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कटी उंगलियां भाग अन्तिम
कटी उंगलियां भाग अन्तिम
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© Mahesh Dube

Thriller

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कटी उंगलियाँ  भाग 11


         श्याम ने झटपट रचना की एक साड़ी लेकर मोहित के हाथ पाँव बाँध दिए। अब वो अपनी मर्जी से हिल भी नहीं सकता था। थोड़ी देर में मोहित को होश आया तो वह कसमसाने लगा। उसकी खोपड़ी से रक्त बहकर उसकी बाईं आँख में घुस रहा था जिससे उसे देखने में तकलीफ हो रही थी। आँखें मिचमिचाकर उसने देखा कि रचना और श्याम उसके पास ही खड़े थे। आखिर तुमने ऐसा क्यों किया रचना? मोहित कराह मिश्रित स्वर में बोला। रचना ने मुंह फेर लिया। तब श्याम मुस्कुराता हुआ बोला, बता दो डार्लिंग! वैसे भी बेचारा कुछ देर का मेहमान है और मरने वाले की आखिरी इच्छा पूरी करने का रिवाज है। रचना बोली, मैं श्याम से प्यार करती हूँ! तब तुमने मुझसे शादी क्यों की? मोहित बोला। मैंने नहीं की शादी! रचना चीख पड़ी, तुम्हारे पैसेवाले जज बाप ने मुझे खरीद लिया। ये क्या कह रही हो रचना? मोहित अचरज से बोला, क्या तुमने अपनी मर्जी के खिलाफ मुझसे शादी की थी? 
हाँ! रचना बोली, मेरे पिताजी ने सुसाइड की धमकी देकर मुझे मजबूर कर दिया था। मैं लाचार थी। "पर उन्हें इतनी जबरदस्ती करने की क्या जरुरत थी?" मोहित का असमंजस दूर ही नहीं हो रहा था। मेरे पिताजी मकान के मुकदमे में गले तक फंसे हुए थे और उनपर काफी कर्जा हो गया था, रचना बोली, तुम्हारे पिताजी ने एक विवाह समारोह में मुझे देखा तो मुझे अपनी बहू बनाने को मचल गए। मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा तो मैंने साफ़ इनकार कर दिया लेकिन तुम्हारे पिता ने अपनी ऊँची पहुँच का वास्ता देते हुए मकान का मुकदमा जितवा देने की बात कह कर उन्हें मजबूर कर दिया कि वे मेरा विवाह तुमसे कर दें। मैं बहुत रोइ पर किसी ने एक न सुनी। फिर मैंने श्याम से बात की जिसने मुझे ऐसा प्लान बताया जिसपर चलकर हम दोनों न मिल जाते बल्कि मुझे काफी पैसे भी मिलते। मैं राजी हो गई। 
श्याम ने मंद मंद मुस्कुराते हुए कहा, जानू! जरा इसे खुल कर बताओ  कि हमने कैसे इन लोगों के अंध विश्वास का फायदा उठाया। 
रचना बोली, जब बारात में साधु से झगड़ा हुआ और अनायास ही विवाह के यज्ञ कुण्ड में दो बिल्लियाँ कूद पड़ीं तो श्याम ने एक जबरदस्त प्लान बनाया। पहले सुहागरात को ही इसने मुझे एक दवा का पाउडर दिया था जिसे मैंने घोलकर तुम्हारे दूध में मिला दिया जिसे पीकर तुम्हारे हाथ पाँव ऐंठ गए और लोगों ने इसे साधु का श्राप समझा। फिर मैंने कांच के बरतन तोड़े फोड़े। जब तुम नहाने गए तो उसके पहले ही मैंने पानी की टँकी में लाल रंग मिला दिया था जिसे तुमने रक्त समझा और चिल्लाते हुए भागे। 
और कटी उंगलियाँ? विस्मय से आँखें चौड़ी किये मोहित बोला।
वो मैंने सरकारी अस्पताल के मुर्दा घर से ली थी बालक! श्याम किसी संत महात्मा की तरह बोला, वो तीन ही उंगलियाँ कई बार अनेक अनेक तरह से रचना तुम्हे परोसती रही। कभी मुर्गे के रक्त में सानकर तो कभी अखबार में लपेट कर। 
तो क्या महंत अघोरनाथ गिरी का झाड़ना फूंकना भी नाटक था? 
वे लोग तो होते ही हैं नाटक बाज! लोगों के अंधविश्वास का लाभ उठाना ही उनका पेशा है। लेकिन वो हम लोगों से मिला हुआ नहीं था। 
