Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
धड़कती हमारी धड़कनें
धड़कती हमारी धड़कनें
★★★★★

© Kritant Mishra

Abstract

1 Minutes   6.9K    18


Content Ranking

रुकता,फिर चलता
ठिठकता, बहकता
उस रात कुछ यूँ ही उसका अंदाज़ था |
घटाओं में बहता
                     फ़िज़ाओं में रहता
उस रोज़ का वो शबाब
कुछ तो ख़ास था |

पर मैं अनजान इस राज़ से
करवटें बदलता
जानने को क़ायल
पलटता दिल की किताब था |

करीब आया वो मेरे
हाँ!
उस रात
जज़्बात का खुमार था 

बाहों में भरकर मुझे
होंठो का जाम पिलाया
ख़ुद का कुछ भी नहीं बचा मेरे पास 
बहता रग-रग में
अब तो..
वो ही मेरा लिहाफ़ था 

धड़कती हमारी धड़कनें
उलझती साँसें
सिमटती ज़ुल्फ़ें
जैसे
दो नदियों के संगम पर उठती लहरें
और एक होने की चाहत में हम 

'जवाबों से डरता अब हर सवाल था' |

उस रात बीता हर लम्हा
मोहब्बत का दीदार था |
हाँ !
वो प्यार था |

 

लिहाफ़

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..