: हाँ पक्का रहा । पर एक बात बताईये …सुक का मतलब क्या होता है।

व्यास: सुक का मतलब होता है …तोता।

पिंजला अपने सर पर हाथ मारते हुए कहती है।

पिंजला: हे भगवान आपसे तो भगवान ही बचाए।

तीसरा दृश्य


सगीत के बीच में सुक देव मंच पर आते हैं और पीछे से कोई कहता है।

परीक्षित: तोता राम जी कहाँ हैं आप।

सुक: अरे बंधू मुझे तोता राम न बुलाओ मेरी माँ को बहुत बुरा लगेगा मेरा नाम सुक देव है।

परीक्षित: ठीक है सुक देव ही सही। मेरा नाम परीक्षित है मैं अर्जुन का पोता हूँ ।

सुक: महारथी अर्जुन का पोता। मेरे यहाँ।बोलो कैसे आना हुआ बंधू।

परीक्षित: यार बहुत बुरा हुआ मेरे साथ।

सुक: क्या किसी लड़की को छेड़ दिया

परीक्षित: मजाक छोड़ो यार बहुत मुश्किल मे पड़ गया हूँ मैं

सुक: ऐसा भी क्या हुआ हम भी तो सुनें।

परीक्षित: मैंने एक ऋषि के साथ मजाक कर दिया और उसने मुझे शाप दे दिया।

सुक: ओ हो । इन ऋषियों के साथ मजाक नहीं करना चाहिए ।। बस छोटी सी बात का बतंगड़ बना देते हैं। अगली बार उनसे मजाक करने के पहले थोड़ा सोचना चाहिए। अच्छा आपको क्या शाप मिला है?

परीक्षित: मुझे शाप मिला है कि मुझे सात दिन मे एक सांप काटेगा और मैं मर जाऊंगा।

सुक: ओ हो यह तो बहुत बुरा हुआ। अरे सात ही दिन रह गए है तो अपने आखरी ७ दिनों के मनोरंजन के लिए आप क्या करना चाहेंगे।

परीक्षित: नहीं नहीं, मनोरंजन तो बहुत कर ली, अब तो परलोक सुधारना है। मुझे महाभारत के बाद भगवान कृष्ण ने दूसरा जन्म दिया था मै इन सात दिन उन्ही के बारे मे आपसे सुनना चाहता हूँ।

सुक: ठीक है ।। मैं आपके सात दिन के जीवन को साठ साल के जीवन से भी महान बना दूंगा । जब मै छोटा था तब मेरे पिता जी यानि वेद व्यास ने मुझे तोते की तरह भागवत रटाई थी। आज वो दिन आ गया है जब मैं भागवत तुम्हें और सारी दुनिया को सुनाऊंगा।

परीक्षित: ठीक है सुनाइए।

सुक: सारी भागवत सुनाने मे तो सात दिन लगेंगे। आज मैं कृष्ण लीला से शुरू करता हूँ। कृष्ण भगवान ने अपनी जीवन लीला का सार गोपियों के साथ होली खेल के बताया था।

परीक्षित: सारे जीवन का सार बस एक होली खेल कर।

सुक: होली में बहुत ज्ञान है बंधू । तुम्हें मालूम है ठुमका क्या होता है।

परीक्षित ठुमका मारते हुए कहते हैं।

परीक्षित: ऐसा ठुमका।

सुक: हाँ ऐसा ठुमका। इस ठुमके का मतलब मालूम है।

परीक्षित: ठुमके का क्या मतलब होता है ठुमका तो बस मस्ती के लिए होता है।

सुक: हाँ जीवन की लीला भी एक मस्ती है दोस्त। जिसने अपने जीवन मे ठुमके सहित लीला भरी होली खेली हो, उसके जीवन में रोज दिवाली ही दिवाली होगी। यही कृष्ण लीला का सार है।

परीक्षित: तो बताइए प्रभु भगवान कृष्ण ने होली कैसे खेली थी।

सुक: लो तुम्हें आज बताता हूँ भगवान कृष्ण ने बिरज में कैसे होली खेली थी।

होली खेले नंदलाला बिरज में गाना।

।।

नाटक दृश्य होली

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