Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
सुदूर समंदर-मध्य शीला पर
सुदूर समंदर-मध्य शीला पर
★★★★★

© Kritant Mishra

Abstract

1 Minutes   7.3K    20


Content Ranking

सुदूर समंदर-मध्य शीला पर
बैठा सोच में हूँ बेहाल,
जल के भीतर हाल वही, जो जल के बहार हाल
मछली बच कर जाए कहां, जब जल ही सारा जाल |
विचारों से झुंझला उठा हूँ
छेड़ा मैंने आरोही साज़
शंखनाद कर, कर रहा हूँ
नए युग का आगाज़ !

प्रारम्भ हुआ यज्ञ, ज्वाला भड़की
विश्व-पटल पर लिखूं नया इतिहास !
क्रोधित नैन जल जला रहे हैं
आई अश्रु-सागर में बाढ़ |
तनी भौंहें, तलवार हैं चक्षु
न आये इन्हें, तनिक भी लाज !

रोषित लहू, उर धधक रहा है
सुलग रही परिवर्तन आंच |
अंतर्मन की तप्त अगन से
हाय ! सूखा सागर आज !
सुदूर समन्दर-मध्य शीला पर
जो भड़का परशुराम का दास |

 

kritant

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..