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मुस्कान - एक तलाश
मुस्कान - एक तलाश
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© Tanha Shayar Hu Yash

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टी वी के सामने सिंगिंग कॉम्पिटिशन इंडियन आइडल चल रहा था उसमे कुछ सिंगर बहुत अच्छे तो कुछ सिंगर बहुत ख़राब थे, अच्छे सिंगर को सुनकर लगता था की ये ही जीतेंगे। पर मैं इससे इत्तेफाक़ रखता हूँ और जानता हूँ की अगर अच्छे सिंगर को वोट नहीं मिले तो वो भी बाहर हो सकता है। ऐसे कितनी ही बार हुआ है की अच्छे सिंगर को वोट नहीं मिल पाते और बुरे सिंगर को वोटिंग के आधार पर जीत मिल जाती है। मेरा यहाँ नाम लेना ठीक नहीं रहेगा पर फिर भी मेरे खुद के सर्वे के मुताबिक ज़्यदातर जो सिंगर जीतते है वो किसी ना किसी संगीत विद्यालय से जुड़े होते है। जुड़े होते है तो अच्छी बात है पर ये लोग पहले से इतने सक्षम होते है की ये अच्छी वोटिंग करा सकते है। टी. वी देखते वक़्त मुझे कई बार ऐसा लगा की शायद ये वोटिंग के चलते बाहर हुए है। पर कोई बात नहीं मैं खुद भी टूटा फूटा सिंगर हूँ तो इतना बड़ा बयान शायद मुझे नहीं देना चाहिए। असली मुद्दा ये है की मुझे एक फीमेल सिंगर की जरूरत है या कहो की तलाश है तो चलो चलते है इस तलाश पर। ...


फेसबुक पर मेरे बहुत सारे दोस्त बन चुके है उन्ही में से किसी को बोल देता हूँ की मेरे लिखे गीत गा दे। अरे अभी तक मैंने अपना नाम तो आपको बताया ही नहीं मेरा नाम है सुभम पर जिस दिन से इस सिंगर की तलाश कर रहा हूँ उस दिन से आज तक कुछ भी शुभ नहीं हुआ है। फेसबुक पर एक अच्छी सिंगर है जो दोस्त बनी है उसका नाम है आरज़ू। नाम इतना अच्छा है की कोई दो चार सुने तो प्यार हो जाये पर मुझे नहीं हुआ हाँ आवाज़ से हुआ और मेरी जरूरत भी ये आवाज़ ही है।


सुभम : कैसे हो आरज़ू

आरज़ू : गुड सर, आप बताइये कैसे है

सुभम : मुझे तुमसे कुछ पर्सनल रेक़ुएस्ट करनी है।

आरज़ू : जी, बोलिये। 

सुभम : मुझे आपकी आवाज़ बहुत पसंद है

आरज़ू : जी, आपका बहुत बहुत धन्यवाद। 

सुभम : क्या आप मेरे लिखे गीत गा सकते है। 

आरज़ू : पर आप लड़की क्यों ढूंढ रहे है आप खुद क्यों नहीं गाते। 

सुभम : मैं सोच रहा की हम दोनों ये गीत तैयार करे। 

आरज़ू : ठीक है मैं आपके साथ ये गीत ज़रूर गाउंगी। आपने सीखा है कहीं से।

सुभम : नहीं, अभी तक तो नहीं

आरज़ू : सर, जितना में जानती हूँ आप बहुत अच्छा लिखते है आपने गीत भी बहुत अच्छे लिखे होंगे। पर उसको और अच्छा बनाने के लिए आपको एक अच्छे गयक की जरूरत पड़ेगी।

सुभम : ठीक है मैं एक अच्छे मेल सिंगर भी ढूंढ लेता हूँ। पर तुम अपना प्रॉमिस मत भूल जाना।

आरज़ू : जी नहीं आप मुझे कांटेक्ट कर लेना। 


(सुभम ने फेसबुक अकाउंट बंद किया और चल पड़ा मेल सिंगर की तलाश में। सुभम हर सुबह किसी न किसी तरह वो किसी मेल सिंगर से मिलता और वापिस आ जाता। जानते है क्यों ? उनकी फ़ीस सुनकर, कोई उससे एक गीत गाने के लाख मांगता तो कोई दो लाख, किसी के रेट सुनकर तो सुभम का दिल करता की जो भी गीत लिखे सब फाड़ कर फेंक दे। ऐसे ही दिन गुज़रने लगे छह महीने बीत गए। )


