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जय हो भारत
जय हो भारत
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© Sandhya Tiwari

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   कढिले ,कल्लन, कल्लू ,रमुआ लखपत सभी अबरी की झंडिया बनाने बनाने मे जुटे है ।कोई लेई लगाता, कोई सुतली सुलझाता ।पूरे गांव में परधानी के चुनाव का जोर था।गजोधर बाबू पैसा पानी सा बहा रहे हैं।गजोधर बाबू उर्फ दद्दा पिछली बार भी परधानी में खडे थे, लेकिन बडे कम अन्तर से अपने प्रतिद्वन्दी से हार गये थे ।गजोधर बाबू के दादे परदादे जमींदार थे।इसलिये उनमें जमींदारी की हनक पैदाइशी थी ।गांव बालों के लिये शराब, कबाब ,पान, पुडिया सबका इन्तजाम था।इस बार वह किसी भी कीमत पर चुनाव हारना नहीं चाहते थे। सो सबके लिये कुछ न कुछ था उनके यहां।
      आज चुनाव प्रचार का अन्तिम दिन था सभी प्रत्याशी आज अपना "दि बेस्ट " देने के लिये कटिबद्ध थे।गजोधर दद्दा ने गांव सजवा दिया ।खाने पीने का इन्तजाम भी करवा दिया। और कैसे आश्वस्त हुआ जाये कि उनके वोट न कटें ।बैठे-बैठे उनकी आंखो में चमक आ गयी ।उन्होने खूंटे से बंधी गाय खोली और चल दिये दल बल के साथ। गाय आगे आगे गजोधर दद्दा पीछे पीछे ।गांव की जिस बखरी में जाते उसी के बडे बूढों के पांव चट्ट से छूते और दांत निपोरते हुये कहते;  "चच्चा वोट हमही को दीजौ। तुमै गऊ माता की किसम ।पकरौ गऊ माता की पूंछ ।खाउ किसम कि जा घर को वोट कहूं और नाय जायेगो।"
>> गांव के चचा ताऊ राम बाण से बच के कहां जाते।
>> परधान गजोधर दद्दा की जय।

chunaav prachaar jeevan

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