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किसान
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© DivyaRavindra Gupta

Drama Tragedy

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रघु आज बहुत खुश था । खेत हरी भरी फसल से लहलहा रहे थे । इस बार अच्छी बारिश ने फसल की अच्छी पैदावार दिखाई थी । पिछले 2 साल से अकाल की मार झेलते झेलते वह कर्ज के बोझ से दब गया था । पिछले वर्ष पिताजी के बारहवें के भोज में बनिये से लिया कर्ज लौटाने की आस जगी थी। अगर नहीं लौटा पाया तो गिरवी रखी जमीन से हाथ धोना पड़ेगा । फसल की अच्छी पैदावार से मंडी में अच्छे दाम मिलने की आस ने उसे प्रफुल्लित कर दिया और वह बनिये का कर्ज चुकाकर , बिटिया के हाथ पीले करने की भी तैयारी करने लगा। पर अभी फसल को कम से कम दो पानी और पिलाने की आवश्यकता थी । कड़क सर्द भरी रातों में भी वो खेत पर ही रहता ताकि फसल की जानवरों से सुरक्षा भी कर सके । वैसे भी उसके गांव में रात को ही बिजली आती । लगभग 10 डिग्री की कड़कड़ाती बर्फीली रातों में मधु , पम्प चला फसल को पानी पिलाता । सर्दी से बचने के लिए ओढ़ने को बरसों पुराना एक फटा कम्बल ही था और पैरों में फटे प्लास्टिक के जूते। हाड़ कम्पकपाती सर्दी में भी वह पूरी रात खेतों में लगा रहता ।

घर पर खटिया पर हरदम लेटी 90 वर्षीय बीमार बुढ़िया माँ , अधेड़ उम्र की बीवी , 19 साल की शादी लायक सयानी बेटी और 5 वी कक्षा में पड़ता छोटा नटखट बेटा , यही उसका परिवार था ।

घर के नाम पर एक 12 x 30 वर्ग फ़ीट का एक कच्चा मकान, जिसके आधे हिस्से में तो 1 भैंस और 2 बकरियां बन्धी रहती ।

कइयों बार तो बीवी कह चुकी थी कि बीच में एक दीवार खड़ी करवा दो ताकि बकरियां रसोई तक ना आ पाये और रसोई- आंगन में जमीन पर परसी करवा दो ताकि भैंस बकरी के मल मूत्र से गन्दगी कम रहे पर हाथ तंगी से सम्भव नहीं हो पाया था ।रघु ने बोला ,इस बार मकान की मरम्मत भी करवा देगा ।

2 बीघे की फसल में वो सब समस्याओं का समाधान ढूंढ रहा था । एक रात ,फसलों को पानी देने के लिए जैसे ही पम्प चालू किया अचानक शार्ट सर्किट हुआ और वो करेंट लगने से झुलस कर अधमरा हो गया, घनघोर रात के अँधेरे में उसकी दर्दभरी चीख सुनने को आस पास कोई नहीं था । उसके सारे सपने उसकी असहाय आँखों के सामने दम तोड़ रहे थे। तड़पता ,छटपटाता, ठिठुरता शरीर निस्तेज हो चुका था ।

अगली सुबह देर तक घर ना लौटने पर बीवी जब खेत पर आई तो उसकी आँखों के सामने उजड़ी हुई दुनिया शरशैय्या पर पड़ी थी । वह दहाड़े मार रही थी , कुछ ही देर में पूरा गांव इकट्ठा हो गया।

बनिये का कर्ज, सयानी बिटिया की शादी , घर की मरम्मत सब धरे रह गये ।

जैसे ही खबर मीडिया की सुर्खी बनी , कुछ ही देर में उजले श्वेत वस्त्रधारी नेताजी चमचमाती गाड़ी से आये , सांत्वना दी , 25000 रुपये का सरकारी अनुदान देते हुए फ़ोटो भी क्लिक करवाई और किसी शादी में महंगे भोज में शामिल होने में देर हो जाने के कारण अपनी फौज के साथ गन्तव्य को निकल लिए ।

खेतों को बिजली की आपूर्ति अभी भी रात को ही हो रही थी और, बिटिया की शादी अधर झूल में लटक चुकी थी...।

Story Farmer Responsibility Life Death

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