एक दिन सुभम ऐसे कुछ सोचता हुआ अकेले ही रोड पर चले जा रहा था। रोड साइड लगे बोर्ड पढ़ता हुआ तभी एक बोर्ड पर नज़र पड़ी। मेल फीमेल सिंगर ऑडिशंस सुभम ने सोचा की ये पास ही हो रहा है क्यों न चलकर देखा जाये। सुभम ने एड्रेस नोट किया और पहुंच गया ऑडिशन वाली जगह पर। वहां एक तरफ बहुत भीड़ लगी थी और कोई किसी को भी आगे नहीं जाने दे रहा था। 


सुभम : अरे भाई सुनो ये भीड़ ऑडिशन देखने वालो की है क्या ?

आवाज़ आई : नहीं भाई ये सब सिंगर है ऑडिशंस के लिए आये है। 

सुभम : ये तो बहुत सारे है। 

आवाज़ आई : हाँ भाई ये सब सिंगर है। 


सुभम इतने सिंगर देख कर हैरान हो गया उसने सोचा मैं जो सिंगर ढूंढ रहा हूँ वो इनमें भी तो मिल सकता है। उसने वह कई सिंगर से गाना सुना पर उसको वो फील ही नहीं आया जो वो खुद गा गाकर उनको बता रहा था। उनमें से एक बहुत चिढ़ गया और बोला। 


लड़का : भाई जब आपको वो फील खुद गाने से मिल रहा है तो आप ही क्यों नहीं सिंगर बन जाते। साल भर में तो बन ही जाओगे। वैसे भी यहाँ साल दो साल वाले सिंगर ज्यादा हैं। 


( सुभम को ये बात किक कर गई। सुभम भीड़ से दूर हट गया और सोचने लगा। )

सुभम : बुराई तो कुछ नहीं है मेरे पास फीमेल सिंगर भी है क्यों न मैं ही कोशिश करूँ। वैसे भी मुझे भटकते हुए छह महीने से ज्यादा हो गए है सिंगर बनना इतना मुश्किल तो नहीं होगा।


सुभम वापिस भीड़ की तरफ बड़ा और एक एक से पूछने लगा। तुमने कहा से सीखा, तुम्हारी कितनी फीस है साल की। तब सुभम ने पाया की साल भर की फीस सब मिलाकर २५ से ५० हज़ार तक है और अच्छे सिंगर एक गीत के ५० से ५ लाख तक मांग रहे है। क्यों न एक कोशिश खुद की जाये। 


सुभम ने संगीत विद्यालय की खोज शुरू कर दी। सुभम के पास भगवान ने इतनी सेन्स दे रखी थी की वो अच्छे सुर की पहचान कर सके। चाहे वो खुद कितना ही बेसुरा क्यों न गाता हो। बहुत से संगीत स्कूल सुभम ने तलाश मारे। लेकिन उसकी तलाश अच्छे स्कूल की है अच्छे गुरु की थी। फिर एक दिन


सुभम : हेलो मैम, मुझे संगीत सीखना है

( दूसरी तरफ से आवाज़ आई, सर आपको टेस्ट देना होगा फिर हमारी मैम बतायेगी की आप संगीत सिख सकते है या नहीं। )

सुभम : ठीक है मैं कल शाम को आता हूँ। 

( अगले दिन सुभम शाम को वहां पहुंच गया और क्लास रूम में दाखिल हुआ। वहां कई लड़के लड़कियाँ बैठे थे। कुछ नए थे तो कुछ पुराने। सबके नाम बताये गए फिर सुभम को एक गीत कोई भी जो उसे पसंद हो गाने के लिए बोला गया। )


सुभम ने गीत गया "होठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो "

( सुभम की आँखें गीत गाते हुये उस क्लास में किसी की नज़र पर ठहर रही थी बार बार -२ सुभम बार नज़र हटाता पर ना जाने क्यों उसकी नज़र फिर उसी चेहरे पर टिक जाती। जैसे ही सुभम ने गीत ख़तम किया। आवाज़ आई। )


मुस्कान : आपने तो बहुत अच्छा गया है। 

( और सुभम कुछ कहता इससे पहले सबने तालियां बजा दी और सब शब्द उसी शोर में खो गए। )


क्रमश...


गीत भीड़ सिंगर

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