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रिश्ता
रिश्ता
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© Purva Kulkarni

Inspirational

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कुरणपूर नाम के गाँव में एक भगवान शंकर का मंदिर था।

उस मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर एक भिखारी भीख माँगता था। हर सोमवार की तरह इस सोमवार भी रोहन और उसकी माँ दर्शन करने के लिए आए थे। रोहन की माँ दर्शन के बाद उस भिखारी को प्रसाद और खाने के लिए और कुछ काम शुरू करने के लिए पैसे दे दिए।

वहाँ से दोनों निकल गए। रास्ते में चलते-चलते रोहन ने उसकी माँ से कहा, "माँ, हमारा और उस भिखारी का क्या खून का रिश्ता है जो आपने उसे पैसे दे दिए ?"

रोहन की यह बात सुनकर रोहन की माँ ने उसे कहा, "कुछ लोग मनुष्यों के प्रति जानवरों के समान व्यवहार करते हैं, उनसे बुरा व्यवहार करते हैं। अगर हम भी गरीब लोगों को अनदेखा कर दें तो उन लोगों का जीना मुश्किल हो जाएगा।

हम उनकी मदद नहीं करेंगे तो कौन करेगा ? अगर हम चुप रहें तो बुरे लोगों के कारण बुराई बढ़ जाएगी और अच्छाई खत्म हो जायेगी। अब समझे मैंने उन्हें पैसे क्यों दिए ?"

इधर उन पैसों से उस भिखारी ने अपना काम शुरू कर दिया और वह अच्छा-खासा कमाने लगा। कुछ महीनों बाद वह भिखारी रोहन और रोहन की माँ से मिलने आया। उसने रोहन की माँ को धन्यवाद दिया। रोहन को एक नई सीख मिली।

भिखारी रिश्ता व्यवहार

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