जब वो आँखें बंद किये पूजा का नाटक कर रहा था तब मैंने चुपके से एक दियासलाई उसके चोगे में छुआ दी थी और वो आग का शिकार होकर झुलस गया था। रचना मुस्कुराते हुए बोली, उसकी आँखें किसी बिल्ली की तरह चमक रही थी।
उस दिन मैं फ़ाइल लेने आया तब तुम घर पर नहीं थी न?  मोहित बोला 
जब तुमने कहा कि तुम घर पर आये थे तब मैं घबरा गई और मैंने श्याम को फोन किया तो श्याम के तेज दिमाग ने इसका भी तोड़ निकाल लिया। इसने कहा कि तुम अपनी बात पर अड़ी रहो और दूसरे दिन जरूर मोहित तुम्हारी जासूसी करेगा तब तुम मेरे बताये अनुसार करना। 
और वही हुआ, श्याम बोला, अगले दिन तुम ऑफिस जाने के बहाने जब रचना की जासूसी कर रहे थे तब हर घडी मेरी नजर में थे। मैंने तुरंत रचना को फोन कर दिया और तुम्हे भरमाने के लिए रचना विक्षिप्तों जैसी मुद्रा बनाकर श्मशान तक गई और लौटी। तब तुम्हे विश्वास हो गया कि रचना काली शक्तियों के वश में है। उसी ने मेरे कहने पर रात को नाटक कर के तुम्हारा गला भी दबाया था। 
ये नीला फूल का क्या चक्कर है? मोहित बोला। 
ये हमारा कोड वर्ड है  जब नीला फूल का उत्तर तुमने पीला गुलाब से दिया तभी मैं समझ गया कि फोन पर रचना नहीं कोई और है। हम नीला फूल का उत्तर काली मिर्च से देते हैं! मुझे तुम्हारे बातचीत के तरीके पर संदेह हुआ तो मैंने कोड पूछ लिया था। 
अब तुम लोग मेरे साथ क्या करोगे? मोहित ने दबी जबान से पूछा। 
हा हा हा! श्याम ने ठहाका लगाया, आरती उतारेंगे। 
अँधेरा तो घिरने दो! 
थोड़ी देर में अँधेरा घिर आया। बुरी तरह बंधे पड़े मोहित का मुंह आँख भी बांधकर एक बंडल जैसा बना दिया गया और श्याम तथा रचना उसे टिकाकर नीचे ले आये जहां श्याम द्वारा लाई गई मारुति वैन खड़ी थी। दोनों ने उसे वैन में लादा और तेजी से आरे कॉलोनी के जंगल की ओर  चल पड़े। आरे कॉलोनी मुम्बई की सबसे हरी-भरी जगह है जहां कई हजार एकड़ में केवल जंगल ही जंगल हैं और खूब जंगली जानवर भी पाये जाते हैं। ये दोनों घुप्प अँधेरे में जंगल के बीच मोहित  को ले गए और फेंक आये। बुरी तरह बंधे मोहित का मरना अब वक्त की बात थी। जंगली जानवर इतना आसान शिकार कहाँ छोड़ने वाले थे। 
           अगले दिन सुबह रचना का दरवाजा खूब जोरों से  पीटा जाने लगा। जैसे ही उनींदे श्याम ने दरवाजा खोला वह पुलिस की गिरफ्त में था। पुलिस के पीछे थका हारा मोहित खड़ा था। श्याम की समझ में नहीं आया कि मौत के मुहाने पर खड़ा मोहित लौट कैसे आया? दरअसल मोहित ने जब दिनेश को विदा कर दिया तब थोड़ी दूर जाने के बाद उसका मन नहीं माना तब वो वापस लौट आया और तब उसने भगवान् का लाख-लाख धन्यवाद दिया जब अँधेरे में उसने रचना को एक अनजान आदमी के साथ एक लंबा सा बंडल ले जाते देखा। दिनेश ने फासला रखकर उनका पीछा किया और जंगल में उनके पीठ मोड़ते ही जाकर मोहित को आजाद कर दिया। वापस लौटते समय उनकी बाइक का पैट्रोल ख़त्म हो गया तो वे कई किलोमीटर पैदल चलते हुए लगभग भोर के समय पुलिस स्टेशन पहुंचे जहां से पुलिस की सहायता लेकर अपने घर पहुँचने में मोहित को थोड़ा ही वक्त लगा। 
      फिर क्या था, श्याम और रचना को उनकी करनी का फल भोगने के लिए जेल भेज दिया गया और मोहित को डरावनी कटी उँगलियों के आतंक से छुटकारा मिल गया। 

समाप्त 

रहस्य कथा

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