Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
दिल किसी का मत दुखाओ,मत सताओ
दिल किसी का मत दुखाओ,मत सताओ
★★★★★

© Anshul Jain

Abstract

1 Minutes   13.9K    19


Content Ranking

 

दिल किसी का मत दुखाओ,मत सताओ 
जिन्दगी तो मुस्कराने के लिये है 

कर रहा सन्दल, पवन का रूप शीतल 
पुष्प जग को सुरभियों से भर रहा है 
कोकिलायें घोलतीं संगीत मीठा – 
कोई पर्वत बन के झरना,  झर रहा है 

मिलन का सावन न विन भीगे गवाओ 
यह प्रणय मिलने मिलाने के लिये है 

घुघरुओ की छनछनाहट नाचती है 
तितलियां लिखती है कलियो पर उजाले 
कंगनों की खनखनाहट कह रही है 
दिन सुगन्धित है सभी अब आने बाले 

चीख छोडो,कुछ सुनहरे गीत छेडो, 
यह जनम तो गुनगुनाने के लिये है 

फिर भला अधियार क्या ठहरे कही भी 
आगमन हो जब धरा पर ज्योतियों का 
जब दिया भी जगमगाकर रौशनी से 
हार पहनाये गले मे मोतियों का 

इस तरह तुम भी हृदय दीपक जलाओ 
जो

--  भी पल हैं, जगमगाने के लिये है 

इस तरह तुम भी हृदय दीपक जलाओ

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post


Some text some message..