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मकड़जाल भाग 4
मकड़जाल भाग 4
★★★★★

© Mahesh Dube

Thriller

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मकड़ जाल भाग 4

 

   अगले दिन विशाल के पास कई दुकानों की लिस्ट आ गई जो ध्रुव ने भेजी थी। विशाल ने बारी-बारी उन दुकानों का चक्कर लगाने की ठानी। कई सारी दुकानों पर घूमने के बाद भी कोई नतीजा नहीं मिला। कोई दुकानदार मृतक के बारे में कोई जानकारी न दे सका। तब तक दोपहर हो गई थी। विशाल ने एक उडीपी रेस्टोरेंट में जाकर एक मसाला डोसा खाया फिर अपनी लिस्ट को चेक किया जिसमें तीन दुकाने बची हुई थी। विशाल जैसे फील्डवर्क करने वाले पुलिसकर्मियों का जीवन ऐसे ही बीतता था। विशाल अपनी लिस्ट में लिखित अगली दुकान पर जा पहुंचा। मेसर्स रमणीक लाल एंड संस नामक यह दुकान अँधेरी के पॉश इलाके में स्थित थी। अँधेरी में लोखंडवाला का यह इलाका फ़िल्मी हस्तियों की रिहाइश के  लिए काफी प्रसिद्ध था। यहाँ फिल्म और टेलीविजन की दुनिया से जुड़े लोगों की भरमार थी। यह इलाका उस प्रसिद्द जुहू इलाके से सटा हुआ था जहाँ बॉलिवुड के सितारे रहते थे और विश्वप्रसिद्ध जुहू समुद्री बीच था। उसने रमणीकलाल की दुकान पर जाकर अपना परिचय दिया तो फ़ौरन उसे मैनेजर के केबिन में ट्रांसफर कर दिया गया। मैनेजर एक लगभग पचास साल का गुजराती था। जिसने अपना परिचय मगन भाई के रूप में दिया। मगन भाई आदतन अधिक बोलने वाला व्यक्ति था। उसने ठेठ गुजराती स्टाइल में, अरे आवो आवो मोटा साहेब! बेसो! कहकर विशाल का स्वागत किया। फिर वह धंधे की मंदी और दूसरे दुखड़े सुनाने लगा।

"सुनो मगनलाल! मैं तुम्हारे पास एक जानकारी लेने आया हूँ, विशाल बोला।'' 

यह नौजवान पुलिसमैन उसके पास कोई पैसा लेने नहीं आया है यह जानकर मगन भाई ने चैन की ऐसी लंबी सांस ली जो मीलों दूर से सुनी जा सकती थी। तुरंत उसके चेहरे के भाव बदल गए! 

अरे बोलो न साहेब! क्या मदद करूँ? 

विशाल ने मगन भाई को मृतक के बारे में जानकारी दी और लिनन के कपड़े की शर्ट पहनने वाले व्यक्ति के बारे में जानकारी चाही। 

साहब! मैं तो इस आदमी के बारे में कुछ नहीं जानता, मगनलाल सिर खुजाता हुआ बोला तो विशाल का चेहरा उतर गया।

   लेकिन हमारा लिनन का सेक्शन राजाराम देखता है, मैं उसे बुलाता हूँ शायद उसे कुछ पता हो! यह सुनकर विशाल के मन में आशा की क्षीण सी किरण कौंध गई।

       थोड़ी देर में एक अधेड़ उम्र के महाराष्ट्रियन व्यक्ति ने आकर उसे सलाम किया। 

  राजाराम! मगनलाल बोला, साहब जो बोलें उसे ध्यान से सुनो और जवाब दो समझे?

होय साहेब! राजाराम बोला।

विशाल ने राजाराम को पूरी वस्तुस्थिति समझाई और अपने पास से निकाल कर जैसे ही सोने की जंजीर दिखाई कि राजाराम चौंक पड़ा और बोला, ये तो शेट्टी साब की चैन है। दो हफ्ते पहले ही ये शर्ट सिलवाकर गए हैं। मैं अच्छे से इनको जानता हूँ। ये हमारे पुराने ग्राहक हैं। विशाल ने चैन की सांस ली।

रहस्य कथा

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