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पाँव तले आसमान !
पाँव तले आसमान !
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© Jahnavi Suman

Comedy

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हमारे देश  की जनता  का  आचार व्यवहार  सार्वजनिक स्थलों पर न जाने कैसा हो जाता है, कि  देख कर लगता है, बिना राजा की प्रजा वाले देश में आ गए हों, जहाँ  प्रत्येक व्यक्ति  अपनी  मर्ज़ी का  मालिक  है। चाहे, कोई रेलवे स्टेशन ले लो  या हवाई अड्डा। 

 निर्देश भले ही कुछ भी लिखे हों, उद्घोषणा चाहे  कुछ भी हो रही हो , लेकिन यहाँ पर आए यात्री हों या यात्रियों को रेलवे स्टेशन या हवाई अड्डे तक छोड़ने आए, उनके  रिश्तेदार सब अपनी मर्ज़ी से  ही चलेंगे। अगर  आप नई दिल्ली  रेलवे  स्टेशन पर जाएँ, तो  वहाँ लोगों का आचरण देखते हुए, क्या आप को ऐसा  नहीं लगता  कि यहाँ  उद्घोषणा कुछ' इस प्रकार हो रही है,

 उद्घोषणा---

 नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आपका स्वागत है। कृपया आँखे बंद कर के चलें व आस पास के लोगों को कोहनी मारते रहें। किसी भी लावारिस व संदिग्ध वस्तु के निकट जा कर उसे छू छू कर देखें। प्रत्येक वस्तु बम नहीं होती, हो सकता है कोई व्यक्ति अपना क़ीमती सामान रेलवे स्टेशन पर भूल गया हो, जिसे पाकर आप मालामाल हो जाएँ। बस यही तो  आपकी ज़िंदगी का पहला और आखरी पल है, जब महालक्ष्मी की कृपा आप पर बरस सकती  है।  इस सुअवसर को हाथ से  न जाने दें। 

रेलवे द्वारा अनुबंधित कुली पर सामान  लादना आपको महंगा पड़ सकता है ,इसलिये आप ऐरे गेरे नत्थू खेरे मज़दूरों पर सामान लाद  सकते हैं। आप सारा का सारा  सामान अपने नाज़ुक कन्धों पर भी लाद  सकते हैं, पचास -साठ रुपए तो अवश्य ही आप के बचत खाते में चले जाएँगे बस दो चार रातें आप को करवटें बदल कर गुजारनी पड़ेंगी और  दिन में थोड़ा सा कराहना पड़ सकता है।  

 गाड़ी  संख्या के आधार पर प्लेटफार्म का चुनाव न करें, किसी भी प्लेटफार्म पर जाकर खड़े हो जाएँ। रेलवे कर्मी स्वयं आपको गोदी में उठा कर गाड़ी तक ले जाएंगे। 

केले के छिलके, पेय पदार्थों के खाली डिब्बे, कूड़ा-करकट इत्यादि यहाँ -वहाँ अवश्य फ़ैलाएँ, अन्यथा सफ़ाई  कर्मचारियों  को निठल्ला  बैठने  की आदत  पड़  जायेगी। 

यदि आपके  साथ छोटे बच्चे भी सफ़र  कर रहे हैं , तो आप उनका हाथ  न पकड़ें, यही सबसे बेहतर  अवसर है, अपने बच्चों की बुद्धि परखने  का, कि  क्या  वह  अपने माता पिता  को पहचानते  हैं,  या किसी भी  महिला - पुरुष को  अपना  माता -पिता समझ कर उनके साथ चले जाते हैं। 

आप  को अपने कीमती  सामान   की स्वयं सुरक्षा  करने की कोई आवश्यकता नहीं।  यदि अपने सामान का आप स्वयं ध्यान रखेंगे, तो दिल्ली पुलिस के जवान क्या यहाँ मूँगफली बेचेंगे।  

रेलवे की सम्पति आपकी अपनी सम्पति है। आप जो भी चाहें, यहाँ से उखाड़ कर ले जाएँ। 

प्लेटफार्म पर फ़ोटोग्राफ़ी व वीडियो बनाने में हमें कोई आपत्ति नहीं। आप का सेल्फ़ी खींच कर फेसबूक अपडेट करना बहुत ज़रूरी है। कल झेलम - एक्सप्रैस, अपने निर्धारित समय पर, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से रवाना हो गई थी। जिसका हमें खेद है। कई यात्री इस कारण यात्रा से वंचित रह गए । बरसों से विलंब से चल रही, इस रेलगाड़ी को समय पर रवाना कर, संचालक ने रेलवे की साख को गहरा धक्का पहुँचाया है । अतः उसे तत्काल प्रभाव से इस पद से  निष्कासित कर दिया गया है। 

रेलगाड़ी के प्लेटफार्म पर रुकते ही, उसमेँ  प्रवेश पाने के लिए धक्का-मुक्की अवश्य करें। आप के बच्चों के ज्ञान चक्षु खुलेंगे । वह क्रिकेट के अतिरिक्त मुक्केबाजी और कुश्ती के खेल के प्रति भी आकर्षित होगें । 

कोई  अनजान व्यक्ति, आपको यदि खाने -पीने की कोई वस्तु  देता है, तो तुरंत उसे ईश्वर का प्रसाद समझ कर ग्रहण कर लें और अपने पूरे परिवार में उसे बाँट दें । हो सकता है वह व्यक्ति कुम्भ के मेले में बिछुड़ा आपका जुड़वाँ भाई हो । 

रेलगाड़ी की खिड़की से बाहर  मुँह  निकाल कर हिंदी फ़िल्मो के हीरो की तरह गाना गुनगुनाये । हाथों को हवा में लहराएँ । आप ने टिकिट खरीदा है उसका पूरा-पूरा लाभ उठाएँ । सीट पर जूते -चप्पल पहनकर कूदें।  अपने बच्चों को एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे तक भागकर पकड़न- पकड़ाई खेलने दें। 

बर्थ पर सोएं या फर्श पर, रेलवे विभाग आपकी सुखद यात्रा की   मंगल कामना करता है। 

यहाँ आकर अच्छे अच्छों को पाँव तले आसमान दिखाई देने लगता है। 

रेलवे स्टेशन उद्घोषणा लोग भीड़ -भाड़

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