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आनन्द और बूढ़ी अम्मा
आनन्द और बूढ़ी अम्मा
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© Pramod Bhandari

Drama Inspirational

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रोज की तरह पनवेल से सीएसटी वाली लोकल ट्रेन में भीड़ भाड़, धक्का मुक्की और शोर गुल था। भेड़ बकरियों की तरह फंसे हुए, धंसे हुए और लटके हुए लोग्। सबका एक ही मकसद, समय पर ऑफ़िस या काम पर पहुंचना। ऐसे माहौल में तू-तू मैं-मैं और झगड़े स्वाभाविक रुप से जारी थे।

गोवंडी से एक बूढ़ी अम्मा भीड़ भरे सेकंड क्लास कोच में चढ़ी, बड़ी मुश्किल से अपने आप को संभाला और गेट के पास एक साइड में दुबके खड़ी थी। साधारणतया ऐसी भीड़ में महिलाए लेडिज कोच में ही सफ़र करती है पर वो अम्मा लेडिज कोच की जगह पुरुषों से ठसाठस भरे इस कोच में आ गई थी ।

कुर्ला स्टेशन आने वाला था और बीच रास्ते, गेट के पास खड़ी अम्मा पर लोगों का गुस्सा और झल्लाहट साफ नजर आ रही थी। कुर्ला उतरने के लिए आनन्द अपना लेपटॉप बेग लटकाए भीड़ में जगह बनाने की कोशिश कर रहा था पर साथ ही बूढ़ी अम्मा पर लोगों के शब्द बाण उसे साफ़ सुनाई दे रहे थे और आनन्द के दिल में अन्दर तक चुभ रहे थे।

“बुढ़ापे में हाथ पैर तुड़वाओगी क्या”,

“इतनी क्या गाई थी ट्रेन में चढ़ने की”,

“बीच में खड़ी हो, हमको लेट करोगी”,

“अभी थोड़ा साईड ही रहो” आदि आदि। क्योंकि अधिकतर लोगों को कुर्ला उतरना था तो सब लोग जगह बना कर अम्मा को अंदर जाने देने से कतरा रहे थे।

मुम्बई लोकल में ये रोज का माहौल है और समय पर पहुंचने की आपा-धापी में दुसरे पर गुजर रही मुश्किलों पर ध्यान कम ही जाता है। कई बार चाहते हुए भी लोग ये सब अनदेखा कर जाते है।

अब चूंकि कुर्ला स्टेशन आने वाला था और अम्मा पर क्या गुजरने वाली थी, इसका सहज ही अंदाजा लग रहा था। लोग धकेलते हुए नीचे उतरेंगे, शायद वो गिर भी सकती है, 70-80 लोगों का सैलाब 10 सेकंड में पास से गुजरेगा तो कुछ भी हो सकता था। आनन्द की बैचेनी बढ़ रही थी, उसने सोच लिया “आज जो भी हो, बूढ़ी अम्मा की सहायता करनी है”। अभी कुर्ला आने में 2-3 मिनट बाकी थे, वो हिम्मत करके आगे बढ़ा, लोगों का गुस्सा और गालियां झेलते हुए अम्मा वाली साईड तक पहुंच गया। अपने दोनो हाथों से अम्मा को घेर कर खड़ा हो गया और बोला “घबराईये नही और शान्ति से खड़ी रहे, धक्का लगे तो मुझे कस कर पकड़ ले, मैं आपको गिरने नही दूंगा”।

कुर्ला स्टेशन आया और भीड़ का सैलाब आनन्द और बूढ़ी अम्मा को धकेलते, टकराते और प्रहार करते निकल गया। आनन्द चट्टान बन कर खड़ा रहा और अम्मा को गिरने से और चोट खाने से बचा ही लिया। कुर्ला स्टेशन निकल गया और भीड़ अब कम हो गई थी। आनन्द ने अम्मा को अन्दर जगह देख कर बिठाया और बोला “आप अपना ध्यान रखना”। अम्मा ज्यादा कुछ बोली नही पर उनकी आँखों के आंसू उनके दिल का हाल बता रहे थे।

आनन्द कुर्ला उतर नही पाया और ऑफिस के लिए 20 मिनट लेट हो गया. अम्मा की मदद की खुशी के आगे वो बॉस की डांट खाने को पूरी तरह तैयार था।

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